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जुलूस-ए-मोहम्मदी देगा अमन का पैगाम, जमीयत उलेमा बोले अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसल का करें सम्मान
Fri, 08 Nov 2019 12:51 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 08 Nov 2019 12:51 PM IST
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने प्रेस क्लब में वार्ता की
- फोटो : अमर उजाला
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पैगंबर-ए-इस्लाम की यौम-ए-पैदाइश पर 10 नवंबर को जुलूस-ए-मोहम्मदी निकलेगा। इसमें अमन का पैगाम दिया जाएगा। जुलूस की अगुवाई करने वाली वाली जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने प्रेस क्लब में वार्ता की।
इसमें उन्होंने कहा कि अयोध्या मसले पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबको सम्मान करना चाहिए। मौलाना ओसामा ने कहा कि सन् 1913 में पहली बार जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला था। इसका मकसद मानवता, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का पैगाम जन-जन तक पहुंचाना था। तबसे यह परंपरा आज तक कायम है। हुजूर पाक पूरी दुनिया और आलम के लिए रहमत बनाकर भेजे गए थे।
खुशी-मायूसी का मैसेज में न करें इजहार
प्रेस कांफ्रेंस में मतीनुल हक ओसामा ने यह भी कहा कि कोर्ट का जो भी फैसला आए, वह सबको मानना है। फैसला हक में आए तो खुशी और विरोध में आए तो मायूसी का इजहार मैसेज या सोशल मीडिया पर न करें।
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प्रेसवार्ता में जमीअत उलमा के नगर अध्यक्ष डॉ. हलीमउल्ला खां, सचिव जुबैर अहमद फारूकी, मौलाना मुहम्मद अनीस खां कासमी, मौलाना नूरुद्दीन अहमद कासमी, हामिद अली अंसारी, मौलाना मुहम्मद अकरम जामई, कारी अब्दुल मुईद चौधरी, मुफ्ती इजहार मुकर्रम कासमी मौजूद रहे।
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इसमें उन्होंने कहा कि अयोध्या मसले पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबको सम्मान करना चाहिए। मौलाना ओसामा ने कहा कि सन् 1913 में पहली बार जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला था। इसका मकसद मानवता, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का पैगाम जन-जन तक पहुंचाना था। तबसे यह परंपरा आज तक कायम है। हुजूर पाक पूरी दुनिया और आलम के लिए रहमत बनाकर भेजे गए थे।
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खुशी-मायूसी का मैसेज में न करें इजहार
प्रेस कांफ्रेंस में मतीनुल हक ओसामा ने यह भी कहा कि कोर्ट का जो भी फैसला आए, वह सबको मानना है। फैसला हक में आए तो खुशी और विरोध में आए तो मायूसी का इजहार मैसेज या सोशल मीडिया पर न करें।
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प्रेसवार्ता में जमीअत उलमा के नगर अध्यक्ष डॉ. हलीमउल्ला खां, सचिव जुबैर अहमद फारूकी, मौलाना मुहम्मद अनीस खां कासमी, मौलाना नूरुद्दीन अहमद कासमी, हामिद अली अंसारी, मौलाना मुहम्मद अकरम जामई, कारी अब्दुल मुईद चौधरी, मुफ्ती इजहार मुकर्रम कासमी मौजूद रहे।