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Kanpur: कोविड के साथ एच3एन2 की भी होगी आरटीपीसीआर जांच, इंफ्लुएंजा को लेकर गाइडलाइन जारी

Tue, 14 Mar 2023 09:19 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 14 Mar 2023 09:19 AM IST
सार

इंफ्लुएंजा की तरह की बीमारी (आईएलआई), सांस की तकलीफ (एसएआरआई) के रोगियों को चिह्नित करके उनकी सघन निगरानी के लिए कहा गया है। सीएचसी, ब्लॉक स्तर पर रोगियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। गाइडलाइन में कहा गया है कि यह मौसमी बीमारी है। ज्यादातर रोगियों में यह खांसी, जुकाम, खांसी के बाद नियंत्रित हो जाती है।

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Kanpur: RT PCR test of H3N2 will also be done along with Covid
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सीजनल इंफ्लुएंजा एच3एन1 को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सोमवार को गाइडलाइन जारी कर दी है। कोविड जांच के वास्ते लिए जा रहे सैंपल की अब एच3एन2 आरटीपीसीआर जांच भी कराई जाएगी। जांच जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग और उर्सला की पैथोलॉजी में होगी। गंभीर रोगियों के सैंपल जांच के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजे जाएंगे। 

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गाइडलाइन में संदिग्ध रोगियों की सैंपलिंग बढ़ाने और सांस के रोगियों की निगरानी करने के लिए कहा गया है। इंफ्लुएंजा की तरह की बीमारी (आईएलआई), सांस की तकलीफ (एसएआरआई) के रोगियों को चिह्नित करके उनकी सघन निगरानी के लिए कहा गया है। सीएचसी, ब्लॉक स्तर पर रोगियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। गाइडलाइन में कहा गया है कि यह मौसमी बीमारी है। ज्यादातर रोगियों में यह खांसी, जुकाम, खांसी के बाद नियंत्रित हो जाती है।

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हालांकि अस्थमा, मोटापा, वृद्धावस्था के रोग, सीओपीडी, गुर्दा रोग, डायबिटीज से पीड़ित पुराने रोगियों में गंभीर लक्षण हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को भी गंभीर लक्षण हो सकते हैं। इन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। बिना उचित सुरक्षा के छींकने, खांसने तथा बंद स्थानों पर बैठकों और समारोहों से संक्रमण का फैलाव हो सकता है। 

स्वास्थ्य विभाग को ये निर्देश भी दिए
- जनमानस में जागरुकता बढ़ाना, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का प्रयोग, बार-बार हाथों को धोना, खुले स्थानों पर थूकने से बचना, लक्षण वाले रोगियों की सूचना स्वास्थ्य केंद्रों को देना और आइसोलेशन के प्रति जागरूक करना।
- सर्विलांस बढ़ाना। सांस रोगियों की निगरानी के साथ सैंपल की संख्या बढ़ाना। 
- सीजनल इंफ्लुएंजा प्रशिक्षण जिले से लेकर पीएचसी स्तर तक दिया जाए। फ्रंट लाइन वर्कर्स, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के कर्मियों और एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं को रोग के लक्षणों, बचाव के उपायों, रोगियों के चिह्नीकरण के संबंध में प्रशिक्षित किया जाए।
- सीएमओ, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और प्रभारियों के स्तर से चिकित्सालयों, स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता, मेडिकल ऑक्सीजन, चिकित्सीय उपकरणों के संबंध में समीक्षा की जाए।
- चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। 
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