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कानपुर देहात : अब प्राधिकरण देगा 50 बेड के अस्पताल के पंजीकरण की अनुमति
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कानपुर देहात। जनपद में 50 व उससे ज्यादा बेड के अस्पतालों के पंजीकरण के लिए सरकार ने नई गाइड लाइन जारी की है। इसके अनुसार अब पुलिस की अनुमति लेनी जरूरी होगी। पंजीकरण की अनुमित डीएम स्तर से मिलेगी, इसके लिए प्राधिकरण का गठन भी हुआ है।
जनपद में करीब 60 प्राइवेट अस्पताल पंजीकृत हैं। इसमें से छह अस्पताल 50 बेड के हैं। शासन ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट में बदलाव किया है। इसके अनुसार डीएम जेपी सिंह ने अपने स्तर से जिला पंजीयन प्राधिकरण का गठन किया है।
डीएम ने एसडीएम अकबरपुर वागीश कुमार शुक्ला को पंजीकरण प्राधिकरण का अध्यक्ष व सीएमओ डॉ. एके सिंह को सचिव नामित किया है। इसमें उपायुक्त उद्योग चंद्रभान, सहायक श्रमायुक्त अवधेश कुमार भी शामिल हैं।
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वहीं, सीएमओ की ओर से एसपी को भी पत्राचार हुआ है। वहां से एक अधिकारी को प्राधिकरण में शामिल किया जाना है। अभी तक सभी अस्पतालों को सीएमओ स्तर से पंजीयन मिल जाता था, लेकिन नई गाइडलाइन आने से जनपद के 50 बेड के अस्पतालों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया कठिन हो जाएगी।
एक साल का मिलेगा अस्थायी लाइसेंस
50 व उससे अधिक बेड वाले अस्पतालों को पहले अस्थायी तौर पर एक वर्ष का लाइसेंस दिया जाएगा। अगर वह विभाग के मानकों पर खरे उतरते हैं तो फिर से पांच साल तक के लिए लाइसेंस दे दिया जाएगा। मानक पूरे न होने पर लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
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जनपद में करीब 60 प्राइवेट अस्पताल पंजीकृत हैं। इसमें से छह अस्पताल 50 बेड के हैं। शासन ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट में बदलाव किया है। इसके अनुसार डीएम जेपी सिंह ने अपने स्तर से जिला पंजीयन प्राधिकरण का गठन किया है।
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डीएम ने एसडीएम अकबरपुर वागीश कुमार शुक्ला को पंजीकरण प्राधिकरण का अध्यक्ष व सीएमओ डॉ. एके सिंह को सचिव नामित किया है। इसमें उपायुक्त उद्योग चंद्रभान, सहायक श्रमायुक्त अवधेश कुमार भी शामिल हैं।
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वहीं, सीएमओ की ओर से एसपी को भी पत्राचार हुआ है। वहां से एक अधिकारी को प्राधिकरण में शामिल किया जाना है। अभी तक सभी अस्पतालों को सीएमओ स्तर से पंजीयन मिल जाता था, लेकिन नई गाइडलाइन आने से जनपद के 50 बेड के अस्पतालों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया कठिन हो जाएगी।
एक साल का मिलेगा अस्थायी लाइसेंस
50 व उससे अधिक बेड वाले अस्पतालों को पहले अस्थायी तौर पर एक वर्ष का लाइसेंस दिया जाएगा। अगर वह विभाग के मानकों पर खरे उतरते हैं तो फिर से पांच साल तक के लिए लाइसेंस दे दिया जाएगा। मानक पूरे न होने पर लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।