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UP: केक काट कर मनाया कानपुर का स्थापना दिवस, आठ मार्च 1802 को तैनात हुए थे पहले कलक्टर अब्राहम वेलांड
Sat, 08 Mar 2025 11:29 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 08 Mar 2025 11:29 PM IST
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कानपुर का स्थापना दिवस मनाया
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर इतिहास समिति की ओर से गोविंदनगर स्थित केंद्र पर शनिवार को कानपुर जनपद का स्थापना दिवस केक काटकर मनाया गया। यहां सभी पदाधिकारियों ने एक दूसरे को केक खिलाकर स्थापना के 223 साल पूरे होने पर बधाई दी। जिले में आठ मार्च 1802 को पहले कलक्टर ने कमान संभाली थी।
महासचिव अनूप कुमार शुक्ला ने बताया कि 10 नवंबर 1801 को अवध के नवाब सआदत अली से ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक संधि के तहत बड़ा भूभाग ले लिया, जिसमें सात जिले बने थे। कानपुर उनमें से एक था। जौनपुर के कलक्टर अब्राहम वेलांड को कानपुर का कलक्टर बनाया गया। अध्यक्ष विशंभरनाथ त्रिपाठी ने कहा कि अब्राहम वेलांड को आठ मार्च 1802 को कानपुर जिले के राजस्व, न्यायिक और फौजदारी प्रभार के साथ तैनात किया गया था। कुणाल सिंह ने कहा कि सरकारी और प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक पहले कलक्टर अब्राहम वेलांड 21 मार्च 1803 तक तैनात रहे थे। बाद में उनका तबादला बरेली सर्किट कोर्ट के जज के रूप में हो गया और कानपुर के दूसरे कलक्टर जे रिचर्डसन हुए। उन्होंने 22 मार्च 1803 को चार्ज लिया। संगोष्ठी में कानपुर के इतिहास पुनर्लेखन के लिए उपसमिति अनूप शुक्ल के संयोजन में गठित की गई। इसमें लेखन का दायित्व महेश शर्मा को दिया गया। कार्यक्रम में देव कबीर, प्रखर श्रीवास्तव, नीलम शुक्ला, हर्षित सिंह आदि मौजूद रहे।
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महासचिव अनूप कुमार शुक्ला ने बताया कि 10 नवंबर 1801 को अवध के नवाब सआदत अली से ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक संधि के तहत बड़ा भूभाग ले लिया, जिसमें सात जिले बने थे। कानपुर उनमें से एक था। जौनपुर के कलक्टर अब्राहम वेलांड को कानपुर का कलक्टर बनाया गया। अध्यक्ष विशंभरनाथ त्रिपाठी ने कहा कि अब्राहम वेलांड को आठ मार्च 1802 को कानपुर जिले के राजस्व, न्यायिक और फौजदारी प्रभार के साथ तैनात किया गया था। कुणाल सिंह ने कहा कि सरकारी और प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक पहले कलक्टर अब्राहम वेलांड 21 मार्च 1803 तक तैनात रहे थे। बाद में उनका तबादला बरेली सर्किट कोर्ट के जज के रूप में हो गया और कानपुर के दूसरे कलक्टर जे रिचर्डसन हुए। उन्होंने 22 मार्च 1803 को चार्ज लिया। संगोष्ठी में कानपुर के इतिहास पुनर्लेखन के लिए उपसमिति अनूप शुक्ल के संयोजन में गठित की गई। इसमें लेखन का दायित्व महेश शर्मा को दिया गया। कार्यक्रम में देव कबीर, प्रखर श्रीवास्तव, नीलम शुक्ला, हर्षित सिंह आदि मौजूद रहे।
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