Kanpur: सीएसजेएमयू के सामने बनेगा एक स्टेशन, नाम होगा अटलजी, मंजूरी मिलते ही काम होगा शुरू
सीएसजेएम यूनिवर्सिटी के सामने प्रस्तावित रेलवे स्टेशन को ही योजना में शामिल किया गया है। इस स्टेशन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के नाम पर रखा जाएगा। इस पर सर्वसहमति बन गई। एलिवेटेड ट्रैक पर लगभग 1200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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कानपुर में अनवरगंज-मंधना रेलवे लाइन की 18 क्रॉसिंग की वजह से जीटी रोड पर लगने वाले जाम से निजात के लिए पूर्वोत्तर रेलवे की संशोधित डीपीआर के बाद आईआईटी और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में नए रेलवे स्टेशन बनाए जाने की संभावना खारिज कर दी गई। मंडलायुक्त कार्यालय में रविवार को सांसद देवेंद्र सिंह भोले, सत्यदेव पचौरी और विधायकों की बैठक में रेलवे अफसरों ने इस प्रस्ताव को असंभव बताया।
इसके बाद पहले की तरह सीएसजेएम यूनिवर्सिटी के सामने प्रस्तावित रेलवे स्टेशन को ही योजना में शामिल किया गया है। इस स्टेशन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के नाम पर रखा जाएगा। इस पर सर्वसहमति बन गई। एलिवेटेड ट्रैक पर लगभग 1200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 10 दिन बाद यह डीपीआर अब दोबारा रेलवे बोर्ड को भेज दी जाएगी।
रेलवे ने अक्तूबर में परियोजना की डीपीआर बनाकर भेज दी थी। अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने बोर्ड में प्रस्ताव दिया कि यूनिवर्सिटी के सामने प्रस्तावित नए रेलवे स्टेशन के बजाय मेडिकल कॉलेज और आईआईटी के पास रेलवे स्टेशन बनाया जाए। बोर्ड ने उनके प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने को कहा।
इस संबंध में रविवार को मंडलायुक्त के साथ हुई बैठक में मंथन किया गया। इसमें पाया गया कि न तो दो नए स्टेशन बनाए जाने की जरूरत है और न ही ऐसा संभव होगा। पहली डीपीआर की तरह रावतपुर, कल्याणपुर रेलवे स्टेशन को खत्म करते हुए नया यूनिवर्सिटी स्टेशन को अटल बिहारी बाजपेई के नाम पर कर दिया जाए।
वहीं, बैठक में जरीब चौकी से आईआईटी तक एलिवेटेड ट्रैक की डीपीआर का रिव्यू किया गया। अपर मंडल रेल प्रबंधक विवेक कुमार गुप्त ने बताया कि पखवारे भीतर बैठक में हुए फैसलों को डीपीआर में जोड़कर इसे भेज दिया जाएगा। उम्मीद है कि 25 दिसंबर तक डीपीआर स्वीकृत हो जाए। बैठक में पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजीव कुमार, बरेली के एडीआरएम विवेक कुमार, विधायक सुरेंद्र मैथानी, नीलिमा कटियार, अभिजीत सिंह सांगा, अरुण पाठक मौजूद रहे।
रेलवे ने बदली थी डिजाइन तो कम हुई लागत
पूर्वोत्तर रेलवे ने इस प्रोजेक्ट की डिजाइन बदलकर लागत करीब 800 करोड़ रुपये कम कर दी है। डीपीआर पहले करीब 1972 करोड़ रुपये में बनी थी, अब इसे 1200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। ट्रैक जरीब चौकी से आईआईटी के आगे तक 14 रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर ही बनेगा, लेकिन अब इसे वायडक्ट (क्रॉसिंग से गुजरने के लिए सुरंगी रास्ता) के बजाय खंभों पर खड़ा किया जाएगा। पहले डबल ट्रैक बनाया जाना प्रस्तावित था लेकिन अब यह सिंगल एलिवेटेड ट्रैक ही बनाया जाएगा।