फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur Literature Festival at GHSIMR, literature, film, music

कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल: साहित्य, संगीत का दिखा संगम, बीड़ी जलई ले...नमक इश्क का की जुगलबंदी ने भरा रोमांच

Mon, 26 Dec 2022 12:28 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 26 Dec 2022 12:28 AM IST
विज्ञापन
Kanpur Literature Festival at GHSIMR, literature, film, music
कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला
मशहूर निर्देशक विशाल भारद्वाज और उनकी पत्नी रेखा भारद्वाज का रविवार को कानपुर में जादू चला। विशाल ने बीड़ी जलई ले... तो उनकी पत्नी ने नमक इश्क का जैसे गाने सुनाए तो सर्द माहौल में गर्माहट घुल गई। एक के बाद एक गाने सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। मौका था कमलानगर स्थित गौरहरि सिंहानिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंटएंड रिसर्च (जीएचएसआईएमआर) में चल रहे कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल के समापन का। 
विज्ञापन


इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत स्वाति श्रीवास्तव की किताब मैगनेटिक पॉवर ऑफ योर थाट्स के विमोचन से हुई। विमोचन प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार डॉ. असगर वजाहत, लेखक प्रियंवद, लेखिका अनीता मिश्रा, डॉक्टर संजय गर्ग, खान अहमद फारुख ने किया। स्वाति श्रीवास्तव ने दिल्ली आईआईटी से इंजीनियरिंग की है। उनकी किताब को अमेरिका के हे हाउस ने प्रकाशित किया है।
विज्ञापन


सामाजिक और राजनीतिक माहौल को दर्शाता है साहित्य : विशाल
विशाल भारद्वाज ने कहा कि हर दौर का साहित्य अपने सामाजिक और राजनीतिक माहौल को दर्शाता है। हर शहर का साहित्य सम्मेलन समाज की पीढ़ी को प्रभावित करेगा। शेक्सपियर का 450 साल पुराना लिखा साहित्य आज भी करोड़ों लोगों की पसंद है। अंगूर जैसा साहित्य पढ़ें तो दिलचस्पी बढ़ती जाएगी। एक श्रोता के वामपंथ पर पूछे गए सवाल पर विशाल ने कहा कि दिल बाईं तरफ होता है। उन्होंने अपनी कामयाबी के लिए मशहूर गीतकार गुलजार को श्रेय दिया और कहा कि उन्होंने बतौर संगीत निर्देशन माचिस में उन्हें काम दिलाया। जंगल बुक का चड्ढी पहनके फूल खिला है के निर्देशन में उनको श्रेय दिया। प्ले बैक सिंगर रेखा भारद्वाज ने विशाल से मुलाकात के बारे में बताया। कहा कि दिल्ली के हिंदू कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1984 में दोनों की मुलाकात हुई। कॉलेज में वे अपनी गजल लिखतीं और कंपोज करतीं थीं और विशाल शायर थे। मेरठ में बशीर बद्र और गुलजार की शायरी तो उन्हें कंठस्थ थीं। विशाल ने एक कार्यक्रम के लिए गजलों को कंपोज करने को कहा। तब से दोनों एक-दूसरे के करीब आए। इससे पहले रेखा ने नमक इश्क का, ससुराल गेंदा फूल, जिक्र या रहमान या रहीम सुनाया तो विशाल ने बीड़ी जलई ले, पानी पानी रे-खारे पानी रे, चड्ढी पहनके फूल खिला है, मामा कल्लू मामा, दिल तो बच्चा है जैसे गीत सुनाए। उनका साथ गिटार पर मयूर ने दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

ग्रीनपार्क देख 38 साल पुरानी यादें ताजा हुईं
विशाल ने बताया कि वह 38 साल बाद कानपुर आए हैं। अंडर-19 और सीके नायडू ट्रॉफी के लिए खेलते हुए ग्रीनपार्क स्टेडियम में कई कैंप किए हैं। इस शहर में बहुत वक्त बिताया है। कार्यक्रम में आते समय ग्रीनपार्क स्टेडियम के सामने से गुजरा तो जेहन में पुरानी यादें ताजा हो गईं। वे बोले उत्तर प्रदेश में न पैदा होता तो शायद इस मुकाम पर न होता। यूपी के बिजनौर चांदपुर में पैदा हुए। नजीबाबाद में पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद मेरठ में यूपी बोर्ड से 12वीं तक पढ़ने और बढ़ने की वजह से भाषा और सभ्यता मिली, जिसके बाद ओमकारा जैसी फिल्म दर्शकों तक आई। 

मां ने जूते नहीं बेचने दिया, इसलिए कलाकार बना: अमित सियाल
फेस्टिवल के एक सत्र का नाम कानपुर का भौकाल रहा, जिसमें फिल्मों और ओटीटी प्लेटफार्म की सिरीज में अदाकारी से नाम कमा रहे कानपुर के अमित सियाल ने अपने अनुभव बताए। शिवाला में जन्मे और सिविल लाइंस के प्राइवेट स्कूल में इंटर तक पढ़े अमित ने बताया कि उनके पिता का जूते बनाने और बेचने का काम था। इसमें ही काम करता लेकिन मां ने ठाना कि मुझे और मेरे भाई को जूते नहीं बेचने देंगी। इसलिए कलाकार बन गया। दिल्ली जाकर बैरी जॉन के साथ थियेटर करने, कुछ दिन ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने और वहां से मुंबई का रुख करने के बाद आज इस मुकाम पर हूं। आस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान मित्र बने अभिनेता रणदीप हूडा को मुंबई बुलाने का श्रेय दिया। बताया कि कानपुर की चाट और कुल्हड़ चाय मिस करते हैं। उन्होंने काठमांडू कनेक्शन, महारानी, जामताड़ा, मिर्जापुर जैसी ओटीटी सिरीज और तितली, आफते इश्क, कला, एलएसडी जैसी फिल्म में काम किया है। उन्होंने बताया कि जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक दर्द होता है, खुशी हमें कुछ नहीं सिखाती। 

स्वर कोकिला के अनसुने पहलुओं पर यतींद्र ने डाली रोशनी
सम्मेलन का दूसरा सत्र लता सुर गाथा एक किताब के नाम से रहा, जो लता मंगेशकर की बायोग्राफी है। इसे लिखने वाले प्रसिद्ध लेखक और यतींद्र मिश्र ने सुरों की मालिका के जीवन से जुड़ी यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि जब वह 80 साल की उम्र की थीं, तब उनकी बायोग्राफी लिखने का मौका मिला, जो करीब 10 सालों में पूरी हुई। बताया कि उनसे टेलीफान पर इंटरव्यू करता था, तब यह देखना पड़ता था कि भारत का कोई मैच न रहा हो, भारत मैच हार न रहा हो और सचिन तेंदुलकर का फार्म न खराब रहा हो। ऐसा होने पर वे कई-कई दिन उदास रहती थीं और किसी से बात नहीं करती थीं। जब उनकी तारीफ करते थे तो वह खुद से पहले राजकुमारी, सुरैया और अन्य महान गायकों का जिक्र करने की बात करती थीं। उनके एसडी बर्मन, मोहम्मद रफी के विवाद और किसी अन्य गायिका के बारे में तुलना को लेकर उड़ने वाली अफवाहों का खंडन किया। कार्यक्रम का अंत उनके गीत, हम गवनवा ना जइबे बिना झुलनी से हुआ। 

अंदाज-ए-बयां में कवियों ने रचनाओं का पाठ किया
अंदाज-ए-बयां सत्र में तीन कवियों ने तीन अलग-अलग मिजाज की कविताएं पेश की। कानपुर में वीएसएसडी कॉलेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉक्टर पंकज चतुर्वेदी, प्रशासनिक सेवा में रहे दिल्ली से आए शायर डॉक्टर संजय गर्ग, अमृतसर से आए पेशे से आर्किटेक्ट शायर सरबजीत सिंह बहल रहे। शायर सरबजोत सिंह श्रोताओं की फरमाइश पर प्रसिद्ध नज्म गुजरावाला सुनाई। पहला सफेद बाल कविता पंकज चतुर्वेदी ने अल्लाह करे मर जाएं मेरे चाहने वाले शेर को और डॉक्टर संजय गर्ग सागर अकबराबादी ने सुनाया।

जल थल मल उथल पुथल: सोपान जोशी 
पर्यावरण क्षेत्र से पत्रकारिता करने वाले सोपान जोशी के साथ सत्र हुआ। इसमें डॉ. आलोक बाजपेई ने उनसे बातचीत की। सोपान जोशी ने कहा कि राजनीतिक बात बिना षडयंत्र के नहीं होती है और बचपन से मुझे लगता है कि हमारे यहां सबसे बड़ा षडयंत्र शिक्षा है। सोपान जोशी ने अपने पिता प्रभाष जोशी से जुड़े कुछ किस्से सुनाए और बताया कि किस तरह उन्होंने कभी अपनी अपेक्षाओं का बोझ बच्चों पर नहीं लादा। अपनी किताब जल थल मल के हवाले से उन्होंने कई दिलचस्प अनुभव सुनाए। 

महमूद ने किया उर्दू भाषा और खास अंदाज में महाभारत का वर्णन
साहित्य सम्मेलन का समापन महमूद फारूकी की दास्तान गोई से हुआ। मशहूर दास्तानगो शम्सुर्रहमान फारूकी के पुत्र ऑक्सफोर्ड से पढ़े लेखक, इतिहासविद् महमूद फारूकी ने कर्ण के जीवन पर आधारित दास्तान सुनाई। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर कर्ण के जन्म और जीवन को अपने खास अंदाज में बयान किया। महमूद फारूकी ने बताया कि कर्ण के जीवन की कहानी उन्हें बहुत प्रेरित करती है। इसलिए उन्होंने दास्तान के लिए इस कहानी का चुनाव किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed