कानपुर: ‘साइबर ठगों और वकीलों का गठजोड़’, सिंडीकेट में 10-12 अधिवक्ता भी शामिल, एक्सपर्ट की टीम करेगी बेनकाब
Kanpur News: कानपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा अरबों रुपए के साइबर अपराधों का खुलासा करने के बाद अब साइबर ठगों के सिंडीकेट में शामिल अधिवक्ताओं और बैंक कर्मियों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
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कानपुर में साइबर ठगों के साथ पुलिस की नजर उनके सिंडीकेट में शामिल अधिवक्ताओं पर भी है। अरबों की साइबर ठगी करने वालों के सिंडीकेट में सिर्फ कानपुर के ही नहीं बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकता, बिहार व चेन्नई तक के अधिवक्ता शामिल हैं। फिलहाल पुलिस शहर में पकड़े गए और वांछित साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़े अधिवक्ताओं का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए साइबर एक्सपर्ट की एक टीम लगाई गई है, जो कि ऐसे भ्रष्ट अधिवक्ताओं को बेनकाब करेगी।
करीब 10-12 छोटे और बड़े अधिवक्ता पुलिस की रडार पर हैं। बता दें बीते तीन-चार माह में पुलिस ने चार अरब से अधिक के साइबर अपराध का खुलासा कर 30-40 लोगों को जेल भेजा है। इसमें अभी तक सबसे बड़ा गिरोह बिहार के सुल्तान मिर्जा उर्फ अभय का सामने आया है। इसके गिरोह ने करीब 3200 करोड़ की साइबर ठगी की है। हालांकि, सुल्तान अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है।
ठगी की रकम का अवैध लेनदेन कराते थे
उसके पकड़े जाने पर ठगी की रकम और बढ़ सकती है। पुलिस अब तक गिरोह में शामिल पांच-छह लोगों को जेल भेज चुकी है। इनमें तीन बैंक कर्मी भी शामिल थे जो ठगों के इशारे पर बैंकों में फर्जी खाते खुलवाकर उनमें साइबर ठगी की रकम का अवैध लेनदेन कराते थे। पुलिस का मानना है कि बैंक कर्मियों की तरह कुछ अधिवक्ता भी सुल्तान समेत कई बड़े साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़े हैं।
म्यूल अकाउंट खुलवाने में भूमिका निभाई है
ऐसे अधिवक्ता न सिर्फ ठगों के शिकार लोगों को कानून का भय दिखाकर उनसे मोटी रकम निकलवाने का काम करते हैं बल्कि ठगों को भी पुलिस के दांवपेंच से बचने के तरीके बताते हैं। इसके अलावा साइबर ठगों के लिए अग्रिम जमानत की फाइलें भी तैयार कराते हैं। पुलिस का कहना है कि पकड़े गए साइबर ठगों के सिंडीकेट में कानपुर के भी कुछ अधिवक्ता शामिल हैं, जिन्होंने डिजिटल अरेस्ट और भोले-भाले लोगों के म्यूल अकाउंट खुलवाने में भूमिका निभाई है।
सुल्तान भी अग्रिम जमानत की फिराक में
पुलिस ने बताया कि शातिर सुल्तान मिर्जा भी पकड़े जाने से पहले अग्रिम जमानत की फिराक में है। इसके लिए बड़े शहरों के कुछ बड़े अधिवक्ता उसके संपर्क में बताए जा रहे हैं। उनका पता लगाना आसान नहीं तो नामुमकिन भी नहीं है। सिर्फ बैंक कर्मी और अधिवक्ता ही नहीं कुछ पुलिसकर्मी भी साइबर ठगों के सिंडीकेट का हिस्सा हैं। हाल ही में बर्रा थाने में साइबर ठगों के खिलाफ दर्ज हुए मामले में दो पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं। उन पर जल्द कार्रवाई होगी।
साइबर ठग और वकीलों के गठजोड़ के मुख्य तरीके
- फर्जी कानूनी नोटिस या डर: ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या जज बताकर लोगों को डराते हैं और मामले को रफादफा करने के लिए अपने साथ जुड़े वकीलों से बात करवाते हैं।
- खातों का इस्तेमाल : ठगी की अवैध रकम को छिपाने के लिए साइबर ठग वकीलों के पेशेवर या क्लाइंट अकाउंट्स का इस्तेमाल भी करते हैं।
- डिजिटल अरेस्ट सेटलमेंट: डिजिटल अरेस्ट के मामलों में पीड़ितों पर दबाव बनाने के लिए नकली कानूनी समझौते या जमानत के कागज तैयार किए जाते हैं।
बचाव और कानूनी कदम
- यदि किसी के साथ कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
- किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर कानूनी सलाह के लिए संदिग्ध या बिना सत्यापन वाले वकीलों के झांसे में न आएं।
बैंकर्स और पुलिसकर्मियों की तरह शहर के करीब एक दर्जन अधिवक्ताओं के भी साइबर ठगों के सिंडीकेट में शामिल होने का इनपुट मिला है। ये लोग म्यूल खाते खुलवाने, डिजिटल अरेस्ट पीड़ित को कानूनी धमकी देने और ठगों की पैरवी जैसे काम करते हैं। इस पर साइबर एक्सपर्ट की टीम लगी है। उनके व उनके कुछ क्लाइंट्स के भी बैंक एकाउंट देखे जा रहे हैं। जल्द ही नाम भी सामने लाए जाएंगे। -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर