Kanpur: छह माह में पांच नोटिस, 1.20 करोड़ का जुर्माना... नहीं रुका गंगा में नालों का गिरना
गंगा किनारे बने सबसे बड़े सीसामऊ नाले को करीब सात साल पहले टैप किया गया था, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण अभी भी वहां से अक्सर पानी का रिसाव सीधे गंगा में होता रहता है।
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इस लापरवाही पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अमित मिश्रा के अनुसार 24 फरवरी की सुबह 10:55 बजे जाजमऊ स्थित 130 एमएलडी और 43 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से संबद्ध कॉमन सीवेज पंपिंग स्टेशन का निरीक्षण किया था। तब सात में चार पंप चल रहे थे, जिससे नाले का पानी ओवरफ्लो होकर बाईपास लाइन के माध्यम से सीधे गंगा में जाता पाया गया था।
सीसामऊ से पानी का रिसाव अभी भी ठीक नहीं हुआ
गंगा किनारे बने सबसे बड़े सीसामऊ नाले को करीब सात साल पहले टैप किया गया था, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण अभी भी वहां से अक्सर पानी का रिसाव सीधे गंगा में होता रहता है। कई बार के निरीक्षण के बावजूद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई इसका हल नहीं खोज पाई है। पिछले महीने जिलाधिकारी ने जाकर इस मामले को देखा था। इसमें पता चला था कि यहां पर स्थापित टेफ्को कॉलोनी से एक पाइप लाइन नाले से सटकर गंगा की तरफ जा रही है। विभाग को चेतावनी दी गई थी कि इसे ठीक किया जाए।