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Kannauj: आवारा गोवंश की तस्करी करने वाले आठ गिरफ्तार, गिरोह में दो महिलाएं भी शामिल
Tue, 11 Jun 2024 11:12 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 11 Jun 2024 11:12 PM IST
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पुलिस हिरासत में गोवंश तस्कर
- फोटो : अमर उजाला
कन्नौज जिले में तालग्राम थाना क्षेत्र के बिसमा गांव के पास से पुलिस ने डेरा जमाए घुमंतू जाति के आठ गोवंश तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके डेरे से 34 गोवंश बरामद किए हैं। इन्हें गोशाला भेजा गया है। वहीं, दो मृत मिले गोवंशों को दफना दिया गया। थाना प्रभारी पारुल चौधरी ने बताया कि राजस्थान के झुंझनू के थाना चिड़वा निवासी हीरा सिंह, उसकी पत्नी रेखा, दीवान के बूंदी थाना डाबी गांव सुतड़ा निवासी मोहर सिंह, राजस्थान के भीलवाड़ा थाना परौली गांव भगवानपुरा निवासी बिरमा, मैनपुरी शिकंदरपुर लक्खी, थाना तालग्राम नीरज कोल्ड स्टोरेज के सामने रहने वाजे यूनिस और सुलेमान को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार तस्करों के बिसमा गांव के पास के डेरे से गोवंश बरामद किए गए हैं। पकड़े गए तस्करों में हीरा सिंह, मोहर सिंह, यूनिस, सुलेमान शातिर अपराधी हैं। आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि कई बार किसान खेतों में घुसे आवारा गोवंशों को खुद ही पकड़कर उनके हवाले कर देते हैं और इसके बदले में उन्हें कुछ देना भी नहीं पड़ता। इसके अलावा वे लोग खुद भी क्षेत्र में घूमकर आवारा गोवंशों को पकड़कर अपने डेरे में एकत्र करते हैं। जब बड़ी संख्या में आवारा गोवंश उनके पास हो जाते हैं तो व्यापारियों को बुलवाकर इन्हें उनके सुपुर्द कर दिया जाता है। तस्करों ने बताया कि गोवंश लेने आने वाला व्यापारी मवेशियों को ले जाने के लिए कंटेनर या डीसीएम की खुद ही व्यवस्था करता है। एक कंटेनर या डीसीएम भरकर मवेशियों को ले जाने पर गिरोह के प्रत्येक सदस्य को पांच-पांच हजार रुपये मिलते हैं।
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पुलिस के अनुसार तस्करों के बिसमा गांव के पास के डेरे से गोवंश बरामद किए गए हैं। पकड़े गए तस्करों में हीरा सिंह, मोहर सिंह, यूनिस, सुलेमान शातिर अपराधी हैं। आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि कई बार किसान खेतों में घुसे आवारा गोवंशों को खुद ही पकड़कर उनके हवाले कर देते हैं और इसके बदले में उन्हें कुछ देना भी नहीं पड़ता। इसके अलावा वे लोग खुद भी क्षेत्र में घूमकर आवारा गोवंशों को पकड़कर अपने डेरे में एकत्र करते हैं। जब बड़ी संख्या में आवारा गोवंश उनके पास हो जाते हैं तो व्यापारियों को बुलवाकर इन्हें उनके सुपुर्द कर दिया जाता है। तस्करों ने बताया कि गोवंश लेने आने वाला व्यापारी मवेशियों को ले जाने के लिए कंटेनर या डीसीएम की खुद ही व्यवस्था करता है। एक कंटेनर या डीसीएम भरकर मवेशियों को ले जाने पर गिरोह के प्रत्येक सदस्य को पांच-पांच हजार रुपये मिलते हैं।
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