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Kanpur: मुखिया का नाम बदला और परिवार की पहचान गुम, 2003 के रिकॉर्ड ने बिगाड़ा परिवारों का गणित, पढ़ें डिटेल

Wed, 11 Feb 2026 10:53 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 11 Feb 2026 10:53 AM IST
सार

Kanpur News: कानपुर के एसआईआर अभियान में 2003 की मतदाता सूची और वर्तमान आधार कार्ड के बीच विसंगतियों के कारण हजारों लोगों की पहचान संकट में है। महिलाओं और उन परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है, जिनके नाम समय के साथ बदल गए हैं।

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Kanpur The heads name has changed and family identity has been lost 2003 records have disrupted calculations
जगनीखेड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में लगे एसआईआर सर्वे शिविर में मौजूद लोग - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने हजारों लोगों की पहचान को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। मुखिया का नाम बदल गया तो पत्नी और बच्चों को यह साबित करने में पसीने छूट जा रहे हैं कि मुखिया से उनका संबंध क्या है। सजेती क्षेत्र के मुन्ना का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में मुनीर अहमद दर्ज था। समय के साथ नाम बदला और अब आधार कार्ड भी मुन्ना नाम से है, लेकिन समस्या यह है कि पुराने और नए नाम को जोड़ने वाला कोई सरकारी दस्तावेज मौजूद नहीं है।

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अब स्थिति यह है कि पत्नी शरीफन को यह साबित करना पड़ रहा है कि मुन्ना ही उनके पति हैं। बेटे मो. इलियास को यह साबित करना है कि मुन्ना ही उनके पिता हैं। नोटिस मिलने के बाद एक माह से पूरा परिवार पहचान के जाल में उलझ गया है। इसी तरह घाटमपुर ब्लाॅक के हरदौली गांव में 2003 की सूची में दर्ज छोटे का नाम अब राम किशोर हो गया है। पत्नी माया अब कलावती बन चुकी हैं।

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एसआईआर में पुराना नाम दीवार बन गया
आधार कार्ड दोनों के नए नामों से बने हैं, लेकिन पुराने नामों से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं हैं। अब उनके चार बच्चे इसलिए परेशान हैं कि कैसे साबित करें कि छोटे ही राम किशोर हैं। इसी गांव के रामू अब रामबाबू और पत्नी सीता देवी अब तेजी हो चुकी हैं। आधार नए नामों से है, लेकिन एसआईआर में पुराना नाम दीवार बन गया है। अब मतदाता बनने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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इटर्रा गांव में मतदाताओं की नोटिसों का सत्यापन करती तहसीलदार अंकिता पाठक - फोटो : amar ujala

मां बेटे से निकली पांच साल छोटी
पतारा ब्लाॅक के कटरा क्षेत्र के नौशाद का मामला और चौंकाने वाला है। वर्तमान में इनकी उम्र 28 वर्ष है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में इनकी मां हसीना की उम्र 18 वर्ष दर्ज है। उस हिसाब से 23 साल पहले नौशाद की उम्र पांच साल मानी जाए तो सवाल उठ रहा है क्या 13 साल की उम्र में हसीना मां बन गई थीं। कागज की एक गलती ने पूरे परिवार को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। अब सही दस्तावेज देने में नौशाद परेशान हैं।

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दो भाई पर मतदाता सूची में फोटो एक जैसी
बिधनू ब्लॉक के खेरसा गांव में एसआईआर की सूची जारी होने के बाद गंभीर मामला सामने आया। ब्रह्म कुमार और अशोक कुमार दोनों सगे भाई हैं। पिता का नाम बाबूरा है। 2003 की सूची में ब्रह्म कुमार के पिता का नाम बाबूराम और अशोक कुमार के पिता का नाम बाबू सैनी दर्ज है। मतदाता सूची में दोनों भाइयों के नाम के आगे ब्रह्म कुमार की फोटो लगी हुई है। अब अशोक कुमार को आधार, फोटो और पिता के दस्तावेज देकर यह साबित करना पड़ रहा है कि वह अलग व्यक्ति हैं।

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विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्य - फोटो : amar ujala

महिला वोटरों पर सबसे ज्यादा मार
शिवराजपुर ब्लॉक के रौतापुर गांव की प्रीती पत्नी नीरज वर्षों से वोट डालती आई हैं लेकिन इस बार नाम गायब है। उनसे पति होने का प्रमाण मांगा गया जिसके लिए शादी का कार्ड देना पड़ा। वहीं सुमित्रा देवी पत्नी छोटे लाल से 2003 की वोटर लिस्ट और पति के दस्तावेज मांगे गए। कई बार ब्लॉक जाने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही। बिल्हौर ब्लॉक में एसआईआर के दौरान जिन महिलाओं के नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उनके नाम काट दिए गए। इब्राहिमपुर रौंस निवासी रावेंद्र ने बताया कि उनकी शादी 2008 में पश्चिम बंगाल की सिमरा से हुई थी। अब पत्नी का नाम काट दिया गया है। न ससुर जीवित हैं, न उनके वोटर कार्ड उपलब्ध और अधिकारी वही दस्तावेज मांग रहे हैं।

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