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Kanpur: पेट के कीड़े खा ले रहे गर्भवतियों के पोषक तत्व, एक हजार गर्भवती महिलाओं में 70 फीसदी कुपोषित

Wed, 22 Feb 2023 10:38 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 22 Feb 2023 10:38 AM IST
सार

डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि दो शोध पांच-पांच सौ गर्भवती महिलाओं पर किए गए। उनकी सारी जांचें की गईं। 40 फीसदी महिलाओं के पेट में कीड़े मिले हैं। साथ ही शुद्ध जल न पीने की वजह से उनका पेट बार-बार खराब होता रहा है। डायरिया और लूज मोशन की वजह से शरीर के पोषक तत्व घट जाते हैं। इसके साथ कुपोषित गर्भवतियों के प्रसव में जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

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Kanpur: Nutrients of pregnant women eating stomach worms
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल में आ रहीं गर्भवतियों में 70 फीसदी कुपोषित हैं। ऐसा नहीं है कि वे कुछ खा नहीं रही हैं। वे पेट भर खाना ले रही हैं लेकिन खानपान में गड़बड़ी होने की वजह से पूरी कैलोरी नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा वे जो कुछ पोषक तत्व लेती भी हैं, पेट के कीड़े उन्हें चट कर जाते हैं। इससे कुपोषण हो रहा है।

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साथ ही प्रदूषित जल पीने से पेट खराब होता है। इससे कुपोषण बना रहता है। कॉलेज के स्त्री रोग विभाग ने गर्भवतियों के कुपोषण के संबंध में पिछले साल के अंत में दो अलग-अलग शोध किए थे। इनका परिणाम चौंकाने वाला आया है। कुपोषण होने की वजह से गर्भवतियों और गर्भस्थ शिशु में कई तरह के विकार पैदा हो जाते हैं। कुपोषण गर्भपात, प्रि-टर्म डिलेवरी का भी कारण बन रहा है। कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर और शोध प्रोजेक्ट की अगुवा डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि दो शोध पांच-पांच सौ गर्भवती महिलाओं पर किए गए।

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उनकी सारी जांचें की गईं। 40 फीसदी महिलाओं के पेट में कीड़े मिले हैं। साथ ही शुद्ध जल न पीने की वजह से उनका पेट बार-बार खराब होता रहा है। डायरिया और लूज मोशन की वजह से शरीर के पोषक तत्व घट जाते हैं। इसके साथ कुपोषित गर्भवतियों के प्रसव में जटिलताएं बढ़ जाती हैं। उनके शिशुओं को दिक्कत हो जाती है। गर्भवतियों के रजिस्ट्रेशन कराने के बाद उनका परीक्षण किया गया। कुपोषण दूर करने के लिए उनसे डाइट चार्ट का पालन कराया जाता है। महिलाएं जंक  फूड पेट भर खा लेती हैं और समझती हैं कि उन्हें पोषण मिल गया। इसमें बहुत से तत्व ऐसे भी होते हैं जो दिक्कत पैदा करते हैं।

कुपोषण का कारण
जानकारी न होना, डाइट और कैलोरी की महत्ता न जानना, फास्ट फूड, पेट के कीड़े और प्रदूषित जल।

समस्या
गर्भपात होना, कनाई की क्वालिटी खराब होना, अधिक रक्तस्राव, गर्भस्थ शिशु का विकास बाधित होना, एनीमिया, बच्चे का समय से पैदा न होना, आनुवांशिक बीमारियां बढ़ना, डिलेवरी अटकना, बच्चेदानी का काम न करना, प्रसव के बाद दिक्कतें आदि।

बचाव 
भरपूर प्रोटीन लें, देसी भोजन पर जोर दें, मोटे अनाज का सेवन करें, गुड़, मूंगफली, चना, तिल आदि खाएं, फास्ट फूड से परहेज करें। मैदा का इस्तेमाल न करें।
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