न्याय: डीएम के पास रिश्वत का चेक लेकर पहुंचा फरियादी, चार घंटे में मिली रजिस्ट्री को मंजूरी, लगाया ये आरोप
Kanpur News: फरियादी नीरज गुप्ता ने बताया कि सात जून 2024 को मकान की रजिस्ट्री कराने के लिए एकल विंडो में आवेदन किया था। इसके बाद उन्होंने ओएसडी अजय कुमार से संपर्क किया और उन्हें पूरी बात बताई। इस पर अजय कुमार ने कहा कि हम पावर ऑफ अटार्नी नहीं मानते हैं, इसलिए आपकी रजिस्ट्री नहीं हो सकती।
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कानपुर में डीएम के जनता दर्शन में शुक्रवार को एक फरियादी ने केडीए अधिकारी पर रजिस्ट्री के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। रिश्वत के रूप में देने के लिए फरियादी 30 हजार रुपये का चेक भी लेकर आया था। उसने डीएम से कहा कि साहब, ये रिश्वत की चेक केडीए में दे दीजिए और हमारे मकान की रजिस्ट्री करा दीजिए। डीएम के पूछने पर उसने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री के लिए केडीए के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) अजय कुमार 30 हजार रुपये मांग रहे हैं।
डीएम ने केडीए उपाध्यक्ष को फोन कर मामले की जांच कराने के लिए कहा। दोपहर एक बजे हुई शिकायत के बाद ओएसडी ने आरोप नकारते हुए देर शाम पांच बजे रजिस्ट्री की मंजूरी दे दी। प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह जनता दर्शन में फरियादियों की समस्याएं सुन रहे थे। तभी फरियादी नीरज गुप्ता दोपहर एक बजे अपनी शिकायत लेकर डीएम के पास पहुंचे। बताया कि सोमनाथ उपाध्याय के नाम से एल-349 डबल स्टोरी बर्रा-6 में केडीए ने मकान आवंटित किया था।
हम पावर ऑफ अटार्नी नहीं मानते
सोमनाथ की 24 सितंबर 2011 को मृत्यु हो गई। फिर यह मकान सोमनाथ की पत्नी रेनू उपाध्याय, उनके तीन बेटों उपदेश, स्वतंत्र और स्वदेश के नाम हो गया। 7 जून 2024 को मकान की रजिस्ट्री कराने के लिए एकल विंडो में आवेदन किया था। इसके बाद उन्होंने ओएसडी अजय कुमार से संपर्क किया और उन्हें पूरी बात बताई। इस पर अजय कुमार ने कहा कि हम पावर ऑफ अटार्नी नहीं मानते हैं, इसलिए आपकी रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इसके बाद उन्होंने रजिस्ट्री कराने के लिए 30 हजार रुपये घूस मांगी।
चार घंटे बाद ही रजिस्ट्री के आदेश जारी हो गए
इस पर डीएम ने तुरंत ओएसडी अजय कुमार से बात की, तो उन्होंने नीरज गुप्ता के नाम की फाइल कार्यालय में आने से इन्कार कर दिया। उन्होंने आरोपों को निराधार बताया। इस पर डीएम ने जांच के लिए केडीए उपाध्यक्ष को शिकायती पत्र भेज दिया। केडीए वीसी ने जांच कराने की बात कही। हालांकि देर शाम पांच बजे नीरज की फाइल केडीए में मिल गई और चार घंटे बाद ही उनकी रजिस्ट्री के आदेश भी जारी हो गए।
डीएम से शिकायत के बाद मैंने जांच कराई। फाइल हमारे पास नहीं आई थी, बल्कि सह प्रभारी संदीप मोदनवाल ने बाबू को मार्क की थी। बाद में संदीप का स्थानांतरण जोन-4 में हो गया, तब से बाबू के पास ही फाइल थी। मंगाकर स्वीकृति दे दी है। मुझ पर बेबुनियादी आरोप लगाए हैं। -अजय प्रताप सिंह, विशेष कार्याधिकारी, जोन- 3, केडीए