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अंधेरगर्दी: आंकड़ों का खेल नहीं तो क्या, कोरोना जांच के 10 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं
Wed, 05 May 2021 11:20 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 05 May 2021 11:20 AM IST
सार
सिस्टम की इस नाकामी से कोरोना संक्रमित मरीजों की घटी संख्या आंकड़ों का खेल ही प्रतीत होती है। बाबूपुरवा निवासी युवती और किदवईनगर के युवक की तरह शहर के करीब एक हजार परिवार 10 दिन से जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ट्विटर
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विस्तार
ऑक्सीजन और बेड की किल्लत के बीच अब शहर के लोग कोरोना की जांच रिपोर्ट में लेटलतीफी से मरणासन्न हो रहे हैं। आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल देने के 10 दिन बाद भी पता नहीं है कि वे कोरोना संक्रमित हैं या नहीं। मुसीबत तो यह है कि बिना जांच रिपोर्ट के डॉक्टरों ने इलाज करने से इनकार कर दिया है।
ऐसे में वे मेडिकल स्टोर से अंदाजे से दवा लेकर खा रहे हैं। सिस्टम की इस नाकामी से कोरोना संक्रमित मरीजों की घटी संख्या आंकड़ों का खेल ही प्रतीत होती है। बाबूपुरवा निवासी युवती और किदवईनगर के युवक की तरह शहर के करीब एक हजार परिवार 10 दिन से जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं।
सभी ने शहर के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। किदवईनगर के नगरीय स्वास्थ्य केंद्र सैंपल कलेक्शन सेंटर की हालत सबसे खराब है। यहां 26 अप्रैल को आरटीपीसीआर जांच के लिए 50 सैंपल लिए गए थे। नौ दिन बाद भी इनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई।
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रोजाना लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगाकर यह पता करने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर उनके सैंपल का क्या हुआ? इस बीच इलाज न मिलने से कई मरीजों की हालत गंभीर हो चली है। किसी की मौत भी हो गई हो तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, शहर के छोटे-बड़े अस्पतालों में इलाज मिलना मुश्किल है ही, झोलाछाप भी बिना जांच रिपोर्ट के हाथ नहीं लगा रहे हैं।
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ऐसे में वे मेडिकल स्टोर से अंदाजे से दवा लेकर खा रहे हैं। सिस्टम की इस नाकामी से कोरोना संक्रमित मरीजों की घटी संख्या आंकड़ों का खेल ही प्रतीत होती है। बाबूपुरवा निवासी युवती और किदवईनगर के युवक की तरह शहर के करीब एक हजार परिवार 10 दिन से जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं।
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सभी ने शहर के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। किदवईनगर के नगरीय स्वास्थ्य केंद्र सैंपल कलेक्शन सेंटर की हालत सबसे खराब है। यहां 26 अप्रैल को आरटीपीसीआर जांच के लिए 50 सैंपल लिए गए थे। नौ दिन बाद भी इनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई।
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रोजाना लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगाकर यह पता करने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर उनके सैंपल का क्या हुआ? इस बीच इलाज न मिलने से कई मरीजों की हालत गंभीर हो चली है। किसी की मौत भी हो गई हो तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, शहर के छोटे-बड़े अस्पतालों में इलाज मिलना मुश्किल है ही, झोलाछाप भी बिना जांच रिपोर्ट के हाथ नहीं लगा रहे हैं।
केस 1
कल्याणपुर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 22 अप्रैल बारासिरोही स्थित सरकारी अस्पताल में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था। तबीयत खराब होने पर उन्होंने कोरोना के संदेह में सैंपल दिया था। उनके मुताबिक, तीन मई की शाम तक रिपोर्ट नहीं आई थी। इससे पहले कई बार उन्होंने अस्पताल से संपर्क कर रिपोर्ट के बारे में पूछा पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर निजी लैब में जांच करा ली। रिपोर्ट निगेटिव आई।
केस 2
बाबूपुरवा निवासी बुखार और खांसी से पीड़ित युवती ने 26 अप्रैल को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किदवईनगर में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था। चार मई की दोपहर तक युवती की रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई थी। नौ दिन बीत गए, लेकिन युवती रिपोर्ट के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पा रही है। तीन दिन से वह स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगाकर पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिर उसकी जांच का क्या हुआ।
केस 3
किदवईनगर के एक युवक ने भी 27 अप्रैल को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किदवईनगर में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। पूरा परिवार खांसी, बुखार और बदन दर्द से पीड़ित है। इस परिवार को भी आठ दिन बाद तक यह पता नहीं चला है कि वे संक्रमित हैं या नहीं। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर अंदाजे से खा रहे हैं, क्योंकि डॉक्टरों ने बिना जांच रिपोर्ट के इलाज करने से इनकार कर दिया है। वह भी रिपोर्ट के लिए स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काट रहा है।
कल्याणपुर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 22 अप्रैल बारासिरोही स्थित सरकारी अस्पताल में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था। तबीयत खराब होने पर उन्होंने कोरोना के संदेह में सैंपल दिया था। उनके मुताबिक, तीन मई की शाम तक रिपोर्ट नहीं आई थी। इससे पहले कई बार उन्होंने अस्पताल से संपर्क कर रिपोर्ट के बारे में पूछा पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर निजी लैब में जांच करा ली। रिपोर्ट निगेटिव आई।
केस 2
बाबूपुरवा निवासी बुखार और खांसी से पीड़ित युवती ने 26 अप्रैल को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किदवईनगर में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था। चार मई की दोपहर तक युवती की रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई थी। नौ दिन बीत गए, लेकिन युवती रिपोर्ट के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पा रही है। तीन दिन से वह स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगाकर पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिर उसकी जांच का क्या हुआ।
केस 3
किदवईनगर के एक युवक ने भी 27 अप्रैल को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किदवईनगर में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। पूरा परिवार खांसी, बुखार और बदन दर्द से पीड़ित है। इस परिवार को भी आठ दिन बाद तक यह पता नहीं चला है कि वे संक्रमित हैं या नहीं। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर अंदाजे से खा रहे हैं, क्योंकि डॉक्टरों ने बिना जांच रिपोर्ट के इलाज करने से इनकार कर दिया है। वह भी रिपोर्ट के लिए स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काट रहा है।
बाद में लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट आ गई
जागेश्वर अस्पताल, गोविंदनगर में जिन लोगों ने 30 अप्रैल को सैंपल दिया, उनकी जांच रिपोर्ट तीन मई तक आ गई। लेकिन, अन्य केंद्रों में जिन लोगों ने 25 से 28 के बीच सैंपल दिया, उनमें से कई की रिपोर्ट पोर्टल पर चार मई तक अपडेट नहीं हुई। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी इसमें भी भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं।
संक्रमित मरीजों की संख्या कम दिखाने का खेल तो नहीं
जांचों को लेकर जो हालात बताए जा रहे हैं, उससे आशंका है कि संक्रमित मरीजों की संख्या कम दिखाने के लिए यह खेल किया जा रहा है। दरअसल जिस व्यक्ति ने सैंपल दिया, उसके अलावा किसी को नहीं पता होता कि उसकी रिपोर्ट आई या नहीं? जिसकी नहीं आती, वो कुछ दिन बाद फिर से जांच करा लेता है। इसमें निगेटिव आने पर आंकड़ा जारी कर दिया जाता है और पॉजिटिव का रोक लिया जाता है। ऐसा भी हो सकता है कि रिपोर्ट आगेपीछे जारी की जा रही है, ताकि आंकड़े भयावह न लगें।
26 अप्रैल को जितने भी सैंपल जांच के लिए भेजे गए, उनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई है। हमारा काम सैंपल लेकर उसे उर्सला तक पहुंचा देना होता है। सैंपल जिस दिन लिया जाता है, उसी दिन शाम तक उर्सला में रिसीव करा दिया जाता है। - डॉ. जया, प्रभारी नगरीय स्वास्थ्य केंद्र किदवईनगर
कोविड लैब के प्रभारी और कर्मचारी भी संक्रमित हैं। दूसरे स्टाफ से जांचें कराई जा रही हैं। इससे समय पर न तो जांचें हो पा रही हैं और न ही डाटा फीड हो पा रहा है। रोजाना करीब तीन हजार सैंपल की रिपोर्ट जारी कर रहे हैं, लेकिन सैंपल पांच हजार से ज्यादा आ रहे हैं।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
जागेश्वर अस्पताल, गोविंदनगर में जिन लोगों ने 30 अप्रैल को सैंपल दिया, उनकी जांच रिपोर्ट तीन मई तक आ गई। लेकिन, अन्य केंद्रों में जिन लोगों ने 25 से 28 के बीच सैंपल दिया, उनमें से कई की रिपोर्ट पोर्टल पर चार मई तक अपडेट नहीं हुई। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी इसमें भी भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं।
संक्रमित मरीजों की संख्या कम दिखाने का खेल तो नहीं
जांचों को लेकर जो हालात बताए जा रहे हैं, उससे आशंका है कि संक्रमित मरीजों की संख्या कम दिखाने के लिए यह खेल किया जा रहा है। दरअसल जिस व्यक्ति ने सैंपल दिया, उसके अलावा किसी को नहीं पता होता कि उसकी रिपोर्ट आई या नहीं? जिसकी नहीं आती, वो कुछ दिन बाद फिर से जांच करा लेता है। इसमें निगेटिव आने पर आंकड़ा जारी कर दिया जाता है और पॉजिटिव का रोक लिया जाता है। ऐसा भी हो सकता है कि रिपोर्ट आगेपीछे जारी की जा रही है, ताकि आंकड़े भयावह न लगें।
26 अप्रैल को जितने भी सैंपल जांच के लिए भेजे गए, उनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई है। हमारा काम सैंपल लेकर उसे उर्सला तक पहुंचा देना होता है। सैंपल जिस दिन लिया जाता है, उसी दिन शाम तक उर्सला में रिसीव करा दिया जाता है। - डॉ. जया, प्रभारी नगरीय स्वास्थ्य केंद्र किदवईनगर
कोविड लैब के प्रभारी और कर्मचारी भी संक्रमित हैं। दूसरे स्टाफ से जांचें कराई जा रही हैं। इससे समय पर न तो जांचें हो पा रही हैं और न ही डाटा फीड हो पा रहा है। रोजाना करीब तीन हजार सैंपल की रिपोर्ट जारी कर रहे हैं, लेकिन सैंपल पांच हजार से ज्यादा आ रहे हैं।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज