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Kanpur: फर्जी आरबीआई अफसर बनकर 95 लाख की साइबर ठगी, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर, जांच में जुटी पुलिस

Wed, 13 May 2026 11:36 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Wed, 13 May 2026 11:36 PM IST
सार

लेप्स इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा दिलाने के नाम पर आरोपी 10 साल तक जाल में फंसाए रहे। मामला नजीराबाद थाना क्षेत्र का है।

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Kanpur: Cyber Fraud of ₹95 Lakhs Committed by Posing as Fake RBI Official
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

नजीराबाद थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। खुद को आरबीआई का अधिकारी बताने वाले शातिर जालसाजों ने एक व्यक्ति को लेप्स इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने का झांसा देकर 95 लाख रुपये ठग लिए। हैरानी की बात यह है कि यह ठगी एक-दो महीने नहीं बल्कि 10 वर्षों तक चलती रही। पीड़ित ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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नवीननगर निवासी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि उन्होंने वर्ष 2008 से 2012 के बीच कई बीमा पॉलिसियां कराई थीं लेकिन किस्तें जमा न होने के कारण वे लेप्स हो गईं। बाद में पॉलिसी का पैसा वापस पाने की उम्मीद में उन्होंने जानकारी जुटाई तो पता चला कि लेप्स पॉलिसी का पैसा आरबीआई के पास भेजा जाता है। उन्होंने गूगल पर आरबीआई का हेल्पलाइन नंबर खोजा। फोन करने पर उनकी बात एक व्यक्ति से हुई जिसने खुद को पंकज सिंह बताते हुए आरबीआई का अधिकारी बताया।
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आरोपी ने उनसे ईमेल पर पॉलिसी की डिटेल, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक जानकारी मांगी। उन्होंने भरोसा कर सभी दस्तावेज भेज दिए। दस्तावेज भेजने के कुछ समय बाद ही उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से दो फरवरी 2017 को दो बार में 10 लाख रुपये और चार फरवरी 2017 को 1.14 लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित को न तो किसी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली और न ही मोबाइल पर कोई मैसेज आया। पीड़ित के अनुसार कुछ समय बाद दीपक ने फोन कर दावा किया कि लेप्स पॉलिसी और हैक हुए पैसे आरबीआई के नियंत्रण में हैं और उन्हें वापस दिलाने के लिए वह अधिकृत है।

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उसने आरबीआई के पैड पर कथित पत्र व्हाट्सएप पर भेजकर भरोसा भी दिलाया। फिर अलग-अलग शुल्क, कोड चार्ज, फाइल एक्टिवेशन और समय बढ़ाने के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। पीड़ित के अनुसार वर्ष 2021 से अब तक वह लगभग 95 लाख रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में जमा कर चुके हैं। बावजूद इसके न तो पैसा वापस मिला और न ही भुगतान प्रक्रिया पूरी हुई। अब भी आरोपियों द्वारा एक लाख रुपये और जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है।

आरोप है कि दीपक सिंह, पंकज सिंह और उनके साथियों ने सुनियोजित तरीके से ऑनलाइन साइबर फ्रॉड और धोखाधड़ी किया है। नजीराबाद थाना प्रभारी पवन सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ई-मेल आईडी के जरिये आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
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