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कानपुर देहात : शहादत के 50 साल बाद दुआरी में लगवाई सैनिक की प्रतिमा
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शहीद बड़े सिंह की मूर्ति पर मार्ल्यापण करते साथी। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
सरवनखेड़ा। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में शहीदों के गांव में उनकी प्रतिमा लगवाई जा रही हैं। इसी क्रम में सैनिक की शहादत के 50 साल बाद पैतृक गांव दुआरी में उनकी प्रतिमा लगवाई गई। शुक्रवार को जवानों के साथ पहुंचे मेजर ने पंचायत भवन परिसर में प्रतिभा का अनावरण किया। शहीद के साथ तैनात रहे जवानों ने उनकी शहादत की गाथा सुनाई।
दुआरी गांव निवासी सेना के जवान बड़े सिंह 17 दिसंबर 1971 को पश्चिमी पाकिस्तान के सियालकोट की साइफर हाईवे पोस्ट पर शहीद हो गए थे। सेना के अधिकारियों ने पखवारे भर पूर्व शहीद सैनिक की प्रतिमा उनके बेटे रणजीत सिंह को सौंप कर सार्वजनिक भूमि में स्थापित कराने को कहा था। इसे गांव के पंचायत भवन में लगवाया गया।
शुक्रवार को कंपनी कमांडर मेजर वैभव 50 सैनिकों के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने पुष्प अर्पित कर पूरे सम्मान के साथ शहीद की प्रतिमा का अनावरण किया। शहीद के साथ तैनात रहे सेवानिवृत्त सूबेदार दलवंत सिंह व अभिलाष सिंह भदौरिया भी गांव पहुंचे। दलवंत सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि बड़े सिंह उनके साथ ही नौवीं राजपूत रेजीमेंट में तैनात थे।
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भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान पश्चिमी पाकिस्तान सियालकोट में साईफर हाईवे पोस्ट पर भारतीय सैनिक पहुंच गए थे। वहां तिरंगा फहरा दिया था। इस बीच दुश्मनों की गोली बड़े सिंह को लग गई। इसके बाद भी बड़े अंतिम सांस तक फायरिंग करते रहे। शहीद होने के दौरान उनकी उम्र 23 वर्ष थी। शहीद के साथियों की जुबान से बड़े सिंह की वीरगाथा सुनकर ग्रामीण गौरवांवित हो गए।
शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के गांवों के ग्रामीण भी एकत्र हुए थे। ब्लॉक प्रमुख उर्वशी चंदेल के पति अतुल चंदेल ने मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर शहीद सैनिक के बेटे रणविजय सिंह, लाल सिंह, कैलाश सिंह, वीर प्रताप सिंह, अविरल सिंह, शिव सिंह आदि मौजूद रहे।
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दुआरी गांव निवासी सेना के जवान बड़े सिंह 17 दिसंबर 1971 को पश्चिमी पाकिस्तान के सियालकोट की साइफर हाईवे पोस्ट पर शहीद हो गए थे। सेना के अधिकारियों ने पखवारे भर पूर्व शहीद सैनिक की प्रतिमा उनके बेटे रणजीत सिंह को सौंप कर सार्वजनिक भूमि में स्थापित कराने को कहा था। इसे गांव के पंचायत भवन में लगवाया गया।
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शुक्रवार को कंपनी कमांडर मेजर वैभव 50 सैनिकों के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने पुष्प अर्पित कर पूरे सम्मान के साथ शहीद की प्रतिमा का अनावरण किया। शहीद के साथ तैनात रहे सेवानिवृत्त सूबेदार दलवंत सिंह व अभिलाष सिंह भदौरिया भी गांव पहुंचे। दलवंत सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि बड़े सिंह उनके साथ ही नौवीं राजपूत रेजीमेंट में तैनात थे।
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भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान पश्चिमी पाकिस्तान सियालकोट में साईफर हाईवे पोस्ट पर भारतीय सैनिक पहुंच गए थे। वहां तिरंगा फहरा दिया था। इस बीच दुश्मनों की गोली बड़े सिंह को लग गई। इसके बाद भी बड़े अंतिम सांस तक फायरिंग करते रहे। शहीद होने के दौरान उनकी उम्र 23 वर्ष थी। शहीद के साथियों की जुबान से बड़े सिंह की वीरगाथा सुनकर ग्रामीण गौरवांवित हो गए।
शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के गांवों के ग्रामीण भी एकत्र हुए थे। ब्लॉक प्रमुख उर्वशी चंदेल के पति अतुल चंदेल ने मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर शहीद सैनिक के बेटे रणविजय सिंह, लाल सिंह, कैलाश सिंह, वीर प्रताप सिंह, अविरल सिंह, शिव सिंह आदि मौजूद रहे।