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ज्योति हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, जल्द आ सकता है फैसला
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कानपुर। ज्योति हत्याकांड में सजा काट रहे उनके पति पीयूष समेत तीन दोषियों की सजा के खिलाफ अपील और हाईकोर्ट द्वारा दोषमुक्त की गई मनीषा मखीजा की सजा बरकरार रखने के संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल की गई अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। 19 जून तक लिखित बहस दाखिल करने का समय दिया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है।
बिस्कुट व्यापारी पीयूष श्यामदासानी की पत्नी ज्योति की 27 जुलाई 2014 को हत्या कर दी गई थी। सेशन कोर्ट ने 20 अक्तूबर 2022 को सभी छह दोषियों पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, अवधेश चतुर्वेदी, रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया, सोनू कश्यप और आशीष कश्यप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी जिसमें 29 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने पांच दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया और सोनू कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मनीषा मखीजा को बरी किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपीलों की एक साथ सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। हालांकि, अगर कोई पक्ष लिखित बहस दाखिल करना चाहे तो उसके लिए 19 जून तक का समय भी दिया गया है।
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बिस्कुट व्यापारी पीयूष श्यामदासानी की पत्नी ज्योति की 27 जुलाई 2014 को हत्या कर दी गई थी। सेशन कोर्ट ने 20 अक्तूबर 2022 को सभी छह दोषियों पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, अवधेश चतुर्वेदी, रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया, सोनू कश्यप और आशीष कश्यप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी जिसमें 29 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने पांच दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
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हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया और सोनू कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मनीषा मखीजा को बरी किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपीलों की एक साथ सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। हालांकि, अगर कोई पक्ष लिखित बहस दाखिल करना चाहे तो उसके लिए 19 जून तक का समय भी दिया गया है।
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