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कानपुर: 65 लाख की साइबर ठगी में नाइजीरियन गिरोह पर शक, क्राइम ब्रांच कर रही जांच
Sun, 19 Sep 2021 11:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 19 Sep 2021 11:38 PM IST
सार
ढाई करोड़ और 65 करोड़ की ठगी की वारदात में एक बात कॉमन है। दोनों मामलों में ठगों को पता था कि कंपनी के किस अधिकारी के ईमेल के जरिये बैंक के किस अफसर को संपर्क करना है। जिससे रकम मिल सकती है। यानी कहीं न कहीं से खाताधारक और बैंक की गोपनीय जानकारी लीक हो रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
65 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में भी नाइजीरियन ठगों के हाथ होने का शक है। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम इसी बिंदु पर पड़ताल कर रही है। फिलहाल जिन-जिन खातों में रकम भेजी गई थी उन खातों को पुलिस ने फ्रीज करवा दिया है।
उनमें कुल कितनी रकम बची है इसका आंकलन नहीं हो सका है। स्वरूपनगर थाने में दर्ज अन्य मामले में बरेली में गिरफ्तार नाइजीरियन गिरोह के तार इस ठगी से भी जोड़कर तफ्तीश की जा रही है। विशाल ऑटो मूर्वस प्रालि के डायरेक्टर दौलत सिंह भदौरिया हैं।
9 सितंबर को साइबर ठग ने दौलत सिंह भदौरिया बनकर यूनियन बैंक के मैनेजर से फोन पर बात कर अलग-अलग खातों में 65 लाख 80 हजार 132 रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। स्वरूपनगर पुलिस ने ठगी की एफआईआर दर्ज की थी।
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क्राइम ब्रांच की टीम पड़ताल में लगी है। सूत्रों के मुताबिक ढाई करोड़ की ठगी में जिस नाइजीरियन गिरोह का नाम सामने आया है उसी पर शक है कि इस ठगी को भी इसी गिरोह ने अंजाम दिया है।
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उनमें कुल कितनी रकम बची है इसका आंकलन नहीं हो सका है। स्वरूपनगर थाने में दर्ज अन्य मामले में बरेली में गिरफ्तार नाइजीरियन गिरोह के तार इस ठगी से भी जोड़कर तफ्तीश की जा रही है। विशाल ऑटो मूर्वस प्रालि के डायरेक्टर दौलत सिंह भदौरिया हैं।
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9 सितंबर को साइबर ठग ने दौलत सिंह भदौरिया बनकर यूनियन बैंक के मैनेजर से फोन पर बात कर अलग-अलग खातों में 65 लाख 80 हजार 132 रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। स्वरूपनगर पुलिस ने ठगी की एफआईआर दर्ज की थी।
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क्राइम ब्रांच की टीम पड़ताल में लगी है। सूत्रों के मुताबिक ढाई करोड़ की ठगी में जिस नाइजीरियन गिरोह का नाम सामने आया है उसी पर शक है कि इस ठगी को भी इसी गिरोह ने अंजाम दिया है।
एसीपी स्वरूपनगर वृजनारायण सिंह ने बताया कि बरेली पुलिस से संपर्क कर नाइजीरियन ठगों के बारे में जानकारी ली गई है। जिन खातों में रकम जमा की गई हैं उसमें किसकी आईडी लगी है और मोबाइल नंबर किस आईडी पर है उसको ट्रेस किया जा रहा है।
आखिर कैसे ठगों तक पहुंच रही गोपनीय जानकारी
ढाई करोड़ और 65 करोड़ की ठगी की वारदात में एक बात कॉमन है। दोनों मामलों में ठगों को पता था कि कंपनी के किस अधिकारी के ईमेल के जरिये बैंक के किस अफसर को संपर्क करना है। जिससे रकम मिल सकती है। यानी कहीं न कहीं से खाताधारक और बैंक की गोपनीय जानकारी लीक हो रही है। पुलिस व क्राइम ब्रांच अब तक ये पता नहीं कर सकी है।
आखिर कैसे ठगों तक पहुंच रही गोपनीय जानकारी
ढाई करोड़ और 65 करोड़ की ठगी की वारदात में एक बात कॉमन है। दोनों मामलों में ठगों को पता था कि कंपनी के किस अधिकारी के ईमेल के जरिये बैंक के किस अफसर को संपर्क करना है। जिससे रकम मिल सकती है। यानी कहीं न कहीं से खाताधारक और बैंक की गोपनीय जानकारी लीक हो रही है। पुलिस व क्राइम ब्रांच अब तक ये पता नहीं कर सकी है।