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Kanpur: ट्रांसपोर्टर से 1.27 करोड़ की ठगी में एक गिरफ्तार, नाइजीरिया के शातिर भी शामिल
Thu, 21 May 2026 11:52 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 21 May 2026 11:52 PM IST
सार
साइबर क्राइम ब्रांच ने गिरोह में शामिल एक आरोपी मेराज को महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर शहर ला रही है। दो आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
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साइबर ठगी का आरोपी मेराज अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर के ट्रांसपोर्टर मोहकम सिंह के साथ पिछले वर्ष हुई 1.27 करोड़ की ठगी में साइबर क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र के पालघर के विरार क्षेत्र से एक और आरोपी मेराज अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है। कमिश्ररी पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कानपुर आ रही है। उसने बताया कि इसमें नाइजीरिया के शातिर भी शामिल हैं। साइबर क्राइम ब्रांच इस मामले में पहले ही दो आरोपियों को जेल भेज चुकी है। नाइजीरिया के शातिरों की तलाश जारी है।
डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह के मुताबिक, साइबर क्राइम ब्रांच थाने में 23 अगस्त को मोहकम सिंह ने साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उनके पास लिंक आया था जिसपर क्लिक करते ही एपीके फाइल डाउनलोड हो गई। मोबाइल हैक हो गया और खाते से 1.27 करोड़ रुपये निकल गए। करीब दो माह के अंदर नालासोपारा के अमर तिवारी और मेरठ के अरशद अंसारी को गिरफ्तार किया। रुपये अमर तिवारी के खाते में गए थे जबकि उस खाते में फोटो अरशद अंसारी की लगी थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। जांच में मेराज अंसारी का नाम सामने आया।
उसकी तलाश में टीम ने पालघर के विरार क्षेत्र में दबिश दी लेकिन आरोपी भाग निकला। मई की शुरुआत में उनकी लोकेशन फिर से मिली जिस पर टीम वहां के लिए रवाना हुई। साइबर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सतीश चंद्र यादव व उनकी टीम ने मेराज अंसारी को गिरफ्तार किया। मेराज वहां भेष बदलकर रह रहा था। उसने चेहरे पर नकली दाढ़ी व सिर पर पगड़ी रखी हुई थी। स्कूटी से जाते हुए टीम ने गिरफ्तार कर वहां की कोर्ट में पेश किया वहां से टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर शहर ला रही है।
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डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह के मुताबिक, साइबर क्राइम ब्रांच थाने में 23 अगस्त को मोहकम सिंह ने साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उनके पास लिंक आया था जिसपर क्लिक करते ही एपीके फाइल डाउनलोड हो गई। मोबाइल हैक हो गया और खाते से 1.27 करोड़ रुपये निकल गए। करीब दो माह के अंदर नालासोपारा के अमर तिवारी और मेरठ के अरशद अंसारी को गिरफ्तार किया। रुपये अमर तिवारी के खाते में गए थे जबकि उस खाते में फोटो अरशद अंसारी की लगी थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। जांच में मेराज अंसारी का नाम सामने आया।
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उसकी तलाश में टीम ने पालघर के विरार क्षेत्र में दबिश दी लेकिन आरोपी भाग निकला। मई की शुरुआत में उनकी लोकेशन फिर से मिली जिस पर टीम वहां के लिए रवाना हुई। साइबर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सतीश चंद्र यादव व उनकी टीम ने मेराज अंसारी को गिरफ्तार किया। मेराज वहां भेष बदलकर रह रहा था। उसने चेहरे पर नकली दाढ़ी व सिर पर पगड़ी रखी हुई थी। स्कूटी से जाते हुए टीम ने गिरफ्तार कर वहां की कोर्ट में पेश किया वहां से टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर शहर ला रही है।
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म्यूल खाते खुलवाकर ट्रांसफर कराते थे रकम
साइबर क्राइम ब्रांच प्रभारी सतीश यादव के मुताबिक मेराज मास्टरमाइंड था। उसका काम फर्जी दस्तावेजों के जरिये म्यूल खाते और सिम खुलवाना था। उसी में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। मेराज ने मोहकम सिंह का नकली सिम लेकर नाइजीरिया के शातिरों को दिया था। नाइजीरिया के शातिरों ने ही रकम ट्रांसफर कराई।
साइबर क्राइम ब्रांच प्रभारी सतीश यादव के मुताबिक मेराज मास्टरमाइंड था। उसका काम फर्जी दस्तावेजों के जरिये म्यूल खाते और सिम खुलवाना था। उसी में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। मेराज ने मोहकम सिंह का नकली सिम लेकर नाइजीरिया के शातिरों को दिया था। नाइजीरिया के शातिरों ने ही रकम ट्रांसफर कराई।
एमएमटीसी पैंप के स्टोर से हुई पहचान
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि अरशद और मेराज अंसारी ने ठगी की रकम से नोएडा स्थित एमएमटीसी पैंप के स्टोर से 54 लाख का सोना खरीदा था। इसमें 15 तोला सोना अरशद अंसारी को मिला जबकि बाकी सोना चंदू नाम का युवक मुंबई ले गया। साइबर क्राइम ब्रांच 72 लाख पहले ही फ्रीज करा चुकी है। 54 लाख रुपये भी कोर्ट के आदेश पर ट्रांसपोर्टर को मिल गए हैं। साइबर क्राइम ब्रांच को एमएमटीसी के स्टोर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में आरोपियों की फुटेज दिखाई दी। उससे शिनाख्त नहीं हो रही थी। इस कार्य में नेशनल साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर का सहयोग लिया गया। मेराज की फोटो सेंटर के एप से पहचान में आ गई।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि अरशद और मेराज अंसारी ने ठगी की रकम से नोएडा स्थित एमएमटीसी पैंप के स्टोर से 54 लाख का सोना खरीदा था। इसमें 15 तोला सोना अरशद अंसारी को मिला जबकि बाकी सोना चंदू नाम का युवक मुंबई ले गया। साइबर क्राइम ब्रांच 72 लाख पहले ही फ्रीज करा चुकी है। 54 लाख रुपये भी कोर्ट के आदेश पर ट्रांसपोर्टर को मिल गए हैं। साइबर क्राइम ब्रांच को एमएमटीसी के स्टोर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में आरोपियों की फुटेज दिखाई दी। उससे शिनाख्त नहीं हो रही थी। इस कार्य में नेशनल साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर का सहयोग लिया गया। मेराज की फोटो सेंटर के एप से पहचान में आ गई।