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कानपुर देहात : कोविड संक्रमण के चलते आज और कल बंद रहेंगे न्यायालय
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माती न्यायालय परिसर में बैठक करते अधिवक्ता। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। माती कचहरी में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर वादकारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वहीं जिला जज अनिल कुमार झा ने मंगलवार व बुधवार को कोर्ट में अवकाश घोषित कर दिया गया है। वादों में सामान्य तिथि जारी की जा रही है। इससे सोमवार को कोर्ट परिसर के बाहर वादकारियों की भीड़ लगी रही।
जिला जज की ओर से आदेश जारी होने के बाद अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में बैठक की। इस दौरान जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा कि कोर्ट को इस फैसले पर विचार करना चाहिए। न्यायिक कार्य बंद होने से अधिवक्ताओं की स्थिति बहुत खराब हो रही है।
अधिवक्ता पिछली बंदी के दुष्प्रभाव से ही नहीं उबर पाए हैं कि फिर जिला न्यायालयों के कार्य लगभग बंद हो गए हैं। अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद को पत्र भेजा है। कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार उसके पास वकालत करने के अलावा अन्य कोई अधिकार नहीं है। जबकि न्यायिक कार्य बंद होने से अधिकारी व कर्मचारियों को संपूर्ण वेतन मिलता है।
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ऐसे में अधिवक्ता बच्चे की फीस व अन्य खर्चे कैसे चलाएं। बाजार, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन पहले की तरह से संचालित हैं। सिर्फ न्यायालय के काम बंद करना अधिवक्ताओं के हित में नहीं है।
जिला जज ने 50 प्रतिशत कर्मचारियों को आने के लिए कहा है। साथ ही सभी मुकदमों में जनरल तारीख लगाने के आदेश दिए हैं। अब न्यायालय में आवश्यक मामले जैसे जमानत अर्जी, रिमांड, 164 सीआरपीसी के बयान व स्थगन आदेश संबंधी मामलों की ही सुनवाई होगी।
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जिला जज की ओर से आदेश जारी होने के बाद अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में बैठक की। इस दौरान जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा कि कोर्ट को इस फैसले पर विचार करना चाहिए। न्यायिक कार्य बंद होने से अधिवक्ताओं की स्थिति बहुत खराब हो रही है।
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अधिवक्ता पिछली बंदी के दुष्प्रभाव से ही नहीं उबर पाए हैं कि फिर जिला न्यायालयों के कार्य लगभग बंद हो गए हैं। अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद को पत्र भेजा है। कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार उसके पास वकालत करने के अलावा अन्य कोई अधिकार नहीं है। जबकि न्यायिक कार्य बंद होने से अधिकारी व कर्मचारियों को संपूर्ण वेतन मिलता है।
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ऐसे में अधिवक्ता बच्चे की फीस व अन्य खर्चे कैसे चलाएं। बाजार, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन पहले की तरह से संचालित हैं। सिर्फ न्यायालय के काम बंद करना अधिवक्ताओं के हित में नहीं है।
जिला जज ने 50 प्रतिशत कर्मचारियों को आने के लिए कहा है। साथ ही सभी मुकदमों में जनरल तारीख लगाने के आदेश दिए हैं। अब न्यायालय में आवश्यक मामले जैसे जमानत अर्जी, रिमांड, 164 सीआरपीसी के बयान व स्थगन आदेश संबंधी मामलों की ही सुनवाई होगी।