Kanpur Sikh Riot: सिख विरोधी दंगे के चार आरोपी गिरफ्तार, अभी और भी गिरफ्तारियां होंगी
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कानपुर शहर में हुए दंगों के मामले में एसआईटी, कानपुर कमिश्नरेट और कानपुर आउटर पुलिस ने संयुक्त अभियान में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा।
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1984 में हुए सिख विरोधी दंगे के मामले में 38 साल बाद फिर गिरफ्तारियां शुरू हुई हैं। एसआईटी ने बुधवार को तिहरे हत्याकांड में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। ये चारों आरोपी दिवंगत तत्कालीन राज्यमंत्री शिवनाथ नाथ सिंह कुशवाहा के गुर्गे थे। शिवनाथ के भतीजे की अगुवाई में हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। उसकी तलाश जारी है। एसआईटी ने गिरफ्तारी की यह पहली कार्रवाई की है।
31 अक्तूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में सिख विरोधी दंगे हुए थे। कानपुर में 127 लोगों की हत्या कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फरवरी 2019 को शासन ने दंगों के केसों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी के डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि दंगों में निराला नगर निवासी भूपेंद्र सिंह, रक्षपाल सिंह व मकान मालिक के बेटे सतवीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। भूपेंद्र व रक्षपाल सिंह को जला दिया गया था। इस केस की विवेचना पूरी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
केस में हैं 27 आरोपी, राज्यमंत्री का भतीजा है मुख्य
डीआईजी के मुताबिक इस केस में कुल 27 आरोपी हैं, जिनमें से चार की गिरफ्तारी कर ली गई है। 23 आरोपियों की तलाश जारी है। जल्द वह भी पकड़े जाएंगे। विवेचना में सामने आया कि इस तिहरे हत्याकांड में दिवंगत पूर्व राज्यमंत्री शिवनाथ सिंह का भतीजा राघवेंद्र सिंह कुशवाहा मुख्य आरोपी है। सभी आरोपी राज्यमंत्री के खास थे। राघवेंद्र ने इन सभी को लेकर निराला नगर स्थित सिखों के घरों पर हमला बोला था। तिहरे हत्याकांड में दो दंगाइयों की मौके पर मौत हो गई थी। एक स्थानीय निवासी राजेश गुप्ता था जबकि दूसरा पश्चिम बंगाल निवासी शख्स था।
सलाखों के पीछे पहुंचेंगे 70 और आरोपी
एसआईटी ने 11 केसों की विवेचना पूरी कर ली है, जिसमें 96 आरोपियों की पहचान की गई। इनमें से 22 की मौत हो चुकी है। कुल 74 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानी है, जिसमें से चार को जेल भेजा जा चुका है। अब 70 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने की जद्दोजहद शुरू हो गई।
एक नजर में सिख विरोधी दंगा
- कानपुर में 127 लोगों की हत्या की गई थी।
- 5 फरवरी 2019 को शासन ने एसआईटी का गठन किया था।
- एसआईटी ने फाइनल रिपोर्ट लगाए गए 20 केसों की विवेचना शुरू की।
- 11 केसों की विवेचना पूरी हो गई, तीन केसों की जारी है।
- 7 केसों में साक्ष्य व गवाह न मिलने पर फाइल बंद कर दी गई।
- 11 केसों में चार्जशीट दाखिल हुई थी लेकिन सजा नहीं हुई।
- जिनमें चार्जशीट दाखिल हुई थीं, उनमें कार्रवाई शुरू करने के लिए कोर्ट में अपील की गई है।
सफीउल्ला, शिवपुरी घाटमपुर
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