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Kanpur Dehat : बाढ़ में 13710 बीघा फसल बर्बाद, करीब 227 लाख का नुकसान

Mon, 29 Aug 2022 01:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2022 01:06 AM IST
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Kanpur Dehat : 13710 bigha crop wasted in flood, loss of about 227 lakhs
ऊंचे स्थान पर खाना बनाती महिला व मौजूद लोग। संवाद - फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। यमुना उफनाने से भोगनीपुर व सिकंदरा तहसील के कुल 40 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। इन गांवों में बाढ़ से करीब 21 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हुई है।
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हालात ये हैं कि इन गांवों की करीब 2742 हेक्टयर यानी 13710 बीघा फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई है। फसल बर्बाद होने से कितने किसानों का नुकसान हुआ यह सर्वे में साफ होगा। फिलहाल फसल बर्बादी से करीब 227 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।
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राजस्थान के बैराज से यमुना में पानी छोड़े जाने से जिले में नदी के तलटही के गांवों के लोगों की जिंदगी में हलचल ला दी है। जलस्तर बढ़ने से सबसे पहले गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद शुरू हुई। इसके बाद मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने में दुश्वारियां झेलनी पड़ीं।
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नदी का पानी लगातार अनुमान से अधिक बढ़ने से सिकंदरा तहसील के दस व भोगनीपुर तहसील के 30 गांवों के लोगों के लिए मुसीबत बना है। पांच दिन बाद भी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। फसल नष्ट होने से किसान आर्थिक रूप से टूट गए हैं।
मेहनत व लागत बर्बाद होती देख किसानों की आंखें छलक रही हैं। सिकंदरा के महदेवा गांव में हालात अधिक खराब हैं। गांव चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरा है। यहां के बलराम, महेंद्र पाल, कैलाश, जितेंद्र सिंह आदि किसानों ने बताया कि बीहड़ में किसानों की आजीविका खेती पर आधारित है। फसल डूबने से तगड़ी चोट मिली है। जबकि पशुओं के चारा का संकट भी गहरा गया है।
यमुना की बाढ़ से जनपद के 40 गांवों की 21 हजार आबादी सीधे प्रभावित हुई है। राजस्व अभिलेखों से फसलों के नुकसान का प्रारंभिक आंकड़ा जुटाया गया है, लेकिन पानी उतरने पर जमीनी सर्वे के बाद हकीकत सामने आएगी। फिलहाल 227 लाख रुपये के फसल नुकसान का अनुमान है। - जेपी गुप्ता, एडीएम वित्त एवं राजस्व

छतों पर रह रहे लोग, दूषित पानी से बना रहे खाना
राजपुर। यमुना पट्टी किनारे बसा महदेवा गांव पूरी तरह पानी से घिर गया है। इसके बाद भी लोग चोरी के डर से घर नहीं छोड़ रहे हैं। घर के भूतल में पानी भरा है लेकिन लोग छतों पर शरण लिए हैं। वहीं खाद्य सामग्री और गृहस्थी रख ली है। यहीं पर इस उम्मीद में समय बीता रहे हैं कि जल्द यमुना का जलस्तर कम हो। गांव में पानी भरने से हैंडपंपों से भी बालू युक्त पानी निकल रहा है। यह पीने योग्य नहीं है लेकिन लोग इसी को पीने व खाना बनाने में प्रयोग कर रहे है।
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