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वॉशरूम में लहूलुहान मिली जूनियर डॉक्टर, 24 घंटे रहती है जेआर-1 की ड्यूटी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 14 Jun 2018 08:11 AM IST
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शीशे से टकराकर घायल हुई जूनियर डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुरः अपर इंडिया जच्चा-बच्चा अस्पताल के वॉशरूम में जूनियर डॉक्टर येप्पी लहूलुहान हालत में मिलीं। उनके दाहिने हाथ की हथेली से कलाई तक सात सेंटीमीटर लंबा घाव हुआ। उन्हें तुरंत इमरजेंसी ले जाया गया, जहां टांके लगाए गए। हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। चर्चा है कि रैगिंग, काम के दवाब में उन्होंने ऐसा किया, जबकि विभागाध्यक्ष और खुद जूनियर डॉक्टर ने इससे इनकार किया।
मेडिकल कालेज से संबद्ध अपर इंडिया जच्चा बच्चा अस्पताल के वार्ड नंबर - 1 के वॉशरूम में सुबह खिड़की में लगा शीशा टूटने की आवाज आई। आवाज सुनकर वार्ड में तैनात कर्मचारी वॉशरूम के बाहर पहुंचा और आवाज दीं। कई आवाजें देने के बावजूद प्रतिउत्तर न मिलने और दरवाजा न खुलने पर उसने धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया।
वॉशरूम में प्रथम वर्ष की जूनियर डॉक्टर (जेआर-1) येप्पी (27) लहूलुहान पड़ी थीं। उनके दाहिने हाथ से खून बह रहा रहा था। मेडिकल कालेज के स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. किरन पांडेय ने हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरसी गुप्ता से बात कर उन्हें तुरंत हैलट इमरजेंसी भेजा।
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मेडिकल कालेज से संबद्ध अपर इंडिया जच्चा बच्चा अस्पताल के वार्ड नंबर - 1 के वॉशरूम में सुबह खिड़की में लगा शीशा टूटने की आवाज आई। आवाज सुनकर वार्ड में तैनात कर्मचारी वॉशरूम के बाहर पहुंचा और आवाज दीं। कई आवाजें देने के बावजूद प्रतिउत्तर न मिलने और दरवाजा न खुलने पर उसने धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया।
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वॉशरूम में प्रथम वर्ष की जूनियर डॉक्टर (जेआर-1) येप्पी (27) लहूलुहान पड़ी थीं। उनके दाहिने हाथ से खून बह रहा रहा था। मेडिकल कालेज के स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. किरन पांडेय ने हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरसी गुप्ता से बात कर उन्हें तुरंत हैलट इमरजेंसी भेजा।
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शीशे से टकराकर घायल हुई जूनियर डॉक्टर की देखरेख करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी से सर्जरी विभाग के आपरेशन थियेटर में शिफ्ट किया गया, जहां हाथ में टांके लगाए। उनका डाक्टरी परीक्षण करने वाले डा. मयंक ने बताया कि येप्पी के दाहिने हाथ की हथेली से कलाई तक सात सेंटीमीटर लंबा घाव हो गया है। एक घंटे चले आपरेशन के बाद उन्हें पीओपी के प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया। विभागाध्यक्ष सहित अन्य डाक्टरों ने वार्ड में जाकर उनसे बातचीत की।
डा. येप्पी अरुणांचल प्रदेश निवासी टेको मार्गिन की बेटी हैं। चर्चा फैल गई कि येप्पी हिंदी ठीक से नहीं बोल पाती हैं। उनके साथ एक हफ्ते से सीनियर रैगिंग कर रहे थे। अस्पताल में दिन-रात काम भी करना पड़ रहा था। इससे वह परेशान थीं। सुबह एक मरीज के तीमारदारों से कहा-सुनी होने के बाद उन्होंने वॉशरूम में जाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। हालांकि विभागाध्यक्ष और स्वयं येप्पी ने रैगिंग और काम के दबाव से इनकार किया है।
24 घंटे रहती है जेआर-1 की ड्यूटी
मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पतालों में जेआर - 1 को दिन रात ड्यूटी करनी पड़ती है। वरिष्ठ डॉक्टर (फैकल्टी) सिर्फ राउंड करके चले जाते हैं। आमतौर पर जेआर-3 पढ़ाई और एग्जाम पर ज्यादा ध्यान देते हैं। जेआर-2 जेआर-1 पर ज्यादा जिम्मेदारी डालते हैं।
डा. येप्पी अरुणांचल प्रदेश निवासी टेको मार्गिन की बेटी हैं। चर्चा फैल गई कि येप्पी हिंदी ठीक से नहीं बोल पाती हैं। उनके साथ एक हफ्ते से सीनियर रैगिंग कर रहे थे। अस्पताल में दिन-रात काम भी करना पड़ रहा था। इससे वह परेशान थीं। सुबह एक मरीज के तीमारदारों से कहा-सुनी होने के बाद उन्होंने वॉशरूम में जाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। हालांकि विभागाध्यक्ष और स्वयं येप्पी ने रैगिंग और काम के दबाव से इनकार किया है।
24 घंटे रहती है जेआर-1 की ड्यूटी
मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पतालों में जेआर - 1 को दिन रात ड्यूटी करनी पड़ती है। वरिष्ठ डॉक्टर (फैकल्टी) सिर्फ राउंड करके चले जाते हैं। आमतौर पर जेआर-3 पढ़ाई और एग्जाम पर ज्यादा ध्यान देते हैं। जेआर-2 जेआर-1 पर ज्यादा जिम्मेदारी डालते हैं।