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पुलिस ने दिलाई 30 लाख फिरौती ...नहीं बची जान, आईपीएस समेत 10 निलंबित

Sat, 25 Jul 2020 04:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 25 Jul 2020 04:31 AM IST
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kanpur police and sanjit yadav murder case
आक्रोशित लोग... - फोटो : अमर उजाला
पुलिस की फिर आपराधिक लापरवाही उजागर हुई है। अपहृत लैब टेक्नीशियन संजीत यादव को छुड़ाने के लिए पुलिस ने अपहर्ताओं को 30 लाख रुपये तक दिलवा दिए, लेकिन उसे बचा नहीं सकी। अपहरण के 32 दिनों बाद संजीत की लाश पांडु नदी में बरामद हुई है। फिरौती के लिए संजीत के दोस्तों ने ही उसका अपहरण किया था। कुलदीप, रामबाबू समेत चार दोस्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सरकार ने किरकिरी से बचने के लिए, आईपीएस अपर्णा गुप्ता, तत्कालीन डिप्टी एसपी मनोज गुप्ता, पूर्व प्रभारी निरीक्षक रणजीत राय, चौकी इंचार्ज राजेश कुमार समेत 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
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कानपुर के बर्रा से 22 जून को संजीत लापता हुआ था। घरवालों ने पुलिस को सूचना दे दी थी लेकिन पुलिस लापरवाह बनी रही। संजीत के साथ ही सैंपल कलेक्शन का काम करने वाले  कुलदीप ने पूछताछ में बताया कि शराब पिलाने के बहाने वह रतलाम नगर में अपने किराये के कमरे पर संजीत को ले गया और बंधक बना लिया। 
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उसके बाद परिजनों से फिरौती मांगनी शुरू की। फिरौती नहीं मिली तो फंसने के डर से 26 जून को ही संजीत की हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इधर फिरौती के लिए परिजनों को फोन भी करता रहा। पुलिस ने प्लान के तहत परिजनों से 13 जुलाई को 30 लाख रुपये उनके बताए स्थान पर पहुंचाने के लिए कहा लेकिन शातिरों ने पुलिस को चकमा देकर पैसे उठाए और फरार हो गए।
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चार दिनों तक देते रहे बेहोशी का इंजेक्शन
बदमाश कुलदीप ने बताया कि चार दिन तक बेहोशी के इंजेक्शन देकर संजीत को बंधक बनाए रखा। 26 जून को हत्या करने के बाद शव अपनी कार में रखकर पांडु नदी में फेंक आया।

 

गाजियाबाद में तलाशते रहे

पुलिस ने अपहर्ताओं की तलाश में गाजियाबाद और बिंदकी टीम भेजी। इधर कुलदीप और साथी कार में इधर-उधर घूमते रहे। बृहस्पतिवार को पुलिस ने सर्विलांस के जरिए शक के आधार पर कुलदीप और रामबाबू समेत चार को गिरफ्तार किया तो मामले का खुलासा हुआ।

मकान, जेवर बेचकर जुटाए थे 30 लाख
परिजनों ने पुलिस के कहने पर मकान, जेवर बादि बेचकर जैसे तैसे 30 लाख रुपयों की व्यवस्था की और 13 जुलाई को पुलिस के कहने पर अपहर्ताओं को सौंप दिए। संजीत की हत्या की खबर के बाद से ही घर में कोहराम मचा हुआ है।

सारा दिन टालती रही पुलिस
परिजनों ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह वे थाने पहुंचे तो पुलिस ने चार घंटे बाद आने को कहा। चार घंटे बाद फिर थाने पहुंचे तो जल्द खुलासे की बात कहकर लौटा दिया। इसके बाद परिजन हर घंटे फोन कर पूछते रहे रहे, लेकिन पुलिस कोई स्पष्ट जवाब न दे सकी। रात करीब 10 बजे एसएसपी ने परिजनों को खुद फोन कर एक-दो दिन का समय और मांगा।

यूपी में जंगलराज : प्रियंका
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। आम लोगों की जान लेकर अब इसकी मुनादी की जा रही है। घर हो, सड़क हो, ऑफिस हो कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता। विक्रम जोशी के बाद अब कानपुर में अपहृत संजीत यादव की हत्या। पुलिस ने किडनैपर्स को पैसे भी दिलवाए और उनकी हत्या कर दी गई। यह नए तरह का जंगलराज है। 

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