कानपुर अग्निकांड: अंतिम संस्कार के नियमों का पालन न करने पर भड़के परिजन, बोले- हमारे घर की महिलाएं जानवर नहीं
मड़ौली अग्निकांड में जली मां-बेटी का अंतिम संस्कार बुधवार को हो गया है। परिजनों और ग्रामीणों ने नम आंखों से दोनों को विदाई दी। शव को ले जाते समय एक बार फिर परिजन और ग्रामीण नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि हमारे घर की महिलाएं जानवर नहीं हैं।
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कानपुर देहात के मड़ौली अग्निकांड में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार के नियमों का पालन न किए जाने पर बुधवार की सुबह जिंदा जली मां-बेटी के परिजन और ग्रामीण भड़क गए। बोले, हमारे घर की महिलाएं जानवर नहीं है। दौड़ी चली आ रही है और आप लोग गाड़ी नहीं रोक रहे हैं।
मामला बढ़ता देख एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने माफी मांग कर लोगों को शांत कराया। दरअसल, हुआ यह कि बुधवार की सुबह प्रमिला और उनकी बेटी नेहा के शव अंतिम संस्कार के लिए शव वाहन से बिठूर घाट जा रहे थे। शव वाहन में शवों के साथ परिवार के कुछ लोग भी बैठे थे।
जब एसपी ने माफी मांगी, तब माने परिजन
गांव से करीब दो किलोमीटर दूर चलने के बाद एक पीपल का पेड़ आता है। परिजनों के अनुसार हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार उसी पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ी को रुकना था। वहां पर कुछ रस्में निभानी थी। इसके लिए महिलाएं भी पीछे-पीछे आ रही थी। वाहन चालक ने वहां गाड़ी नहीं रोकी।
पेड़ से करीब तीन सौ मीटर आगे शव वाहन पहुंच गया। इससे परिजन और ग्रामीण भड़क गए। मौके की नजाकत देख एसपी ने एंबुलेस चालक की गलती मानी और माफी मांगी। कहा कि चालक को नहीं पता था। इसलिए गाड़ी आगे बढा़ दी। तब जाकर परिजन शांत हुए और शवों को बिठूर ले गए।
बेटी व नातिन को याद कर रोईं सरोज
बुधवार को खानपुर भंसरा झींझक से मड़ौली पहुंची मृतक प्रमिला दीक्षित की मां सरोज दुबे का रो रो कर बुरा हाल हो गया। वह बार बार बेटी व नातिन को याद कर रोने लगतीं। रुधें गले से कहतीं कि इकलौती नातिन नेहा उर्फ शिवा की धूमधाम से शादी करना चाहती थी। रिश्ता देखा जा रहा था। नहीं पता था कि खुशी नसीब में नहीं है।