फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur: PICU in ursula for 10 years, never run, did not even mention CM from three days ago

कानपुर: उर्सला में 10 साल से पीआईसीयू, चला कभी नहीं, तीन दिन पहले आए मुख्यमंत्री से जिक्र तक नहीं किया

Wed, 26 May 2021 08:37 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Wed, 26 May 2021 08:37 AM IST
सार

तीन दिन पहले कानपुर दौरे पर आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक ओर कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के इंतजामों को दुरुस्त रखने के लिए अधिकारियों से बोला पर अधिकारियों ने कानपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का मजाक बनाकर रख दिया है। पढ़िए ये रिपोर्ट...

विज्ञापन
Kanpur: PICU in ursula for 10 years, never run, did not even mention CM from three days ago
उर्सला अस्पताल कानपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के मंडलीय अस्पताल उर्सला में बाल रोगियों के लिए 10 साल से बनकर तैयार पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) पर महामारी के दौर में भी ताला पड़ा रहा। जबकि, इसके संचालन के लिए पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भी है। दरकार है तो बस एक एनेस्थेटिस्ट की।
विज्ञापन


यह अंधेर उन जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर सवाल उठाती है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए बैठक-बैठक खेल रहे हैं। यही नहीं, 22 मई को कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों की थाह लेने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अफसरों और नेताओं ने सब्जबाग तो खूब दिखाए पर उर्सला के पीआईसीयू का जिक्र तक नहीं किया। 
विज्ञापन


 

कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर बच्चों के इंटेंसिव केयर पर पूरा जोर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नए पीआईसीयू बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उर्सला में संसाधन होते हुए भी बाल रोगियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। उर्सला में पांच बालरोग विशेषज्ञ भी हैं। ओपीडी में हल्की-फुल्की बीमारियों के जो रोगी देखे जाते हैं, उन्हें पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कर लिया जाता है।

वेंटिलेटर कंडम होने की स्थिति में
वैसे उर्सला में इलाज कराने आने वाले बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं है कि यहां बच्चों का वार्ड भी है। इससे यहां ओपीडी की संख्या कम रहती है। उर्सला की नई बिल्डिंग के दो तलों पर 12-12 बेड के दो वार्ड हैं। बच्चों का वार्ड वर्ष-2011 में बना था। उसी दौरान बच्चों का छह बेड का आईसीयू बनाया गया था। दो बेड वेंटिलेटर युक्त थे, लेकिन 10 साल से ऑन ही नहीं किए गए। अब ये कंडम होने की स्थिति में हैं। डॉक्टरों ने सिरदर्द बचाने के चक्कर में कभी दिलचस्पी नहीं ली। 

अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट है। इसमें दो वेंटिलेटर भी हैं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी की वजह से चलती नहीं। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट के पांच पद हैं, लेकिन एक ही है। सभी पद भर जाएं तो बच्चों का आईसीयू चल सकता है। 
डॉ. अनिल निगम, सीएमएस, उर्सला

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed