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कानपुर: बिना पंजीकरण कोई चिकित्सक नहीं चला सकता क्लीनिक, जानिए क्या है पूरा मामला
Tue, 21 Sep 2021 01:47 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
आशीष अग्रवाल (संवाद), अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल (संवाद), अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Sep 2021 01:47 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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कानपुर जिला पंजीकरण प्राधिकारी के कार्यालय में पंजीकरण के बगैर किसी को क्लीनिक चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस टिप्पणी के साथ अपर जिला जज-26 प्रमोद कुमार ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल रिवीजन याचिका खारिज कर दी।
इसमें सीएमओ द्वारा सीज कराए गए क्लीनिक की चाबी देने की मांग की गई थी। कोरोना काल में तत्कालीन सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने नौ नवंबर 2020 को जूही स्थित गौतम मार्केट में संचालित सिंह क्लीनिक पर छापा मारा था।
क्लीनिक के बाहर डॉ. अर्पित सिंह (बीएचएमएस) और अंदर डॉ. अर्पित सिंह स्किन एंड हेयर ट्रीटमेंट का बोर्ड लगा था। इस दौरान अर्पित मरीज भी देख रहे थे, लेकिन वह क्लीनिक के पंजीकरण का प्रमाणपत्र और अपनी डिग्री नहीं दिखा सके थे।
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इसमें सीएमओ द्वारा सीज कराए गए क्लीनिक की चाबी देने की मांग की गई थी। कोरोना काल में तत्कालीन सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने नौ नवंबर 2020 को जूही स्थित गौतम मार्केट में संचालित सिंह क्लीनिक पर छापा मारा था।
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क्लीनिक के बाहर डॉ. अर्पित सिंह (बीएचएमएस) और अंदर डॉ. अर्पित सिंह स्किन एंड हेयर ट्रीटमेंट का बोर्ड लगा था। इस दौरान अर्पित मरीज भी देख रहे थे, लेकिन वह क्लीनिक के पंजीकरण का प्रमाणपत्र और अपनी डिग्री नहीं दिखा सके थे।
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इस पर अर्पित पर धोखाधड़ी, इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट और महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराते हुए क्लीनिक पर ताला लगाकर चाबी किदवईनगर थाने में सौंप दी गई थी। मामले में अर्पित को तो जमानत मिल गई थी, पर क्लीनिक बंद है।
काम न आईं दलीलें
एडीजीसी भास्कर मिश्रा और सुशील कुमार पांडे ने बताया कि अर्पित ने क्लीनिक चाबी के लिए मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दी, जो खारिज हो गई थी। इस आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल कर अर्पित ने मकान मालिक और किरायेदार के बीच का विवाद बताकर रंजिशन शिकायत का आरोप लगाया था।
हाईकोर्ट ने विधि व्यवस्था दी है कि कोई व्यक्ति बगैर पंजीकरण हॉस्पिटल या अन्य चिकित्सकीय गतिविधि संचालित नहीं कर सकता। इस आधार पर कोर्ट ने रिवीजन याचिका भी खारिज कर दी।
काम न आईं दलीलें
एडीजीसी भास्कर मिश्रा और सुशील कुमार पांडे ने बताया कि अर्पित ने क्लीनिक चाबी के लिए मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दी, जो खारिज हो गई थी। इस आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल कर अर्पित ने मकान मालिक और किरायेदार के बीच का विवाद बताकर रंजिशन शिकायत का आरोप लगाया था।
हाईकोर्ट ने विधि व्यवस्था दी है कि कोई व्यक्ति बगैर पंजीकरण हॉस्पिटल या अन्य चिकित्सकीय गतिविधि संचालित नहीं कर सकता। इस आधार पर कोर्ट ने रिवीजन याचिका भी खारिज कर दी।