Kanpur Dehat: प्लास्टिक दाना-केमिकल के बाद पॉलीमर भी गायब; ठप पड़ा पैकेजिंग उत्पादन, करोड़ों का कारोबार प्रभावित
Kanpur Dehat News: वैश्विक युद्ध के हालातों से रनियां का पैकेजिंग उद्योग संकट में है। कच्चे माल (पॉलीमर) की 50% महंगाई और घटते विदेशी ऑर्डर्स के कारण फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर हैं।
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ईरान, इस्रराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण रनियां औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों पर काफी असर पड़ा है। प्लास्टिक दाना, केमिकल के बाद अब पॉलीमर मिलना बंद हो गया है। इससे पैकेजिंग (रैपर) बनाने वाले कंपनियों की शिफ्ट बंद हो गई है। विदेशों से आर्डर कम मिलने के कारण कई पैकेजिंग उत्पादन घट गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ प्लांट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
रनियां औद्योगिक क्षेत्र में पैकेजिंग से जुड़ी करीब 50 से 80 इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में प्रतिदिन करीब पांच लाख से एक करोड़ रुपये तक का उत्पादन होता है। युद्ध के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन पर असर पड़ा है और उद्यमियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि विदेशों से आने वाला कच्चा माल समय पर नहीं मिल पा रहा है। जो सामग्री उपलब्ध हो रही है, उसके दाम भी काफी बढ़ गए हैं।
कई इकाइयों को अस्थायी रूप से करना पड़ सकता है बंद
वहीं विदेशों में निर्यात होने वाले उत्पादों के आर्डर भी कम हो गए हैं और कई जगहों पर आयातकों ने फिलहाल माल उठाना बंद कर दिया है। परिवहन भाड़ा बढ़ने से उद्योगों की लागत और बढ़ गई है। ऐसे में कई इकाइयों में उत्पादन घटने के कारण मजदूरों को पूरा काम नहीं मिल पा रहा है और उन्हें बैठने का पैसा देकर वापस भेजा जा रहा है। उद्यमियों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो कई इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
सिंथेटिक टेक्सटाइल का रॉमटेरियल पॉलीमर होता है, जो कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट है। युद्ध के कारण क्रूड के दाम में भारी बढ़त के कारण और सप्लाई न होने के कारण पॉलीमर की बहुत कमी हो गई है, और करीब करीब मार्केट से गायब है । जो मिल भी रहा है हे उसके दाम औसतन से 50 फीसद बढ़े हुए हैं। इस वजह से एक्सपोर्ट के ऑर्डर में कमी आई है, क्योंकि ग्राहक इतने बढ़े दाम देने को तैयार नहीं हैं और जहाजी भाड़े में भी बहुत ज़्यादा बढ़त है। क्योंकि जहाज भी तेल से ही चलते है। -आनंद वीर सिंह, उद्यमी
पैकेजिंग इकाइयां बिना कच्चे माल के बगैर बेकार है। विदेशों से मिलने वाले आर्डर लगातार घट रहे हैं। कच्चा मिलना असंभव हो गया है। इससे फैक्टरी बंद होने के अंतिम चरण की ओर है। कई जगहों पर माल उठाने से इनकार कर दिया गया है, जिससे उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। बताया कि करीब एक लाख रुपए प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। -मनीष चौरसिया, उद्यमी
एक नजर में असर
- रनियां में 50 से 80 पैकेजिंग इकाइयां।
- प्रतिदिन 5 लाख से 1 करोड़ रुपये तक उत्पादन।
- कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित।
- विदेशों से आर्डर कम हुए।
- परिवहन भाड़ा बढ़ने से लागत बढ़ी।