कानपुर: उर्सला में 10 साल से पीआईसीयू, चला कभी नहीं, तीन दिन पहले आए मुख्यमंत्री से जिक्र तक नहीं किया
तीन दिन पहले कानपुर दौरे पर आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक ओर कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के इंतजामों को दुरुस्त रखने के लिए अधिकारियों से बोला पर अधिकारियों ने कानपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का मजाक बनाकर रख दिया है। पढ़िए ये रिपोर्ट...
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यह अंधेर उन जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर सवाल उठाती है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए बैठक-बैठक खेल रहे हैं। यही नहीं, 22 मई को कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों की थाह लेने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अफसरों और नेताओं ने सब्जबाग तो खूब दिखाए पर उर्सला के पीआईसीयू का जिक्र तक नहीं किया।
वेंटिलेटर कंडम होने की स्थिति में
वैसे उर्सला में इलाज कराने आने वाले बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं है कि यहां बच्चों का वार्ड भी है। इससे यहां ओपीडी की संख्या कम रहती है। उर्सला की नई बिल्डिंग के दो तलों पर 12-12 बेड के दो वार्ड हैं। बच्चों का वार्ड वर्ष-2011 में बना था। उसी दौरान बच्चों का छह बेड का आईसीयू बनाया गया था। दो बेड वेंटिलेटर युक्त थे, लेकिन 10 साल से ऑन ही नहीं किए गए। अब ये कंडम होने की स्थिति में हैं। डॉक्टरों ने सिरदर्द बचाने के चक्कर में कभी दिलचस्पी नहीं ली।
अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट है। इसमें दो वेंटिलेटर भी हैं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी की वजह से चलती नहीं। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट के पांच पद हैं, लेकिन एक ही है। सभी पद भर जाएं तो बच्चों का आईसीयू चल सकता है।
डॉ. अनिल निगम, सीएमएस, उर्सला