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झारखंडी बाबा: जहां जीवन भी बचा और शिवलिंग भी स्वयं प्रकट हुआ, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम
Sun, 13 Jul 2025 11:07 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 13 Jul 2025 11:07 PM IST
सार
फतेहपुर जिले का झारखंडी बाबा मंदिर आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है। शिवलिंग की पहचान में चौंकाने वाला रहस्य जुड़ा है।
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झारखंडी बाबा मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर-फतेहपुर सीमा पर स्थित मिराई गांव में सैकड़ों वर्षों से श्रद्धा, रहस्य और चमत्कार का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। गांव के बीच स्थित झारखंडी बाबा का मंदिर न केवल भक्तों की आस्था का केन्द्र है, बल्कि कई अविश्वसनीय घटनाओं का गवाह भी रहा है।
गाय अपने आप जाकर देती थी झाड़ियों में दूध
मंदिर से जुड़ी एक और अद्भुत कथा सामने आई है। मिराई खरौली व औंग निवासी श्रद्धालु बताते हैं कि वर्षों पहले एक व्यक्ति की गाय रहस्यमयी ढंग से प्रतिदिन कम दूध देने लगी। उसने इस पर नजर रखी तो देखा कि गाय खुद ही गांव के बाहर झाड़ियों में जाकर वहां किसी अदृश्य शक्ति को दूध देती थी और लौट आती थी। जब उसने झाड़ियों के भीतर जाकर देखा, तो वही पवित्र शिवलिंग प्रकट हुआ जिसे बाद में झारखंडी बाबा के नाम से पूजा जाने लगा।
आत्महत्या कर रहे व्यक्ति को शिव ने बचाया
मंदिर में तपस्वी संत कृष्ण दास बताते हैं कि एक बार ठाकुर बिरादरी का एक व्यक्ति जीवन से निराश होकर पास के बरगद के पेड़ पर आत्महत्या करने जा रहा था। तभी झाड़ियों के भीतर से आवाज आई — “आत्महत्या क्यों कर रहे हो? आओ मेरे पास।” जब उसने झांककर देखा, तो वहां एक प्राचीन शिवलिंग था। उसका जीवन बदल गया और उसी स्थान पर मंदिर की स्थापना हुई।
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स्वयंभू शिवलिंग, जिसकी लंबाई साल में एक बार चावल के इतना बढ़ जाती है
इस स्थान पर स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, और कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ रही है। यही कारण है कि मंदिर में आज तक छत नहीं डाली जा सकी — हर बार छत निर्माण का प्रयास असफल रहा।
शिवलिंग की खोज बनी आस्था का आधार
ग्रामीणों की मान्यता है कि यह स्थान हजारों वर्षों पुराना हो सकता है। चरवाहे गोपाल और आत्महत्या से बचाए गए व्यक्ति की कहानियां दर्शाती हैं कि इस स्थान पर कोई अदृश्य दिव्य शक्ति सदैव सक्रिय रही है।
अब बना है मंदिर ट्रस्ट, रुद्राभिषेक निशुल्क
हाल ही में श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसकी देखरेख में सावन माह में निशुल्क रुद्राभिषेक कराया जाता है। इसके अलावा साल भर हर सोमवार को रुद्राभिषेक का आयोजन होता है। मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी अब अनूप पांडे और शिवम पांडे निभा रहे हैं, जो भक्तिभाव से सेवा में समर्पित हैं।
सावन में लगता है विशाल मेला
सावन के सोमवार को यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं। मेला, भंडारा, भजन-कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। झारखंडी बाबा का यह मंदिर सिर्फ श्रद्धा का स्थान नहीं, बल्कि जीवन, चमत्कार और दिव्यता का अद्वितीय प्रतीक है। यहां हर भक्त की सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होती है।
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गाय अपने आप जाकर देती थी झाड़ियों में दूध
मंदिर से जुड़ी एक और अद्भुत कथा सामने आई है। मिराई खरौली व औंग निवासी श्रद्धालु बताते हैं कि वर्षों पहले एक व्यक्ति की गाय रहस्यमयी ढंग से प्रतिदिन कम दूध देने लगी। उसने इस पर नजर रखी तो देखा कि गाय खुद ही गांव के बाहर झाड़ियों में जाकर वहां किसी अदृश्य शक्ति को दूध देती थी और लौट आती थी। जब उसने झाड़ियों के भीतर जाकर देखा, तो वही पवित्र शिवलिंग प्रकट हुआ जिसे बाद में झारखंडी बाबा के नाम से पूजा जाने लगा।
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आत्महत्या कर रहे व्यक्ति को शिव ने बचाया
मंदिर में तपस्वी संत कृष्ण दास बताते हैं कि एक बार ठाकुर बिरादरी का एक व्यक्ति जीवन से निराश होकर पास के बरगद के पेड़ पर आत्महत्या करने जा रहा था। तभी झाड़ियों के भीतर से आवाज आई — “आत्महत्या क्यों कर रहे हो? आओ मेरे पास।” जब उसने झांककर देखा, तो वहां एक प्राचीन शिवलिंग था। उसका जीवन बदल गया और उसी स्थान पर मंदिर की स्थापना हुई।
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स्वयंभू शिवलिंग, जिसकी लंबाई साल में एक बार चावल के इतना बढ़ जाती है
इस स्थान पर स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, और कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ रही है। यही कारण है कि मंदिर में आज तक छत नहीं डाली जा सकी — हर बार छत निर्माण का प्रयास असफल रहा।
शिवलिंग की खोज बनी आस्था का आधार
ग्रामीणों की मान्यता है कि यह स्थान हजारों वर्षों पुराना हो सकता है। चरवाहे गोपाल और आत्महत्या से बचाए गए व्यक्ति की कहानियां दर्शाती हैं कि इस स्थान पर कोई अदृश्य दिव्य शक्ति सदैव सक्रिय रही है।
अब बना है मंदिर ट्रस्ट, रुद्राभिषेक निशुल्क
हाल ही में श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसकी देखरेख में सावन माह में निशुल्क रुद्राभिषेक कराया जाता है। इसके अलावा साल भर हर सोमवार को रुद्राभिषेक का आयोजन होता है। मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी अब अनूप पांडे और शिवम पांडे निभा रहे हैं, जो भक्तिभाव से सेवा में समर्पित हैं।
सावन में लगता है विशाल मेला
सावन के सोमवार को यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं। मेला, भंडारा, भजन-कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। झारखंडी बाबा का यह मंदिर सिर्फ श्रद्धा का स्थान नहीं, बल्कि जीवन, चमत्कार और दिव्यता का अद्वितीय प्रतीक है। यहां हर भक्त की सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होती है।