फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur health Alert The ringing of mobile phone is not leaving you even during sleep Phantom Ringtone Syndrome

हेल्थ अलर्ट: नींद में भी पीछा नहीं छोड़ रही मोबाइल की घंटी, फैंटम रिंगटोन सिंड्रोम की गिरफ्त में आ रहे हैं लोग

Sun, 24 Aug 2025 09:41 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 24 Aug 2025 09:41 AM IST
सार

Kanpur News: फैंटम रिंगटोन सिंड्रोम से ग्रसित लोगों के न्यूरो ट्रांसमीटर का सामंजस्य भी बिगड़ने लगता है। इसमें त्वरित प्रत्युत्तर देने में लोग सुस्ती दिखाते हैं। याददाश्त भी प्रभावित होती है। उनके रिफ्लैक्सेस में भी असर आ सकता है।

विज्ञापन
Kanpur health Alert The ringing of mobile phone is not leaving you even during sleep Phantom Ringtone Syndrome
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल करने वालों को सोते में भी रिंगटोन सुनाई पड़ रही है। हालांकि फोन बजता नहीं है लेकिन इस भ्रम की वजह से लोगों की नींद बीच में टूट जाती है और वे फोन उठाकर देखने लगते हैं तो पता चलता है कि रिंगटोन बजी ही नहीं। ऐसे लोगों के दिमाग पर भारीपन रहता है। याददाश्त सुस्त हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या को फैंटम रिंगटोन सिंड्रोम रहते हैं। रोगी हैलट के मनोरोग विभाग की ओपीडी में आकर दिक्कत बता रहे हैं। उनका भावनात्मक बर्ताव भी बदल रहा है।

विज्ञापन

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का मनोरोग विभाग ऐसे लोगों का आंकड़ा इकट्ठा कर रहा है। इनकी हिस्ट्री का अध्ययन किया जाएगा ताकि उनके व्यक्तित्व पर आने वाले अन्य प्रभावों की भी जानकारी हो सके। फैंटम रिंगटोन सिंड्रोम के रोगियों में 18 से लेकर 50 वर्ष आयु वर्ग के लोग अधिक हैं। दो साल में 150 रोगियों को सैंपल सर्वे में शामिल किया गया है। इनमें 45 महिलाएं हैं और 105 पुरुष हैं। इनमें ज्यादातर नींद न आने, उलझन, घबराहट की दिक्कत होने पर अस्पताल आए थे।

विज्ञापन

मस्तिष्क का सेरिब्रल कॉर्टेज हिस्सा होता है प्रभावित
इस सिंड्रोम के रोगी बताते हैं कि अचानक राह चलते भी उन्हें रिंगटोन और मैसेज टोन की आवाज आने लगती है और वे रुककर मोबाइल चेक करने लगते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि फैंटम रिंगटोन सिंड्रोम में मस्तिष्क का सेरिब्रल कॉर्टेज हिस्सा प्रभावित होता है। मोबाइल का बहुत अधिक इस्तेमाल करने पर ऐसा होता है। किसी तरह का सेंसेशन न होने पर भी मस्तिष्क सेंसेशन का भ्रम पैदा करने लगता है। व्यक्ति को रिंगटोन, मैसेज टोन बजने का आभास होता है।

न्यूरो ट्रांसमीटर का भी बिगड़ने लगता सामंजस्य
फैंटम रिंगटोन सिंड्रोम से ग्रसित लोगों के न्यूरो ट्रांसमीटर का सामंजस्य भी बिगड़ने लगता है। इसमें त्वरित प्रत्युत्तर देने में लोग सुस्ती दिखाते हैं। याददाश्त भी प्रभावित होती है। उनके रिफ्लैक्सेस में भी असर आ सकता है। मिजाज में भी बदलाव होता है। चिड़चिड़ापन और मस्तिष्क में भारीपन बना रहता है। कुछ पढ़ने पर बात याद नहीं रहती। काम कुछ करते हैं और दिमाग कहीं और रहता है।

विज्ञापन

इन बातों का रखें ध्यान

  • जरूरत के हिसाब से मोबाइल देखने की अवधि तय करें।
  • गैर जरूरी, फालतू की चीजों, रील आदि में दिमाग न खपाएं।
  • सोने के पहले और सुबह उठने के तुरंत बाद स्क्रीन न देखें।
  • पहले सुबह उठें, बाहर जाएं, धूप में रहें, फिर उसके बाद फोन देखें।
  • कोई चीज पढ़नी हो तो ऑनलाइन के स्थान पर किताब पढ़ने को प्राथमिकता दें।
  • 24 घंटे में दो घंटे ही फोन की स्क्रीन देखें तो बेहतर।
  • दो घंटे से अधिक फोन स्क्रीन देखना जरूरी हो तो छह महीने पर आंखों की जांच करा लें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed