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हवा संग बेमौसमी बारिश से गिरी आम की बौर
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तेज हवा व बारिश से गिरी आम की बौर दिखाता दिलीप शुक्ला।
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। तेज हवा व हल्की बारिश से आम की बौर को भी नुकसान हो रहा है। पेड़ से बौर गिर रही है। बदली छाई रहने से फफूंदी जनित बीमारी का खतरा बना है। आम की उपज को नुकसान की आशंका से बाग मालिक चिंतित हैं।
गर्मी के दस्तक देते ही आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो जाता है। इस बार आम के पेड़ों पर बौर अधिक दिखने से फसल अच्छी होनेे की संभावना जताई गई थी। आग के बाग मालिक मो. सलीम, सुधीर, दिलीप शुक्ला व रामप्रसाद आदि ने बताया कि यदि दो-चार दिन ऐसा ही मौसम बना रहा तो आम की बौर को काफी नुकसान होगा। इसका सीधा असर फल उत्पादन पर पड़ेगा। आम की बौर के लिए नमी व बदली हानिकारक है।
भुनगा से बचाव को करें मोनोक्रोटोफास का छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि आम की बौर को भुनगा कीट से बचाने के लिए मोनोक्रोटोफास या मेथाइल ओडेबेटान दवा का छिड़काव करना चाहिए। डेढ़ एमएल दवा प्रति एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से भुनका कीट को नियंत्रित किया जा सकता है।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि मौसम खराब होने से आम की बौर को नुकसान है। नमी व बदली से भुनगा या आम की लसी कीट लगने से बौर को नुकसान होता है। तेज हवा में भी बौर गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। अभी बौर आने का शुरुआती समय है। मौसम ठीक होने पर नुकसान बच सकता है।
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गर्मी के दस्तक देते ही आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो जाता है। इस बार आम के पेड़ों पर बौर अधिक दिखने से फसल अच्छी होनेे की संभावना जताई गई थी। आग के बाग मालिक मो. सलीम, सुधीर, दिलीप शुक्ला व रामप्रसाद आदि ने बताया कि यदि दो-चार दिन ऐसा ही मौसम बना रहा तो आम की बौर को काफी नुकसान होगा। इसका सीधा असर फल उत्पादन पर पड़ेगा। आम की बौर के लिए नमी व बदली हानिकारक है।
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भुनगा से बचाव को करें मोनोक्रोटोफास का छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि आम की बौर को भुनगा कीट से बचाने के लिए मोनोक्रोटोफास या मेथाइल ओडेबेटान दवा का छिड़काव करना चाहिए। डेढ़ एमएल दवा प्रति एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से भुनका कीट को नियंत्रित किया जा सकता है।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि मौसम खराब होने से आम की बौर को नुकसान है। नमी व बदली से भुनगा या आम की लसी कीट लगने से बौर को नुकसान होता है। तेज हवा में भी बौर गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। अभी बौर आने का शुरुआती समय है। मौसम ठीक होने पर नुकसान बच सकता है।