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मुसीबत: कानपुर में ब्लैक फंगस के पांच नए मरीज मिले, एक की हालत गंभीर, निकालनी पड़ सकती है आंख
Sat, 15 May 2021 08:52 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 15 May 2021 08:52 AM IST
सार
कानपुर में अब तक 55 से अधिक ब्लैक फंगस के रोगी मिल चुके हैं। इनमें से दो की मौत भी हो गई है।शुरुआती लक्षण पता चलते ही डॉक्टर को दिखाएं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना के संक्रमण से मुक्त होने के बाद पांच मरीजों में ब्लैक फंगस (म्यूकोर माइकोसिस) की पुष्टि हुई है। ये सभी फार्च्यून अस्पताल में भर्ती हैं। दो मरीज कानपुर तो तीन आसपास के जिलों के हैं। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है।
उसकी एक आंख निकालनी पड़ सकती है। शहर में अब तक 55 से अधिक ब्लैक फंगस के रोगी मिल चुके हैं। इनमें से दो की मौत भी हो गई है। फार्च्यून अस्पताल के डॉ. मनीष वर्मा ने बताया कि बिरहाना रोड निवासी मरीज की हालत नाजुक है। अन्य मरीजों की हालत स्थिर है।
इस बीमारी में दो तरह की एंटी फंगल दवाएं कारगर साबित हो रही हैं। ये महंगी हैं। कोरोना की तरह इस बीमारी का शुरुआत में ही इलाज शुरू होने से बचाव संभव है, यदि संक्रमण ब्रेन तक पहुंच गया तो मरीज की जान जा सकती है।
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यह वायरस भी हवा में है। इसकी गिरफ्त में वही लोग आते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। कोरोना के लंबे इलाज और स्टेरॉयड के इस्तेमाल से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। कोरोना के डायबिटिक मरीजों को इस बीमारी का सर्वाधिक खतरा है।
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उसकी एक आंख निकालनी पड़ सकती है। शहर में अब तक 55 से अधिक ब्लैक फंगस के रोगी मिल चुके हैं। इनमें से दो की मौत भी हो गई है। फार्च्यून अस्पताल के डॉ. मनीष वर्मा ने बताया कि बिरहाना रोड निवासी मरीज की हालत नाजुक है। अन्य मरीजों की हालत स्थिर है।
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इस बीमारी में दो तरह की एंटी फंगल दवाएं कारगर साबित हो रही हैं। ये महंगी हैं। कोरोना की तरह इस बीमारी का शुरुआत में ही इलाज शुरू होने से बचाव संभव है, यदि संक्रमण ब्रेन तक पहुंच गया तो मरीज की जान जा सकती है।
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यह वायरस भी हवा में है। इसकी गिरफ्त में वही लोग आते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। कोरोना के लंबे इलाज और स्टेरॉयड के इस्तेमाल से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। कोरोना के डायबिटिक मरीजों को इस बीमारी का सर्वाधिक खतरा है।
पांच डॉक्टरों का पैनल बनाया
डॉ. मनीष वर्मा ने बताया कि अस्पताल में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए पांच डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है। इसमें एक न्यूरो सर्जन, दो ईएनटी सर्जन, एक आई-सर्जन और एक फिजीशियन शामिल हैं। नेत्र सर्जन डॉ. संजीव रोहतगी ने बताया कि बिरहाना रोड वाले मरीज की आंख बचाने की कोशिश की जा रही है। नियमित रूप से ड्रेसिंग कर ब्लैक टिश्यू निकाले गए।
केस-1 - बिरहाना रोड निवासी 41 वर्षीय कोरोना विजेता की बायीं आंख में सूजन आने के बाद बंद हो गई। नाक से खून आने लगा। हालत बिगड़ते देख परिजनों ने फार्च्यून अस्पताल में भर्ती कराया, जहां एमआरआई कराने पर पता चला कि उन्हें ब्लैक फंगस है।
केस-2 - गोविंदनगर निवासी 61 वर्षीय मरीज की आंखों के आसपास कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के एक हफ्ते बाद चकत्ते पड़ गए। नाक से खून आने लगा। एक नर्सिंगहोम में डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस की आशंका जताई। इनका भी फॉर्च्यून अस्पताल में इलाज चल रहा है।
डॉ. मनीष वर्मा ने बताया कि अस्पताल में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए पांच डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है। इसमें एक न्यूरो सर्जन, दो ईएनटी सर्जन, एक आई-सर्जन और एक फिजीशियन शामिल हैं। नेत्र सर्जन डॉ. संजीव रोहतगी ने बताया कि बिरहाना रोड वाले मरीज की आंख बचाने की कोशिश की जा रही है। नियमित रूप से ड्रेसिंग कर ब्लैक टिश्यू निकाले गए।
केस-1 - बिरहाना रोड निवासी 41 वर्षीय कोरोना विजेता की बायीं आंख में सूजन आने के बाद बंद हो गई। नाक से खून आने लगा। हालत बिगड़ते देख परिजनों ने फार्च्यून अस्पताल में भर्ती कराया, जहां एमआरआई कराने पर पता चला कि उन्हें ब्लैक फंगस है।
केस-2 - गोविंदनगर निवासी 61 वर्षीय मरीज की आंखों के आसपास कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के एक हफ्ते बाद चकत्ते पड़ गए। नाक से खून आने लगा। एक नर्सिंगहोम में डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस की आशंका जताई। इनका भी फॉर्च्यून अस्पताल में इलाज चल रहा है।
केस-3 - उरई निवासी 63 वर्षीय मरीज को पिछले महीने कोरोना हुआ था। निजी चिकित्सालय में 10 दिन तक आईसीयू में भर्ती रहे। आठ दिन पहले आधे सिर और आधे चेहरे में दर्द होने लगा। नाक में पपड़ी जमी और बंद हो गई, फिर खून आने लगा। दूसरे दिन आंखें भी लाल होकर बंद होने लगीं। परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया।
केस-4 - लखनऊ निवासी 67 वर्षीय मरीज ने 10 दिन पहले ही कोरोना से जंग जीती थी। छह दिन पहले उनकी आंखें लाल हो गईं। डॉक्टर से पूछकर आई ड्रॉप डाला। आंखों में सूजन आने लगी। लखनऊ के तीन अस्पतालों में भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद यहां पर इलाज चल रहा है।
केस - 5 - औरैया निवासी 62 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना से जंग जीतने के बाद ब्लैक फंगस की गिरफ्त में आ गए। आंखों में सूजन आने के बाद फार्च्यून में भर्ती कराया गया। जांच के बाद ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। यहां करीब एक सप्ताह से भर्ती हैं।
डॉक्टरों की सलाह
शुरुआती लक्षण - माथे में दर्द, नाक बार-बार बंद होना, सिर में भारीपन।
संक्रमण बढ़ने पर - आंखों में लाली, सूजन, आंखों का मूवमेंट बंद होना।
संक्रमण बहुत बढ़ने पर - दिमाग में संक्रमण होने से हालत ज्यादा खराब।
केस-4 - लखनऊ निवासी 67 वर्षीय मरीज ने 10 दिन पहले ही कोरोना से जंग जीती थी। छह दिन पहले उनकी आंखें लाल हो गईं। डॉक्टर से पूछकर आई ड्रॉप डाला। आंखों में सूजन आने लगी। लखनऊ के तीन अस्पतालों में भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद यहां पर इलाज चल रहा है।
केस - 5 - औरैया निवासी 62 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना से जंग जीतने के बाद ब्लैक फंगस की गिरफ्त में आ गए। आंखों में सूजन आने के बाद फार्च्यून में भर्ती कराया गया। जांच के बाद ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। यहां करीब एक सप्ताह से भर्ती हैं।
डॉक्टरों की सलाह
शुरुआती लक्षण - माथे में दर्द, नाक बार-बार बंद होना, सिर में भारीपन।
संक्रमण बढ़ने पर - आंखों में लाली, सूजन, आंखों का मूवमेंट बंद होना।
संक्रमण बहुत बढ़ने पर - दिमाग में संक्रमण होने से हालत ज्यादा खराब।