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कानपुर आईआईटी के पीएचडी छात्र की ब्लैक फंगस से मौत, पीजीआई में चल रहा था इलाज, निकाल दी गई थी एक आंख
Tue, 25 May 2021 07:21 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 25 May 2021 07:21 PM IST
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कवींद्र कुमार चतुर्वेदी (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
कानपुर आईआईटी पीएचडी के छात्र कवींद्र कुमार चतुर्वेदी का ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) से निधन हो गया। कोरोना ठीक होने के बाद कवींद्र को ब्लैक फंगस ने जकड़ लिया था। कवींद्र का इलाज पीजीआई लखनऊ में चल रहा था मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। आईआईटी निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
मूल रूप से टिकरी, बेदापुर फैजाबाद के रहने वाले कवींद्र कुमार ने एमएनआईटी इलाहाबाद से अपना मास्टर किया था। आईआईटी में 2019 में उन्होंने पीएचडी में दाखिला लिया था। वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे थे। कवींद्र ने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान शादी की थी। उनकी पत्नी गृहिणी हैं।
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मूल रूप से टिकरी, बेदापुर फैजाबाद के रहने वाले कवींद्र कुमार ने एमएनआईटी इलाहाबाद से अपना मास्टर किया था। आईआईटी में 2019 में उन्होंने पीएचडी में दाखिला लिया था। वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे थे। कवींद्र ने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान शादी की थी। उनकी पत्नी गृहिणी हैं।
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कुछ समय पहले वह कोरोना की चपेट में आये थे। कोरोना से ठीक होने के बाद वह ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए। उनका लखनऊ स्थित पीजीआई में इलाज चल रहा था। प्रोफेसर अभय करंदीकर में अपने ट्विटर और फेसबुक अकाउंट से उनके निधन की सूचना दी है।
प्रोफेसर करंदीकर ने यह भी बताया कि उनके इलाज की हर संभव कोशिश की गई, यहां तक कि पूर्व छात्र (जो एक फार्मा कंपनी के बोर्ड मेंबर हैं) की मदद लेकर उनको दवाइयां उपलब्ध कराई गई। लेकिन उनको बचा नहीं सके। उन्होंने युवा मेधा के जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
निकाल दी गई थी एक आंख
कवींद्र की हालत काफी खराब थी। इलाज के दौरान उनकी एक आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी थी और उसे निकाला भी जा चुका था। आईआईटी निदेशक से लेकर उनके साथी इलाज के दौरान सहयोग करते रहे लेकिन फंगस ने उनके ब्रेन पर अटैक कर दिया था। मंगलवार को उनका निधन हो गया।
प्रोफेसर करंदीकर ने यह भी बताया कि उनके इलाज की हर संभव कोशिश की गई, यहां तक कि पूर्व छात्र (जो एक फार्मा कंपनी के बोर्ड मेंबर हैं) की मदद लेकर उनको दवाइयां उपलब्ध कराई गई। लेकिन उनको बचा नहीं सके। उन्होंने युवा मेधा के जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
निकाल दी गई थी एक आंख
कवींद्र की हालत काफी खराब थी। इलाज के दौरान उनकी एक आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी थी और उसे निकाला भी जा चुका था। आईआईटी निदेशक से लेकर उनके साथी इलाज के दौरान सहयोग करते रहे लेकिन फंगस ने उनके ब्रेन पर अटैक कर दिया था। मंगलवार को उनका निधन हो गया।