{"_id":"696377ecf9fac027370403b4","slug":"kanpur-thakurdwara-temple-in-purwamir-turned-into-ruins-instead-of-conch-shells-now-liquor-glasses-clink-there-2026-01-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Kanpur: पुरवामीर का ठाकुरद्वारा मंदिर बना खंडहर, शंख की जगह अब छलकते हैं जाम; धरोहर बनी खंडहर…पढ़ें मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur: पुरवामीर का ठाकुरद्वारा मंदिर बना खंडहर, शंख की जगह अब छलकते हैं जाम; धरोहर बनी खंडहर…पढ़ें मामला
Sun, 11 Jan 2026 03:47 PM IST
हिमांशु अवस्थी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: हिमांशु अवस्थी
Updated Sun, 11 Jan 2026 03:47 PM IST
सार
Kanpur News: पुरवामीर गांव का प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर अष्टधातु की मूर्तियां चोरी होने के बाद असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। देखरेख के अभाव में यह विशाल इमारत अब खंडहर में तब्दील हो रही है।
विज्ञापन
पुरवामीर के प्राचीन राम मंदिर को संवारने की गुहार
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर में नरवल तहसील के विकासखंड सरसौल के अंतर्गत आने वाले पुरवामीर गांव का प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर आज अव्यवस्थाओं का शिकार होकर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। सैकड़ों वर्ष पहले निर्मित इस मंदिर में माता सीता, श्रीराम और लक्ष्मण जी की अष्टधातु की मूर्तियां विराजमान थीं। इनकी दिव्यता और ऊर्जा से मंदिर की भव्यता दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी, लेकिन कालचक्र ने ऐसा करवट ली कि अज्ञात चोरों ने इन मूर्तियों की चोरी कर ली और यहीं से मंदिर के पतन की कहानी शुरू हुई।
विज्ञापन
एक ओर सरकार मंदिरों की खोज और संवर्धन में जुटी है। वहीं, इदूसरी ओर इस विशालकाय मंदिर में दिनभर शराबियों और जुआरियों का जमावड़ा रहता है। असामाजिक तत्व मंदिर परिसर को अपना अड्डा बनाए हुए हैं। ग्रामीणों ने कई बार चंदा एकत्र कर मंदिर को संवारने का प्रयास किया, लेकिन सहयोग की कमी और परिस्थितियों के विपरीत होने के कारण हर बार प्रयास अधूरा रह गया। ग्रामीण बताते हैं कि यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और इसकी इमारत आज भी मजबूत है, लेकिन देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे यह खंडहर में बदल रहा है।
विज्ञापन
सांस्कृतिक धरोहर को सहेजना हम सबका कर्तव्य
यदि समय रहते इसकी देखरेख नहीं हुई, तो आने वाले समय में इस धरोहर को बचाना मुश्किल हो जाएगा ठाकुरद्वारा मंदिर कभी अपनी दिव्यता और भव्यता के कारण दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता था। लेकिन अब उपेक्षा और असामाजिक गतिविधियों के कारण इसकी पहचान मिटती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े मंदिर की देखरेख और पुनर्निर्माण सरकार की मदद के बिना संभव नहीं है। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इसे सहेजना हम सबका कर्तव्य है।