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कानपुर: लखनऊ डीसीपी पूर्वी कार्यालय के आठ पुलिसकर्मियों पर डकैती का मुकदमा, वसूले थे 40 लाख
Wed, 24 Nov 2021 10:16 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 24 Nov 2021 10:16 AM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ पुलिस कमिश्नरी के डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच में तैनात आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ काकादेव थाने में डकैती समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की है। आरोप है कि एमबीए छात्र, उसके मामा व दोस्तों को उठाकर टॉर्चर किया और छोड़ने के एवज में 40 लाख रुपये वसूले। घर पर डाका डालकर नकदी व जेवरात लूटे।
आखिर में खुद को फंसता देख पुलिसकर्मियों ने साजिश के तहत इन सभी पर लखनऊ के गोमती नगर थाने में जुआं अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी दिखाई। शास्त्री नगर निवासी मयंक एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। मयंक के मुताबिक 24 जनवरी 2021 को शाम चार बजे अपने दोस्त जमशेद व आकाश गोयल के साथ बदनाम टी स्टॉल पर चाय पी।
जब मयंक व आकाश वहां से घर के लिए चले तो डबल पुलिया के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (यूपी 32 एलई 2282) व एक बिना नंबर की नीले रंग की टाटा सूमो गोल्ड वहां आकर रुकी। जिसमें डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मी मौजूद थे। आरोप है कि पुलिसकर्मी मयंक व आकाश गोयल को कार में उठा ले गए। लखनऊ कैंट थाने में मारा पीटा। फिर यहां से हजरतगंज में मयंक के मामा के घर जाकर दुर्गा सिंह को उठा लिया।
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फिर कोचिंग संचालक शमशाद को लेकर फिर कैंट थाने आते हैं। टॉर्चर करने के बाद 25 जनवरी के तड़के करीब साढ़े तीन बजे इन सभी को लेकर पुलिसकर्मी मयंक के घर पर दबिश देते हैं। आरोप है यहां से तीस हजार रुपये की नकदी व एक हार का सेट ले जाते हैं। वापस लखनऊ लौट जाते हैं। बाद में मयंक के परिवार वालों से 40 लाख रुपये की मांग करते हैं।
उसी दिन सुबह परमट चौराहे पर पुलिसकर्मी यह रकम लेते हैं। जब इसकी शिकायत तत्कालीन डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से की जाती है तो इसकी भनक आरोपी पुलिसकर्मियों को लगती है। जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी साजिश के तहत दुर्गा सिंह, मयंक सिंह, शमशाद अहमद, मुस्ताक, आकाश गोयल पर गोमती नगर जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाकर 23 लाख रुपये की रिकवरी दिखाते हैं।
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आखिर में खुद को फंसता देख पुलिसकर्मियों ने साजिश के तहत इन सभी पर लखनऊ के गोमती नगर थाने में जुआं अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी दिखाई। शास्त्री नगर निवासी मयंक एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। मयंक के मुताबिक 24 जनवरी 2021 को शाम चार बजे अपने दोस्त जमशेद व आकाश गोयल के साथ बदनाम टी स्टॉल पर चाय पी।
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जब मयंक व आकाश वहां से घर के लिए चले तो डबल पुलिया के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (यूपी 32 एलई 2282) व एक बिना नंबर की नीले रंग की टाटा सूमो गोल्ड वहां आकर रुकी। जिसमें डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मी मौजूद थे। आरोप है कि पुलिसकर्मी मयंक व आकाश गोयल को कार में उठा ले गए। लखनऊ कैंट थाने में मारा पीटा। फिर यहां से हजरतगंज में मयंक के मामा के घर जाकर दुर्गा सिंह को उठा लिया।
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फिर कोचिंग संचालक शमशाद को लेकर फिर कैंट थाने आते हैं। टॉर्चर करने के बाद 25 जनवरी के तड़के करीब साढ़े तीन बजे इन सभी को लेकर पुलिसकर्मी मयंक के घर पर दबिश देते हैं। आरोप है यहां से तीस हजार रुपये की नकदी व एक हार का सेट ले जाते हैं। वापस लखनऊ लौट जाते हैं। बाद में मयंक के परिवार वालों से 40 लाख रुपये की मांग करते हैं।
उसी दिन सुबह परमट चौराहे पर पुलिसकर्मी यह रकम लेते हैं। जब इसकी शिकायत तत्कालीन डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से की जाती है तो इसकी भनक आरोपी पुलिसकर्मियों को लगती है। जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी साजिश के तहत दुर्गा सिंह, मयंक सिंह, शमशाद अहमद, मुस्ताक, आकाश गोयल पर गोमती नगर जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाकर 23 लाख रुपये की रिकवरी दिखाते हैं।
एक करोड़ की मांग की थी
एफआईआर के मुताबिक जब पुलिसकर्मी मयंक, दुर्गा व अन्य को टॉर्चर कर रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने मयंक के दूसरे मामा विक्रम सिंह को शमशाद से फोन कराया था। तब पुलिसकर्मियों ने छोड़ने के एवज में एक करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद में दोबारा दुर्गा सिंह के मोबाइल से विक्रम को फोन कर चालीस लाख रुपये मांगे थे। तब डील फाइनल हुई थी।
इन पर दर्ज हुआ केस
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दरोगा रजनीश वर्मा व सिपाही देवकी नंदन, संदीप शर्मा, नरेंद्र बहादुर सिंह, राम निवास शुक्ला, आनंद मणि सिंह, अमित लखेड़ा व रिंकू सिंह पर डकैती, धमकी देने, गाली गलौज करने समेत अन्य धारा में मुकदमा दर्ज किया है। काकादेव इंस्पेक्टर केस की जांच कर रहे हैं।
एक मुखबिर ने किया पूरा खेल
मयंक के मुताबिक उनके पिता ठेकेदार हैं। एक दुकान की खरीदारी के लिए चालीस लाख रुपये का इंतजाम किया था। यह जानकारी पुलिस के एक मुखबिर को हो गई। उसी ने लखनऊ के पुलिसकर्मियों संग मिलकर साजिश रची और फिर अंजाम दिया। मुखबिर सीसीटीवी फुटेज में कैद है। विवेचना में उसका नाम जोड़ा जाएगा।
एफआईआर के मुताबिक जब पुलिसकर्मी मयंक, दुर्गा व अन्य को टॉर्चर कर रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने मयंक के दूसरे मामा विक्रम सिंह को शमशाद से फोन कराया था। तब पुलिसकर्मियों ने छोड़ने के एवज में एक करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद में दोबारा दुर्गा सिंह के मोबाइल से विक्रम को फोन कर चालीस लाख रुपये मांगे थे। तब डील फाइनल हुई थी।
इन पर दर्ज हुआ केस
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दरोगा रजनीश वर्मा व सिपाही देवकी नंदन, संदीप शर्मा, नरेंद्र बहादुर सिंह, राम निवास शुक्ला, आनंद मणि सिंह, अमित लखेड़ा व रिंकू सिंह पर डकैती, धमकी देने, गाली गलौज करने समेत अन्य धारा में मुकदमा दर्ज किया है। काकादेव इंस्पेक्टर केस की जांच कर रहे हैं।
एक मुखबिर ने किया पूरा खेल
मयंक के मुताबिक उनके पिता ठेकेदार हैं। एक दुकान की खरीदारी के लिए चालीस लाख रुपये का इंतजाम किया था। यह जानकारी पुलिस के एक मुखबिर को हो गई। उसी ने लखनऊ के पुलिसकर्मियों संग मिलकर साजिश रची और फिर अंजाम दिया। मुखबिर सीसीटीवी फुटेज में कैद है। विवेचना में उसका नाम जोड़ा जाएगा।