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Kanpur Raid: आयकर के साथ ही जीएसटी की भी चोरी, फाड़ देते थे लेन-देन का कागज, फॉरेंसिक टीम ने खोले अहम राज

Fri, 14 Feb 2025 06:06 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 14 Feb 2025 06:06 AM IST
सार

Kanpur News: पानमसाला के साथ ही समूह का रियल इस्टेट में बड़ा कारोबार दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में है। तमाम प्रोजेक्ट चल रहे हैं। समूह और सप्लायरों की कमाई इसमें लगाई जा रही थी। जांच में विभाग को तंबाकू, सुपाड़ी, सुगंध और ट्रांसपोर्टर का गहरा गठजोड़ मिला है।

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Kanpur Raid Along with Income Tax GST was also stolen they used to tear the transaction papers
कानपुर में आयकर का छापा - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में पांच साल बाद फिर से आयकर विभाग की जांच के दायरे में आए एसएनके ब्रांड पानमसाला समूह के यहां जांच में पता चला है कि आयकर के साथ ही जीएसटी की भी बड़े पैमाने पर चोरी की जा रही थी। लेन-देन कच्चे पर्चे पर हो रहा था और बाद में इन्हें फाड़ दिया जाता था। हालांकि सप्लायरों को अलग-अलग इनका ब्योरा छिपाकर रखने के निर्देश भी थे, ताकि कारोबार में कोई गड़बड़ी न मिले।

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दो दिन से चल रही जांच में पता चला है कि ई-वे बिलों का दुरुपयोग किया जा रहा था। एक ई-वे बिल का उपयोग चार-चार बार किया जा रहा था। समूह सालों से इस तरह से कारोबार कर रहा है। कई सौ करोड़ की जीएसटी चोरी के दस्तावेज मिलने का अनुमान है। 2018-19 में एसएनके ब्रांड लांच हुआ। शहर स्थित कंपनी पहले एजे सुगंधी नाम से संचालित थी।

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कानपुर में आयकर का छापा - फोटो : amar ujala

55 करोड़ से ज्यादा का हो चुका है टर्नओवर
11 जून 2021 को ग्रीन्सवर्थ इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई गई। इस कंपनी का टर्नओवर 2021-22 में 90 करोड़ से ज्यादा रहा। वर्ष 2022-23 में टर्नओवर 125 करोड़ से ज्यादा और 2023-24 में 115 करोड़ से ज्यादा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष (2024-25) में 55 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर हो चुका है। इसके अलावा समूह ने एक जुलाई 2023 को गोल्ड बॉल फूड स्लाइन प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई।

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कानपुर में आयकर का छापा - फोटो : amar ujala

जांच का दायरा और बढ़ गया है
यह तंबाकू का कारोबार करती है। 2023-24 में इस कंपनी ने 18 करोड़ के करीब कारोबार किया। इन कंपनियों का कारोबार तो एक नंबर में दिखाया जा रहा था, लेकिन जांच में इससे कहीं ज्यादा दो नंबर में कारोबार संचालित होता मिला है। एक सप्लायर ने साल भर का जितना टर्नओवर दिखाया, उससे कहीं ज्यादा मौके पर अफसरों को मिला है। इससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।

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कानपुर में आयकर का छापा - फोटो : amar ujala

एनसीआर और कानपुर में बड़े-बड़े प्रोजेक्टों में निवेश
पानमसाला के साथ ही समूह का रियल इस्टेट में बड़ा कारोबार दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में है। तमाम प्रोजेक्ट चल रहे हैं। समूह और सप्लायरों की कमाई इसमें लगाई जा रही थी। जांच में विभाग को तंबाकू, सुपाड़ी, सुगंध और ट्रांसपोर्टर का गहरा गठजोड़ मिला है। सूत्रों ने बताया कि कानपुर के बिठूर, स्वरूपनगर आदि में बनने वाले बड़े रियल इस्टेट प्रोजेक्टों में धन लगाया गया है। इसके अलावा दिल्ली, नोएडा में बन रहे बड़े मॉल, रिसॉर्ट को काली कमाई से खरीदा गया है, या फिर उनमें रुपये लगाए गए हैं।

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income tax raid - फोटो : amar ujala

फॉरेंसिक टीम ने खोले राज, आपसी बातचीत कर देते थे डिलीट
अफसरों ने दिल्ली से फॉरेंसिक विशेषज्ञों को मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटरों का डाटा क्लोन तैयार करने के लिए बुलाया था। दरअसल कारोबारियों, सप्लायरों और एजेंसी संचालकों के बीच जो भी बातचीत होती या लेन-देन का ब्योरा भेजा जाता था, उसे डिलीट कर दिया जाता था। जब विशेषज्ञों ने समूह के जुड़े लोगों से मिले मोबाइल फोनों से डाटा रिकवर करना शुरू किया तो कर चोरी का राज खुलता चला गया।

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income tax raid - फोटो : amar ujala

कर्मचारियों, नौकरों के नाम फिर बनाईं बोगस कंपनियां
समूह के यहां जांच में बोगस फर्मों और एलएलपी के जरिए अरबों के लेन-देन का खुलासा हुआ। पांच साल पहले जब आयकर विभाग ने छापा मारा था, तब 115 बोगस फर्मों के जरिए 80 करोड़ रुपये की खाद फर्जी तरीके से खरीदी गई। सूत्रों ने बताया कि अब तक की जांच में पता चला है कि बोगस कंपनियों की काली कमाई को सफेद करने के लिए अलग-अलग कंपनियों के जरिये लोन लेना दिखाया जा रहा था। डाटा एनालिसिस में पता चला कि ये फर्म और एलएलपी कानपुर, दिल्ली में बनाई गईं। बोगस फर्म के निदेशक के रूप में कंपनी कर्मचारियों और घरेलू नौकरों के नाम दर्ज हैं।

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Raid Demo - फोटो : अमर उजाला

पांच साल बाद फिर आयकर की कार्रवाई
सूत्रों ने बताया कि समूह पर बीते कुछ सालों में डीजीजीआई, सीजीएसटी, एसजीएसटी ने छापा मारा और बड़े पैमाने पर कर चोरी पकड़ी। ये ऐसा पहला समूह है, जिस पर आयकर विभाग ने पांच साल बाद ही कार्रवाई कर दी। शहर में अब तक इतनी कम अवधि में दूसरी बार कार्रवाई किसी अन्य कारोबारी या समूह पर नहीं की गई। सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान अन्य ब्रांड भी विभाग के रडार पर आ गए हैं। यहां से अन्य सप्लायरों की बड़ी चेन मिली है।

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