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कानपुर देहात: बंदी ने जेल में लगाई फांसी, मासूम से दुष्कर्म के मामले में मिली थी बीस साल कैद
Mon, 15 Mar 2021 12:02 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 15 Mar 2021 12:02 AM IST
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आशीष की मौत पर बिलखती मां ममता व परिजन
- फोटो : amar ujala
कानपुर देहात में मासूम से दुष्कर्म के मामले में बीस साल की सजा पाए अंगदपुर, बरौर का रहने वाले आशीष शर्मा (27) ने रविवार सुबह जेल में प्रथम तल पर बने स्टोर में फांसी लगा ली। कुछ देर में पहुंचे जेलकर्मियों ने उसे फंदे से उतारा और जिला अस्पताल भेजा। वहां डॉक्टर ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
अच्छे चाल चलन पर उसे लंबरदार (राइटर) बनाया गया था। वह कार्यालय के काम करता था। 3 दिसंबर 2020 को उसे सजा सुनाई गई थी। डेरापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 6 फरवरी 2016 को विवाह कार्यक्रम में डीजे बजाने वाले कारीगरों के साथ आशीष शर्मा गया था। वह भी डीजे में काम करता था। वहां शादी वाले घर की एक मासूम से दुष्कर्म के मामले में उसे आरोपी बनाया गया।
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अच्छे चाल चलन पर उसे लंबरदार (राइटर) बनाया गया था। वह कार्यालय के काम करता था। 3 दिसंबर 2020 को उसे सजा सुनाई गई थी। डेरापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 6 फरवरी 2016 को विवाह कार्यक्रम में डीजे बजाने वाले कारीगरों के साथ आशीष शर्मा गया था। वह भी डीजे में काम करता था। वहां शादी वाले घर की एक मासूम से दुष्कर्म के मामले में उसे आरोपी बनाया गया।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में निरुद्ध था। पिछले वर्ष 3 दिसंबर 2020 को सुनवाई के बाद कोर्ट से उसे बीस वर्ष की सजा सुनाई थी। उसका बर्ताव सामान्य था। रविवार सुबह साढ़े आठ बजे प्रथम तल पर स्टोर की सफाई करने गया था। वहां रजाई की खोल से फंदा बनाकर उसने पंखे से फांसी लगा ली। जानकारी पर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
फंदे से उतार कर उसे जेल के डॉक्टर आलोक शाक्य ने प्राथमिक उपचार दिया। हालत में सुधार न होने पर उसे वार्डर अरुण कुमार मिश्रा व अनुज कुमार यादव जिला अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर मनोज निगम ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव पोस्टमार्टम के लिए रखवाकर परिजनों को सूचना दी गई। जेलर कुश कुमार ने बताया कि अच्छे चाल चलन की वजह से आशीष शर्मा को राइटर बनाया गया था। वह सामान्य था। कोतवाल तुलसीराम पांडेय ने बताया कि तीन डॉक्टरों के पैनल से वीडियो ग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
दो साल पूर्व बनाया गया था राइटर, मिली थी टर्म बेल
अच्छे चाल चलन के चलते आशीष शर्मा को दो साल पूर्व जेल प्रशासन ने लंबरदार (राइटर) बनाया था। इसके बाद से वह जेल कार्यालय में काम करता था। वर्ष 2019 में मई में उसे बहन की शादी के लिए एक माह की टर्म बेल मिली थी। टर्म बेल पर रहकर उसने बहन की शादी की रस्में की। समय पूरा होने पर वह खुद जेल आ गया था।
फंदे से उतार कर उसे जेल के डॉक्टर आलोक शाक्य ने प्राथमिक उपचार दिया। हालत में सुधार न होने पर उसे वार्डर अरुण कुमार मिश्रा व अनुज कुमार यादव जिला अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर मनोज निगम ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव पोस्टमार्टम के लिए रखवाकर परिजनों को सूचना दी गई। जेलर कुश कुमार ने बताया कि अच्छे चाल चलन की वजह से आशीष शर्मा को राइटर बनाया गया था। वह सामान्य था। कोतवाल तुलसीराम पांडेय ने बताया कि तीन डॉक्टरों के पैनल से वीडियो ग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
दो साल पूर्व बनाया गया था राइटर, मिली थी टर्म बेल
अच्छे चाल चलन के चलते आशीष शर्मा को दो साल पूर्व जेल प्रशासन ने लंबरदार (राइटर) बनाया था। इसके बाद से वह जेल कार्यालय में काम करता था। वर्ष 2019 में मई में उसे बहन की शादी के लिए एक माह की टर्म बेल मिली थी। टर्म बेल पर रहकर उसने बहन की शादी की रस्में की। समय पूरा होने पर वह खुद जेल आ गया था।