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Kanpur Rohingya infiltration: रोहिंग्या के साथ पनाहगारों पर है निशाना, स्लीपर सेल का काम कर सकते हैं नागरिक

Tue, 09 May 2023 09:50 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 09 May 2023 09:50 AM IST
सार

Kanpur News: बांग्लादेश से आने के बाद रोहिंग्या दो दिन तक कानपुर में ही रुके थे। ऐसे में एटीएस उनके पनाहगारों की तलाश में जुटी है। कई संदिग्ध एटीएस की राडार पर हैं और जल्द गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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Kanpur Rohingya infiltration, Shelters with Rohingyas are targeted, citizens can act as sleeper cells
रोहिंग्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के रास्ते जम्मू कश्मीर जाने से पहले रविवार को झकरकटी बस अड्डे पर पकड़े गए म्यानमार के रोहिंग्या नागरिक दो दिन तक कानपुर में रुके थे। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारी के बाद अब एटीएस सक्रिय हो गई और जांच में जुट गई है।

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एटीएस अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए इन विदेशी नागरिकों के पनाहगारों की तलाश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि एटीएस के राडार में शहर के आधा दर्जन लोग है जिनकी रोहिंग्या नागरिकों को शहर में ठिकाना मुहैया कराने में अहम भूमिका थी। जांच एजेंसी उन्हें चिह्नित कर साक्ष्य जुटा रही है।
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साथ ही उन ठिकानों की भी पुष्टि करने में जुटी है जहां वह खुद के रुकने की बात बता रहे हैं। चूंकि पकड़े गए नागरिकों को उन ठिकानों की सही लोकेशन नहीं पता है, ऐसे में एसटीएफ अब उन इलाकों में अपने मुखबिर तंत्र के जरिये पड़ताल में जुटी है। माना जा रहा है कि मामले में जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।

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रोहिंग्या के साथ मददगारों का नेटवर्क निशाना
जांच एजेंसी के निशाने पर रोहिंग्या नागरिकों से ज्यादा वह रूट और वह लोग हैं जिनकी बदौलत अवैध रूप से लोग देश में घुसपैठ कर रहे हैं। इस मामले में केंद्र की कई एजेंसियों के अधिकारी भी जुट गए हैं। आईबी और एनआईए भी उस रास्ते और नेटवर्क की परतें उधेड़ने में जुट गई है।

नेटवर्क का सहारा लेकर घुस सकते हैं
जो इन लोगों को बांग्लादेश से त्रिपुरा के रास्ते कानपुर तक लाया और यहां से कश्मीर ले जाने वाला था। क्योंकि इस बात का खतरा ज्यादा है कि इसी रूट और नेटवर्क का सहारा लेकर आतंकी देश में घुस सकते हैं। बता दें कि जांच एजेंसिया पूरे मामले में गंभीरता से कदम उठा रही हैं।

स्लीपर सेल का काम कर सकते हैं अवैध नागरिक
कहने को रोहिंग्या नागरिक अपने देश में सताए गए हैं। बचने के लिए पैसा खर्च कर अवैध रूप से भारत में पनाह लेने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन जांच एजेंसियों को इस बात का खतरा ज्यादा सता रहा है कि ये सभी स्लीपर सेल का काम न करने लगें।

नागरिकों को चिह्नित कर पकड़ने के प्रयास
जो नेटवर्क उन्हें मदद कर रहा है। वह कभी भी उनसे कोई आतंकी वारदात करा दे, तो सरकारी मशीनरी के पास ऐसे अवैध लोगों का ब्योरा ही नहीं होगा। यही वजह है कि हर अवैध नागरिक को चिह्नित कर पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

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