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अनियमितता पर न्यायिक तहसीलदार निलंबित
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 05 Jan 2015 03:03 AM IST
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मृत व्यक्ति को वादी बनाकर दाखिल किए गए मुकदमे में बिना अभिलेख देखे नामातंरण आदेश पारित करने और उच्च कोर्ट से निर्णीत मामले में भी सुनवाई करते हुए फैसला कर देने के मामले में शासन ने सदर तहसीलदार न्यायिक प्रेमचंद्र को निलंबित कर दिया है।
राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव का आदेश आते ही आनन-फानन में रविवार को छुट्टी के बावजूद जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के आदेश पर तहसील कर्मचारी ने न्यायिक तहसीलदार प्रेमचंद्र के घर जाकर ऑर्डर रिसीव करा दिया।
अमर उजाला ने ही ‘अंधा कानून, मुर्दे का जुनून’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मामले का खुलासा किया था। लेखपाल रमेश चंद्र कमल और चपरासी अकील को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। ग्राम बैरी अकबरपुर कछार निवासी शिव प्रसाद की मौत 2009 में हो गई थी।
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इसके बावजूद न्यायिक तहसीलदार सदर प्रेमचंद्र की कोर्ट ने वर्ष 2012 में मृतक शिव प्रसाद को पक्षकार (वादी) बनाकर दाखिल किए गए मुकदमे में बिना अभिलेख देखे लेखपाल द्वारा दर्ज कराए अनियमित बयान और चपरासी द्वारा की गई फर्जी तामीला के आधार पर नामातंरण आदेश पारित कर दिया था।
यह सब मे. कनवार हाउसिंग सोसाइटी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था।
इसी तरह न्यायिक तहसीलदार ने गंभीरपुर कछार, बगदौधी कछार के रामबेटी बनाम बाबूलाल के नामातंरण मुकदमे में आयुक्त और राजस्व परिषद से अंतिम निर्णय हो जाने के बाद पत्रावली में तिथियां और कटिंग करके तथा पिछली तिथियों में शपथपत्र लेते हुए नामातंरण आदेश पारित कर दिया था।
इस मुकदमे में तहसीलदार न्यायिक द्वारा दिनांक 11 मई 2001 की ऑर्डरशीट में लिखा था कि पक्ष उपस्थित आए। दिनांक 13 जून 2011 की ऑर्डरशीट में अंकित किया है कि आज पुकार मय अधिवक्ता उपस्थित आए।
राम आसरे की हत्या दिनांक 29 अप्रैल 2011 को ही कर दी गई थी फिर भी कोर्ट में राम आसरे को उपस्थित होना दर्शाया गया था। एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि इन दोनों मामलों में जिलाधिकारी ने जांच के बाद न्यायिक तहसीलदार के निलंबन की संस्तुति की थी।
इस पर राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव आलोक कुमार ने न्यायिक तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। डीएम के आदेश पर तहसीलदार सदर अनिल कुमार को ऑर्डर रिसीव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कहा था कि अगर न्यायिक तहसीलदार ऑर्डर रिसीव करने से इनकार करें तो उनके आवास पर चिपका दिया जाए।
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राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव का आदेश आते ही आनन-फानन में रविवार को छुट्टी के बावजूद जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के आदेश पर तहसील कर्मचारी ने न्यायिक तहसीलदार प्रेमचंद्र के घर जाकर ऑर्डर रिसीव करा दिया।
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अमर उजाला ने ही ‘अंधा कानून, मुर्दे का जुनून’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मामले का खुलासा किया था। लेखपाल रमेश चंद्र कमल और चपरासी अकील को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। ग्राम बैरी अकबरपुर कछार निवासी शिव प्रसाद की मौत 2009 में हो गई थी।
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इसके बावजूद न्यायिक तहसीलदार सदर प्रेमचंद्र की कोर्ट ने वर्ष 2012 में मृतक शिव प्रसाद को पक्षकार (वादी) बनाकर दाखिल किए गए मुकदमे में बिना अभिलेख देखे लेखपाल द्वारा दर्ज कराए अनियमित बयान और चपरासी द्वारा की गई फर्जी तामीला के आधार पर नामातंरण आदेश पारित कर दिया था।
यह सब मे. कनवार हाउसिंग सोसाइटी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था।
इसी तरह न्यायिक तहसीलदार ने गंभीरपुर कछार, बगदौधी कछार के रामबेटी बनाम बाबूलाल के नामातंरण मुकदमे में आयुक्त और राजस्व परिषद से अंतिम निर्णय हो जाने के बाद पत्रावली में तिथियां और कटिंग करके तथा पिछली तिथियों में शपथपत्र लेते हुए नामातंरण आदेश पारित कर दिया था।
इस मुकदमे में तहसीलदार न्यायिक द्वारा दिनांक 11 मई 2001 की ऑर्डरशीट में लिखा था कि पक्ष उपस्थित आए। दिनांक 13 जून 2011 की ऑर्डरशीट में अंकित किया है कि आज पुकार मय अधिवक्ता उपस्थित आए।
राम आसरे की हत्या दिनांक 29 अप्रैल 2011 को ही कर दी गई थी फिर भी कोर्ट में राम आसरे को उपस्थित होना दर्शाया गया था। एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि इन दोनों मामलों में जिलाधिकारी ने जांच के बाद न्यायिक तहसीलदार के निलंबन की संस्तुति की थी।
इस पर राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव आलोक कुमार ने न्यायिक तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। डीएम के आदेश पर तहसीलदार सदर अनिल कुमार को ऑर्डर रिसीव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कहा था कि अगर न्यायिक तहसीलदार ऑर्डर रिसीव करने से इनकार करें तो उनके आवास पर चिपका दिया जाए।