{"_id":"5c9bb5d3bdec222dcc577580","slug":"kanpur-iit-student-dr-p-d-dwivedi-shown-route-to-anti-satellite-missiles","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एंटी सैटेलाइट मिसाइल को आईआईटीयन ने दिखाया रास्ता, कानपुर के लिए गौरव का पल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एंटी सैटेलाइट मिसाइल को आईआईटीयन ने दिखाया रास्ता, कानपुर के लिए गौरव का पल
Thu, 28 Mar 2019 12:26 AM IST
प्रशांत कुमार
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 28 Mar 2019 12:26 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर लो अर्थ ऑरबिट (एलईओ) में लाइव सेटेलाइट को मार गिराने वाले एंटी सैटेलाइट मिसाइल को आईआईटी कानपुर के पुरा छात्र डॉ. पीएन द्विवेदी ने ही रास्ता दिखाया है। उनकी टीम ने ही इस मिशन के लिए गाइडेंस कंट्रोल सॉफ्टवेयर तैयार किया था।
डॉ. द्विवेदी ने आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस विभाग से 2004 में बीटेक किया था। मौजूदा समय में वे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (डीआरडीओ) के एसोसिएट डायरेक्टर और आईआईटी कानपुर के मानद प्रोफेसर हैं। डॉ. द्विवेदी के शिक्षक रहे और मौजूदा समय में एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष ने बताया कि डॉ. पीएन द्विवेदी इस प्रोजेक्ट के लिए गाइडेंस कंट्रोल सिस्टम तैयार करने वाले बड़े वैज्ञानिकों में शामिल हैं।
विज्ञापन
डॉ. द्विवेदी ने आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस विभाग से 2004 में बीटेक किया था। मौजूदा समय में वे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (डीआरडीओ) के एसोसिएट डायरेक्टर और आईआईटी कानपुर के मानद प्रोफेसर हैं। डॉ. द्विवेदी के शिक्षक रहे और मौजूदा समय में एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष ने बताया कि डॉ. पीएन द्विवेदी इस प्रोजेक्ट के लिए गाइडेंस कंट्रोल सिस्टम तैयार करने वाले बड़े वैज्ञानिकों में शामिल हैं।
विज्ञापन
2010 में मिसाइल तैयार होने की जानकारी दी थी
डॉ. पीएन द्विवेदी
उन्होंने ‘मिशन शक्ति’ को सफल बनाने के लिए गाइडेंस कंट्रोल सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसी सॉफ्टवेयर की मदद से अंतरिक्ष में मौजूद लाइव सेटेलाइट तक एंटी सैटेलाइट मिसाइल पहुंच सकी है। यह ऐसा सॉफ्टवेयर है जो सैटेलाइट और मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रास्ता बताने का काम करता है। डॉ. द्विवेदी की उपलब्धि पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने खुशी जताई है।
एंटी सैटेलाइट मिसाइल को तैयार करने की टीम को आईआईटी कानपुर के मानद प्रोफेसर, डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल और रक्षा मंत्री के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे डॉ. वीके सारस्वत ने लीड किया है। डॉ. सारस्वत ने सबसे पहले 10 फरवरी 2010 में ही इस मिसाइल के तैयार होने की जानकारी दी थी। बताया था कि भारत के पास लो अर्थ और पोलर आर्बिट में मौजूद दुश्मनों के उपग्रहों को मार गिराने की जरूरी तकनीक और उपकरण उपलब्ध हैं।
एंटी सैटेलाइट मिसाइल को तैयार करने की टीम को आईआईटी कानपुर के मानद प्रोफेसर, डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल और रक्षा मंत्री के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे डॉ. वीके सारस्वत ने लीड किया है। डॉ. सारस्वत ने सबसे पहले 10 फरवरी 2010 में ही इस मिसाइल के तैयार होने की जानकारी दी थी। बताया था कि भारत के पास लो अर्थ और पोलर आर्बिट में मौजूद दुश्मनों के उपग्रहों को मार गिराने की जरूरी तकनीक और उपकरण उपलब्ध हैं।
अग्नि एक्सीलेंस अवॉर्ड भी जीत चुके हैं डॉ. द्विवेदी
डॉ. पीएन द्विवेदी के नाम कई अन्य उपलब्धियां भी हैं। उन्होंने भारत में पहली बार किसी मिसाइल के लिए नॉन लियिन कंट्रोलर को डिजाइन किया था। इस अभूतपूर्व काम के लिए उन्हें अग्नि एक्सीलेंस अवॉर्ड 2007 और डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड 2009 से सम्मानित किया गया। डॉ. द्विवेदी के 50 से अधिक रिसर्च पेपर देश और दुनिया के कई प्रतिष्ठित जनरल में प्रकाशित हो चुके हैं।