कानपुर: भ्रष्टाचार में फंसे अफसरों के परिजनों की संपत्तियां भी जांची जाएंगी, शासन को भेजी जा रही है रिपोर्ट
Kanpur News: कानपुर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए अब भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की विजिलेंस जांच कराई जाएगी। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर गठित एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिसके तहत मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी, कई लिपिकों और आउटसोर्सिंग एजेंसी संचालकों के साथ-साथ उनके परिजनों और नाते-रिश्तेदारों की चल-अचल संपत्तियों की भी जांच की जाएगी।
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कानपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की विजिलेंस जांच कराई जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है जो भी अफसर-कर्मी भ्रष्टाचार में संलिप्त मिले, उनके परिवार के सदस्यों और नाते-रिश्तेदारों की चल-अचल संपत्तियों की जांच भी कराई जाएगी। इसके लिए रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है, ताकि विजिलेंस जांच शुरू कराई जा सके। किन लोगों के खिलाफ विजिलेंस की जांच होगी, फिलहाल इसका खुलासा पुलिस ने नहीं किया है।
पांच दिन पूर्व नगर आयुक्त ने भ्रष्ट ठेकेदारों की फर्में काली सूची में डालकर उनके खिलाफ फजलगंज और स्वरूपनगर थाने में छह एफआईआर दर्ज कराई थीं। इन ठेकेदारों पर फर्जीवाड़ा कर करोड़ों की कंपनियां चलाने का आरोप है। इसके बाद पुलिस आयुक्त के निर्देश पर एसआईटी गठित कर जांच शुरू की गई। जांच शुरू होते ही पुलिस के अफसरों-कर्मियों की शिकायतें आने लगीं। इनमें सबसे बड़ा नाम मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी का आया है। जैदी पर आरोप है कि उनके करीबियों के नाम पर नगर निगम में चार कंपनियों का संचालन किया जा रहा है।
रुपये लेकर की जाती है आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती
एसआईटी जैदी और उनसे जुड़ी कंपनियों की जांच कर रही है। इसके अलावा पुलिस को अब तक मिली शिकायतों में तीन लिपिकों पर भी खरीद-फरोख्त में घोटाले के आरोप लगे हैं। इनमें लिपिक रफजुल रहमान के अलावा मार्ग प्रकाश में कार्यरत कमरुद्दीन और मोहम्मद अरबिया अंसारी हैं। इसी तरह आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती के लिए जेटीएन नाम से एजेंसी चलाने वाले राजन शुक्ला की भी जांच की जा रही है। राजन पर आरोप है कि उसके माध्यम से रुपये लेकर आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती की जाती है।
सीपी ने एसआईटी के साथ की बैठक
विजिलेंस जांच कराने के लिए शनिवार दोपहर एसआईटी के साथ पुलिस कमिश्नर ने अपने कार्यालय पर बैठक की। इसमें अभी तक हुई जांच के बारे में जानकारी की गई। कितने अधिकारी और ठेकेदार और संदेह के घेरे में हैं, इस पर भी चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि माना जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट में आरोपी बनने वाले अधिकारियों के नाम ही विजिलेंस जांच के लिए भेजे जा सकते हैं। बैठक में डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव, एसआईटी प्रमुख एडीसीपी अर्चना व फजलगंज थाना प्रभारी मौजूद रहे।
दो बार नगर निगम पहुंची एसआईटी, मचा हड़कंप
शनिवार को दो बार एसआईटी टीम के नगर निगम पहुंचने से वहां हड़कंप मचा रहा। शाम को एसआईटी टीम सीधे इंजीनियर विभाग पहुंची। इससे चर्चा होने लगी कि एसआईटी ने विभाग को सील कर दिया है। हालांकि कुछ देर बाद ही एसआईटी अपने साथ विभाग के दस्तावेज लेकर लौट गई। सुबह भी एसआईटी जांच के लिए पहुंची थी।
नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सीएम के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में अगला कदम विजिलेंस जांच की ओर बढ़ाया जा रहा है। कुछ और नाम सामने आए हैं। उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। विजिलेंस जांच की अनुमति मिलते ही उनके नामों का भी खुलासा कर दिया जाएगा। -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
पुलिस के पास पहुंचीं तीन और शिकायतें
कर्मचारियों के नेता को मिले अफसर का बंगला
पुलिस के पास पहुंची पहली शिकायत में आरोप है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार को मनमाने तरीके से एक राजपत्रित अधिकारी के नाम पर बंगला आवंटित कर दिया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संघ के अध्यक्ष नगर निगम के भ्रष्ट अफसरों, ठेकेदारों और कुछ अनधिकृत लोगों के इशारे पर काम करते हुए कर्मचारियों का गलत इस्तेमाल करते हैं। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि आखिर किसके इशारे में कर्मचारियों के नेता को किसी अधिकारी के नाम आवंटित बंगला दे दिया गया।
धमकाने के लिए पार्षद को बनाया हथियार
पुलिस को मिली दूसरी शिकायत में बताया गया है कि पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन ने एक अनुसूचित जाति के पार्षद को अपना हथियार बना रखा है। एसोसिएशन के कर्ता-धर्ता इस पार्षद के माध्यम से ठेकेदारों और अधिकारियों को डराने का काम करते हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक अनुसूचित जाति के पार्षद की ओर ठेकेदारों को टेंडर डालने के लिए रोका जाता है और न मानने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ फर्जी एससी-एसटी की एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। इस तरह से एसोसिएशन टेंडर प्रक्रिया में अपना खौफ बनाकर सिर्फ चहेते ठेकेदारों को ही करोड़ों का काम दिलाती है।
करोड़ों से मशीनें खरीदीं पर इस्तेमाल नहीं
पुलिस ने बताया कि नगर निगम के खिलाफ मिली तीसरी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पिछले दो-तीन वर्षों में करोड़ों की मशीनों की खरीद की गई है, लेकिन उनका कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है। ये मशीन कौन-कौन सी हैं और कितने में कहां-कहां से खरीदी गई हैं। इसका पता किया जा रहा है। इसी तरह लाखों रुपयों से खेलकूद का सामान भी खरीदा गया है, लेकिन वह कहां है और उसका क्या इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भी किसी को नहीं पता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत गंभीर है। इस बारे में अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। इसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
तीनों शिकायतें गंभीर हैं। इसकी जांच के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। दोषी होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। -योगेश कुमार, स्टाफ अफसर एवं शिकायतों के जांचकर्ता