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कटे हाथ का 'सच': कॉलेज बोला- पुलिस ने जबरन साैंपा हाथ, DCP बोले- डॉक्टर ने सैंपल रिसीव किया, जांच पर छिड़ी जंग

Sun, 31 May 2026 09:31 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 31 May 2026 09:31 AM IST
सार

ITBP Jawan Mother Case: आईटीबीपी जवान की मां का कटा हाथ मेडिकल कॉलेज और पुलिस के बीच जांच के दायरे को लेकर विवादों में है। कॉलेज का कहना है कि उनके पास फॉरेंसिक सुविधा नहीं है, जबकि पुलिस ने प्रक्रिया का पालन करने का दावा किया है।

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Kanpur Police forcibly hand over severed arm of ITBP jawan mother DCP states doctor has received sample
आईटीबीपी जवान की मां का हाथ कटने का मामला - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान की मां के कटे हुए हाथ को लेकर विवाद गहरा गया है। पुलिस ने इस कटे हाथ को जांच के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को शनिवार को जबरन साैंप दिया। काॅलेज प्रशासन का कहना है कि उन्होंने मना किया कि उनके यहां फाॅरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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सिर्फ हिस्टोपैथोलॉजी जांच होती है। इसके बावजूद पुलिस कर्मी जबरदस्ती जांच के लिए कटा हाथ दे गए। फतेहपुर के खागा निवासी आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने अपनी मां निर्मला देवी को सांस लेने में तकलीफ होने पर 13 मई को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया था। विकास का आरोप है कि गलत तरीके से वीगो लगाने और इलाज में लापरवाही के कारण मां का एक हाथ सूज गया।

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रेलबाजार पुलिस ने हाथ कब्जे में लिया
हालत में सुधार न होने पर मां को पारस अस्पताल में शिफ्ट किया गया।  वहां डॉक्टरों ने 17 मई को उनका एक हाथ काट दिया। जवान ने 19 मई को बर्फ के डिब्बे में मां का हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई थी। मामला बढ़ने पर रेलबाजार पुलिस ने हाथ कब्जे में लिया। पुलिस ने उसे फॉर्मेलिन में रखा था। 30 मई को पुलिस ने यह कटा हाथ मेडिकल कॉलेज को जांच के लिए दिया।

जांच में 10-15 दिन लगेंगे
मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डाॅ. रिचा गिरी ने बताया कि पुलिस ने जवान की मां का कटा हाथ जांच के लिए दिया है। पैथोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. लुबना खान ने बताया कि कॉलेज में फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने हाथ जमा कराया है। यहां हिस्टोपैथोलॉजी जांच होगी। यदि हाथ के ऊतक में कुछ दिखेगा, तो उसका पता लगेगा। हाथ कटने के बाद तुरंत प्रिजर्व किया जाना चाहिए था। जांच में 10-15 दिन लगेंगे।

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सीएमओ उन पर जबरदस्ती जांच थोप रहे हैं
वहीं, मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी ने बताया कि सीएमओ उन पर जबरदस्ती जांच थोप रहे हैं। उन्होंने लिखित में दिया है कि उनके यहां फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच नहीं होती है। नियम के अनुसार फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी जांच होनी चाहिए। इसकी जांच लखनऊ में होनी चाहिए।

उनके यहां सामान्य हिस्टोपैथोलॉजी होती है। फाॅरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी अलग होती है। वह अभी बाहर हैं। एक जून को लौटने पर हाथ की जांच की जाएगी। इसके बाद हाथ की पैकिंग की सही स्थिति देखी जाएगी। उसके उपरांत ही जांच का निर्णय लिया जाएगा।  -डाॅ. संजय काला, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

रेल बाजार थाना प्रभारी को हिस्टोपैथोलॉजी कराने संबंधी नियम बता दिए गए हैं। जांच के लिए मेडिकल कॉलेज में भी भेज दिया गया है।  -डाॅ. हरी दत्त नेमी, सीएमओ

एफएसएल लैब में हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण की सुविधा नहीं है। सीएमओ और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अधिकारियाें से वार्ता के बाद राय मशविरा कर कटा हाथ जांच के लिए दिया गया है। वह इसका उचित परीक्षण करा कर रिपोर्ट देंगे। जबरन हाथ सौंपने जैसी कोई बात नहीं है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने सैंपल रिसीव किया है।  -सत्यजीत गुप्ता, डीसीपी पूर्वी

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