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बदहाल औद्योगिक क्षेत्र: टेक्सटाइल पार्क में मूलभूत सुविधाओं का टोटा, उद्यमियों की उम्मीदें तार-तार, कही ये बात

Fri, 24 Jan 2025 04:39 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 24 Jan 2025 04:39 PM IST
सार

Kanpur News: उद्यमियों का कहना है कि राज्य व केंद्र के तरह-तरह के करोड़ों रुपये के टैक्स लिए जाते हैं। इसके बावजूद उद्यम के लिहाज का माहौल नहीं दिया गया है।

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Kanpur Industrial area in bad shape Textile park lacks basic facilities entrepreneurs hopes shattered
औद्योगिक क्षेत्र - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर-प्रयागराज हाईवे और दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन के बीच स्थित रूमा औद्योगिक क्षेत्र में वर्ष 2004 में टेक्सटाइल पार्क बसना शुरू हुआ था। यहां लगभग 500 टेक्सटाइल यूनिट स्थापित होने की क्षमता है। हाईवे किनारे होने से परिवहन की बेहतर सुविधा के चलते वर्ष 2008-09 से ही यहां होजरी की यूनिटें लगनी शुरू हो गईं। हालांकि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में दो दशक बाद भी यहां करीब 250 इकाइयां ही चल रही हैं।

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करोड़ों रुपये टैक्स देने के बावजूद उद्यमी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से बसाए टेक्सटाइल पार्क की 500 इकाइयों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए यहां से निकलने वाले केमिकलयुक्त पानी के शोधन के लिए कम से कम चार से पांच एमएलडी क्षमता का कॉमन इफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगना चाहिए था। अनदेखी का आलम यह रहा कि वर्ष 2017 तक सीईटीपी निर्मित न होने से क्षेत्र में ही केमिकलयुक्त पानी बहता रहा।

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एमएलडी के नए शोधन प्लांट का इंतजार
2017 में डेढ़ एएमएलडी का सीईटीपी प्लांट शुरू हुआ तो इसकी क्षमता आधी निकली। इसके चलते आज भी प्लांट से पूरे इंडस्ट्रियल वेस्ट का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसलिए अभी रेलवे लाइन किनारे गंदा पानी भरा देखा जा सकता है। नई यूनिट लगाने के लिए तैयार करीब 80 उद्यमियों को यहां प्रस्तावित 4 एमएलडी के नए शोधन प्लांट का इंतजार है। इसके अलावा क्षेत्र की सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। जल निकासी, सीवरेज और पेयजल लाइन अब तक नहीं डाली जा सकी हैं।

खराब स्ट्रीट लाइटों, बिजली कटौती और असुरक्षा से परेशानी
एक बड़ी समस्या खराब स्ट्रीट लाइटों की है। इससे कामगारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उद्यमियों ने बताया कि यहां पांच फीडर हैं। इसमें सबसे अधिक तिरंगा फीडर से एक सप्ताह में करीब 15 घंटे बिजली गुल होती है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। तमाम शिकायतों के बाद भी केस्को अफसर ध्यान नहीं देते। वही पेट्रोलिंग न होने से रात में सुरक्षा बड़ी चुनौती है। रात में यहां ट्रांसफार्मर का तेल तक चोरी हो जाता है। कर्मचारियों से लूट के भी कई मामले आ चुके हैं।

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पुलिस पिकेट और पेट्रोलिंग की मांग
उद्यमियों ने कहा कि क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही यहां पर पुलिस पिकेट भी हो, जिसे बेहतर निगरानी हो सके। ग्रीन बेल्ट को डेवलप कर हरा-भरा किया जाए। ताकि क्षेत्र में आने वाले लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़े।

  • राज्य व केंद्र के तरह-तरह के करोड़ों रुपये के टैक्स लिए जाते हैं। इसके बावजूद उद्यम के लिहाज का माहौल नहीं दिया गया। करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। बदहाली के चलते खरीदार आने से कतराते हैं।  -गुंजन सिंह यादव, गुंजन होजरी
  • इतने बड़े होजरी पार्क में रात में पुलिस की गश्त तक नहीं होती। इसलिए यहां चोरी की वारदातें आम हैं। रात में तो कई लूट के मामले आ चुके हैं। फिर पुलिस सीसीटीवी फुटेज तलाशती फिरती है। यहां योजना के नाम से पुलिस चौकी बने, नहीं तो कम से कम एक पुलिस की पिकेट हो।  -संदीप शर्मा, वीएस टेक्सटाइल
  • बिना शेड्यूल केस्को की विद्युत आपूर्ति की कटौती और ट्रिपिंग से उत्पादन बहुत प्रभावित होता है। केस्को कर्मी सिस्टम अपग्रेड के नाम पर कब पेड़ों की छंटाई करने लगें, पता नहीं चलता। केस्को लाखों के बिल का भुगतान लेने के बाद भी उद्यमियों को सुचारू आपूर्ति नहीं दे पा रहा है।  -अभिषेक अग्रवाल, गंगा निटफेब
  • इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र में लगीं स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। अंधेरे की वजह से फैक्टरी बंद होने के बाद मजदूर भी सड़क पर चलने से डरते हैं। अक्सर सड़क पर लोग गिरकर घायल हो जाते हैं। यहां मार्ग प्रकाश के लिए सैकड़ों पोल लगे हैं, समझ नहीं आता कि सभी की लाइट खराब हैं, लाइन कटी या फॉल्ट हैं।  -संजय दुआ, हिमांशी पैकेजर

रूमा औद्योगिक क्षेत्र नगर निगम को हस्तांतरित करने के लिए सर्वे किया जा चुका है। यूपीसीडा को रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। लेकिन उन्होंने अभी इस क्षेत्र को नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया है। इस वजह से वहां पर अभी दिक्कत है। जल्दी ही इसके लिए रिमाइंडर भेजा जाएगा।  -दिवाकर भास्कर, प्रभारी अभियंता, जोन-दो

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