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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur: Village Heads Raise Voice for Rights at Mahachaupal, Warn of Mass Resignation

कानपुर: घाटमपुर में ग्राम प्रधानों की महाचौपाल, अधिकारों से वंचित किए जाने पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

Sun, 30 Aug 2026 05:11 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Sun, 30 Aug 2026 05:11 PM IST
सार

Kanpur News: नगर के ग्राम प्रधानों की महाचौपाल रविवार को कस्बे के एक गेस्ट हाउस में आयोजित की गई। इसमें प्रधानों ने अपने अधिकारों, कार्यकाल और ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की।

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Kanpur: Village Heads Raise Voice for Rights at Mahachaupal, Warn of Mass Resignation
ग्राम प्रधानों की महाचौपाल - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रधानों ने स्पष्ट कहा कि यदि उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया गया तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे। महाचौपाल में प्रशासक कार्यकाल के दौरान आने वाली दिक्कतों और ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के सामने आ रही बाधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने अपने-अपने कार्यकाल में अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों से जुड़ी समस्याएं भी साझा कीं।

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कार्यक्रम का आयोजन घाटमपुर ब्लॉक प्रमुख इंद्रजीत सिंह, पतारा ब्लॉक प्रमुख कोमल सिंह, बिधनू ब्लॉक प्रमुख यशवंत सिंह, भीतरगांव ब्लॉक प्रमुख अशोक सचान और घाटमपुर प्रधान संघ अध्यक्ष रेखा सिंह की अध्यक्षता में किया गया। महाचौपाल में कानपुर नगर के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान शामिल हुए।

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सचिवों के रवैये पर उठाए सवाल

प्रधानों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सचिवों का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। उनका कहना था कि कई मामलों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रधानों ने अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों के साथ बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।

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अधिकारों में कटौती पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

महाचौपाल में प्रधानों ने एक स्वर में अपने संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों को पर्याप्त अधिकार मिलने पर ही वे गांवों में विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से करा सकेंगे। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारों में कटौती की गई या उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से अलग किया गया तो सभी सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे।



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