कानपुर: 12 करोड़ का सिग्नेचर सिटी बस अड्डा वीरान, न बसें आ रहीं न सवारी, खाली पड़े हैं काउंटर, पढ़ें रिपोर्ट
Kanpur News: विकास नगर में 12 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ सिग्नेचर सिटी बस अड्डा सफेद हाथी साबित हो रहा है। जुलाई 2022 में केडीए द्वारा परिवहन निगम को सौंपे जाने के बावजूद यह बस अड्डा पूरी तरह वीरान पड़ा है।
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कानपुर के विकासनगर में 12 करोड़ की लागत से बना सिग्नेचर सिटी बस अड्डा वीरान पड़ा है। परिवहन विभाग का दावा तो यहां पर 60 बसों के आवागमन का है लेकिन हकीकत में आती एक भी नहीं है। जिन रूटों पर यहां से बसें चलनी हैं। उसी रूट की बसें झकरकटी बस अड्डे से भी मिलती हैं। इसलिए यात्री भी उधर का ही रुख करते हैं।
झकरकटी में यात्रियों की भीड़ और बसों से लगने वाले वाले जाम को देखते केडीए ने विकासनगर में नया बस अड्डा जुलाई-2022 में 12 करोड़ की लागत से बनाकर परिवहन निगम को सौंपा था। योजना थी कि यहां से बैराज होते हुए लखनऊ, दिल्ली, हरिद्वार, हल्द्वानी, मैनपुरी की बसें चलाई जाएंगी लेनिकन जीटी रोड से बस अड्डे की दूरी ज्यादा होने से यात्री यहां आने से कतराते हैं।
20 बसों के प्रस्थान का दावा
चालकों ने बताया कि बस अड्डे पर सवारी न मिलने के अंदेशे में वे बसों को सीधे झकरकटी ले जाते हैं। बस अड्डे से बैराज होते हुए चारबाग जाने वाली एसी बसों को शनिवार दोपहर 2:30 और 3 बजे लखनऊ के लिए छूटना था। न कोई बस आई न गई। बस अड्डे पर लगे बोर्ड में कानपुर से विधूना के लिए सुबह पांच से शाम छह बजे के बीच 20 बसों के प्रस्थान का दावा है, लेकिन एक भी गाड़ी नहीं पहुंची।
कई बसें डिपो के सामने से गुजरीं, लेकिन अंदर नहीं आईं
यही स्थिति हरिद्वार, हलद्वानी, मैनपुरी, आगरा, फर्रुखाबाद, दिल्ली, बरेली रूट जाने वाली बसों की रही। बस अड्डे से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर आजादनगर बस डिपो है। यहां से निकलने वाली बसें सिग्नेचर सिटी बस अड्डे के सामने से जीटी रोड पर पहुंचती हैं। शनिवार दोपहर करीब 12 से तीन बजे के बीच कई बसें डिपो के सामने से गुजर गईं, लेकिन अंदर नहीं आईं।
पूछताछ केंद्र में नहीं बैठते हैं कर्मचारी
जीटी रोड से करीब पांच किलोमीटर दूर पर बने इस बस अड्डे पर एक महिला क्लर्क और दो कर्मचारी तैनात हैं। यहां पूछताछ केंद्र भी है और बसों की समय सारिणी वाला बोर्ड भी, लेकिन जब बस ही नहीं आती तो कर्मचारी भी पूछताछ केंद्र में नहीं बैठते, वह खाली पड़ा रहता है।
अभी 20 से 25 बसें ही आती-जाती हैं। झकरकटी बस अड्डे का निर्माण शुरू होने पर उसे यहां शिफ्ट किया जाएगा। उसके बाद यहां से बसों का आवागमन बढ़ेगा। -महेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम