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Kanpur: एक हफ्ते में इंफ्लुइंजा के 70 रोगी हैलट में भर्ती, गुर्दों और लिवर पर आ जाता है असर
Mon, 15 Apr 2024 08:51 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 15 Apr 2024 08:51 PM IST
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हैलट अस्पताल
- फोटो : सोशल मीडिया
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कानपुर में हैलट ओपीडी और इमरजेंसी में इंफ्लुइंजा संक्रमण के रोगी सांस फुलाते हुए आ रहे हैं। इस वायरल संक्रमण ग्रसित 70 रोगियों को हैलट इमरजेंसी में गंभीर हालत में भर्ती किया गया। संक्रमण के बाद रोगियों को निमोनिया हो जा रहा है जिसके बाद वे मल्टी आर्गन फेल्योर में चले रहे हैं। रोगियों को आक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ रहा है। सांस तंत्र के अलावा रोगियों के गुर्दों और लिवर दोनों पर असर आ रहा है।
कुछ रोगियों को बेहोशी की हालत में भर्ती किया और कुछ रोगी लो ब्लड प्रेशर की स्टेज में भर्ती हुए। इंफ्लुइंजा वायरस का यह संक्रमण विशेषज्ञों को चिंता में डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक सप्ताह से निमोनिया के रोगियों की संख्या अधिक बढ़ी है। रोगी सेप्टीसीमिया में चले जाते हैं। शरीर में संक्रमण फैल जाता है और दूसरे अंदरुनी अंग प्रभावित होने लगते हैं। ब्लड प्रेशर बहुत अधिक नीचे गिरने पर रोगी को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ जाती है।
ज्यादातर रोगियों को आक्सीजन सपोर्ट देना पड़ता है। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सोमवार शाम तक 35 रोगी गंभीर हालत में भर्ती किए गए। इनमें कुछ बेहोशी की हालत में आए। कुछ ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहा था। बीपी जांच मशीन में यह नहीं आया। फेफड़ों में निमोनिया होने पर रोगी को सांस में दिक्कत होती है। इससे शरीर में आक्सीजन की मात्रा घट जाती है।
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कुछ रोगियों को बेहोशी की हालत में भर्ती किया और कुछ रोगी लो ब्लड प्रेशर की स्टेज में भर्ती हुए। इंफ्लुइंजा वायरस का यह संक्रमण विशेषज्ञों को चिंता में डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक सप्ताह से निमोनिया के रोगियों की संख्या अधिक बढ़ी है। रोगी सेप्टीसीमिया में चले जाते हैं। शरीर में संक्रमण फैल जाता है और दूसरे अंदरुनी अंग प्रभावित होने लगते हैं। ब्लड प्रेशर बहुत अधिक नीचे गिरने पर रोगी को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ जाती है।
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ज्यादातर रोगियों को आक्सीजन सपोर्ट देना पड़ता है। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सोमवार शाम तक 35 रोगी गंभीर हालत में भर्ती किए गए। इनमें कुछ बेहोशी की हालत में आए। कुछ ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहा था। बीपी जांच मशीन में यह नहीं आया। फेफड़ों में निमोनिया होने पर रोगी को सांस में दिक्कत होती है। इससे शरीर में आक्सीजन की मात्रा घट जाती है।
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