कानपुर: बेटी की चिता जल रही थी, पुलिस खुद को बचा रही थी, पिता से पुलिस ने जबरन कागज पर लगवाया था अंगूठा
फंस सकती है ककवन पुलिस
जिसमें लिखा था कि वह वर्तमान विवेचक की कार्रवाई से संतुष्ट हैं। इसलिए आगे भी वही विवेचना करें। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस किस हद तक विवेचना चाह रही है। यदि कोई और करेगा तो ककवन पुलिस भी फंस सकती है। पुलिस ने अक्तूबर में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की थी लेकिन दो महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। आखिर में पीड़ित परिवार को आशंका हो गई थी कि पुलिस आरोपियों से मिल गई है।
परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
29 नवंबर को उन्होंने आईजी रेंज प्रशांत कुमार से विवेचना गैर जनपद की पुलिस से कराने की मांग की थी। साथ ही पुलिस पर लेखपाल से छह लाख रुपये लेने का आरोप भी लगाया था। घाट पर ककवन एसओ ने पीड़िता के पिता से उस कागज पर अंगूठा लगवाया जिसमें विवेचना ट्रांसफर न करने की बात लिखी थी। एसओ ने इसलिए ऐसा किया ताकि आगे वह अपना बचाव कर सकें।
बेटी की मौत के बाद से पिता सदमे में हैं। वह किसी से कोई बातचीत नहीं कर रहे हैं। उनके बड़े भाई से विवेचना ट्रांसफर कराने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पुलिस जो कर रही है सही कर रही है। उसके बाद वह रोने लगे। शुरू से ही पीड़ित परिजन पुलिस के दबाव में है।
डीएनए कराने के लिए दी कोर्ट में अर्जी
पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने पीड़िता व नवजात का डीएनए सैंपल लिया था। गुरुवार को पुलिस ने कोर्ट में अर्जी देकर जेल भेजे गए आरोपियों करन व लेखपाल रंजीत का डीएनए जांच के लिए सैंपल लेने की अनुमति मांगी है। केस के विवेचक ककवन एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि डीएनए जांच आरोपी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य साबित होगी। अनुमति मिलते ही डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा।
वादी विवेचना बदलवाने के लिए स्वतंत्र है। उस पर किसी तरह का दबाव कोई नहीं डाल सकता। इस मामले की भी जांच कराई जाएगी। जो तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अजीत कुमार सिन्हा, एसपी आउटर