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इंसानियत: CHC स्टॉफ ने थाम लीं नवजात की टूटती सांसें, 32 हजार रुपये चंदा जुटाकर कराया था इलाज, पढ़ें पूरा मामला

Thu, 18 Sep 2025 12:28 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 18 Sep 2025 12:28 PM IST
सार

Kanpur News: डॉ. तिवारी ने बताया मरणासन्न बच्चे को बचाना बेहद कठिन था लेकिन स्टाॅफ की एकता से नवजात को नया जीवन दिया जा सका। निजी हॉस्पिटल में डॉ. दिनेश भदौरिया ने भी एक दिन का इलाज खर्च माफ कर दिया।

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Kanpur CHC staff held the newborns dying breath collected 32000 rupees in donations to pay for the treatment
भीतरगांव सीएचसी में नवजात के साथ दंपति व चिकित्साधीक्षक डॉ. मनीष तिवारी - फोटो : amar ujala

विस्तार

डॉक्टरों को धरती का भगवान यूं ही नहीं कहा जाता है। नवजात की टूटतीं सांसों की डोर को बचाने के लिए सीएचसी के डॉक्टरों ने उसे हैलट रेफर किया। हैलट में बेड खाली न होने पर उसे केजीएमयू रेफर किया गया। इस बीच उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों और सीएचसी स्टाफ ने मिलकर 32 हजार जुटाए और उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

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मडेपुर गांव निवासी राजेश की पत्नी अनीता का नौ सितंबर को भीतरगांव सीएचसी में डाॅ. प्रमिला पार्या और स्टॉफ नर्स मनुजा सचान ने दोपहर तीन बजे ऑपरेशन से प्रसव कराया। नवजात बेटे का वजन मात्र एक किलो 80 ग्राम था। बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परीक्षण में बच्चा श्वांस संकट सिंड्रोम से वह ग्रसित मिला। उसे हैलट रेफर किया गया। वहां डॉक्टर बेड खाली न होने की बात कहकर लखनऊ केजीएमयू रेफर करने लगे।

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स्वस्थ होने पर बच्चे को डिस्चार्ज किया
इस बीच बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उसका लखनऊ पहुंचना जोखिम भरा दिख रहा था। चिकित्साधीक्षक डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि डॉक्टरों और स्टाफ ने तुरंत मिलकर 32 हजार रुपये इकट्ठा किए। मासूम की जिंदगी बचाने के लिए निजी हॉस्पिटल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकों ने ऑक्सीजन पर रखकर सपोर्टिव ट्रीटमेंट देना शुरू किया। चौथे दिन बच्चे की स्थिति में सुधार दिखा। पांचवें दिन स्वस्थ होने पर बच्चे को डिस्चार्ज किया गया।

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