कानपुर: ‘अम्मा’ ने बढ़ाया किशोरियों का खून, 10 से 12 पर पहुंचा हीमोग्लोबिन, शिवराजपुर-चौबेपुर में दिखा असर
Kanpur News: कानपुर जिले में एनीमिया से जंग के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट अम्मा के बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। शिवराजपुर और चौबेपुर ब्लॉक के 20 गांवों में चलाए गए इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत गोद ली गईं 1,200 किशोरियों में से महज डेढ़ साल के भीतर 290 किशोरियों का हीमोग्लोबिन स्तर 10 से बढ़कर 12 ग्राम/डीएल तक पहुंच गया है।
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कानपुर जिले में एनीमिया (खून की कमी) के खिलाफ विशेष अभियानों के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। स्कूलों में अपनाए गए सरल उपायों से किशोरियों का खून खेल-खेल में बढ़ गया। स्वास्थ्य विभाग को प्रोजेक्ट अम्मा (एनीमिया मुक्त मदर्स एंड एडोलसेंट) से महज डेढ़ साल में 290 किशोरियों का हीमोग्लोबिन 10 से 12 पर पहुंच गया है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, जिले की करीब 63 प्रतिशत किशोरियों और 52 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई गई थी। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार के एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत कई नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नेशनल हेल्थ मिशन यूपी के साथ मिलकर अमेरिकी संस्था विटामिन एंजल्स और कानपुर ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी ने प्रोजेक्ट अम्मा की शुरुआत 2025 में की।
अब 12 पर पहुंच गया है हीमोग्लोबिन
जिले के शिवराजपुर और चौबेपुर ब्लॉक के 10-10 गांवों में यह पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर प्रतीक तिवारी के अनुसार, इस अभियान के तहत 20 गांवों की 1,200 किशोरियों को गोद लिया गया है। इनमें 790 ज्यादा एनीमिक थीं। सभी का हीमोग्लोबिन 10 से कम था। अभी चार गांवों के 290 किशोरियों की रिपोर्ट आई है, जिसमें इनका हीमोग्लोबिन अब 12 पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर वर्ष तीन प्रतिशत एनीमिया कम हो। उसके अनुसार रिपोर्ट ज्यादा बेहतर है।
किशोरियों को खानपान के प्रति जागरूक भी करते हैं
उन्होंने बताया कि दिसंबर तक सभी 20 गांवों की सभी किशोरियों की रिपोर्ट आ जाएगी। प्रोजेक्ट के तहत 85 गर्भवती महिलाओं को भी जागरूक किया जा रहा है। कानपुर ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा ने बताया कि किशोरियों में एनीमिया को दूर करने के लिए यह प्रोजेक्ट चलाया गया था। अब इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। हम लोग समय-समय पर जाकर किशोरियों को खानपान के प्रति जागरूक भी करते रहते हैं।
शक्तिवार और आयरन की मीठी गोली का जादू
बच्चों में दवा के प्रति अरुचि दूर करने के लिए प्रोजेक्ट के तहत दो बड़े व्यावहारिक बदलाव किए गए। स्कूलों में हर शनिवार को शक्तिवार के रूप में मनाया जाने लगा और आयरन-फोलिक एसिड की दवा को आयरन की मीठी गोली नाम दिया गया। पहले जिस दवा को किशोरियां फेंक देती थीं। अब मनोरंजक गतिविधियों और शक्ति मिले, बुद्धि मिले और बने दमदार...आयरन की मीठी गोली खानी हर शनिवार जैसे प्रेरणादायी शक्तिमंत्रों के कारण खुशी-खुशी मांगकर खा रही हैं।