मुश्किल हुआ सफर: जाजमऊ गंगा पुल से आवगमन बंद; तीन माह तक बदले रहेंगे कई जिलों के रास्ते, जानिए वैकल्पिक मार्ग
Kanpur News: जाजमऊ के पुराने गंगा पुल की मरम्मत शुरू होते ही इसका असर सिर्फ कानपुर और उन्नाव तक सीमित नहीं रहेगा। पुल पर भारी वाहनों और बसों की आवाजाही रोकने से इटावा, औरैया, बांदा, महोबा, हमीरपुर, झांसी और उरई की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी अपने सफर का रास्ता बदलना पड़ेगा।
विस्तार
कई रूटों पर दूरी बढ़ेगी, यात्रा का समय बढ़ेगा और रोडवेज बसों का संचालन भी प्रभावित होगा। बसों को करीब 60 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, ऐसे में आने वाले दिनों में किराये पर भी असर पड़ने की संभावना है।
तीन महीने तक बदला रहेगा रास्ता
जाजमऊ पुराने गंगा पुल की मरम्मत के लिए यातायात डायवर्जन लागू किया गया है। एनएचएआई को पुल की बेयरिंग बदलने समेत जरूरी मरम्मत का काम करना है। पहले डायवर्जन का ट्रायल कराया गया और इसके बाद करीब तीन महीने के लिए व्यवस्था लागू की गई।
मौजूदा योजना में लखनऊ और उन्नाव की ओर से कानपुर आने वाले भारी वाहनों को पुराने पुल से प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। हल्के वाहनों के लिए व्यवस्था अलग है। संशोधित योजना के अनुसार कार और बाइक जैसे हल्के वाहन एक लेन से गुजर सकेंगे, जबकि बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से कानपुर की ओर आना होगा।
उन्नाव से औरैया-इटावा जाने वालों के लिए दो विकल्प
उन्नाव से औरैया-इटावा की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए दो वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पहले मार्ग में उन्नाव से औरैया-इटावा की ओर जाने वाले वाहनों को ट्रैफिक गंगा एक्सप्रेसवे से होकर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का प्रयोग करते हुए औरैया-इटावा जाने की व्यवस्था है।
दूसरे मार्ग में वाहनों को एनएच-31 से बिहार होते हुए एनएच-19 पर स्थित बक्सर मोड़ होकर कानपुर, औरैया-इटावा की ओर जाना होगा। इस तरह औरैया-इटावा जाने वाले भारी वाहनों को जाजमऊ पुल से गुजरने के बजाय निर्धारित वैकल्पिक मार्ग अपनाना होगा।
बांदा-महोबा जाने वालों को लालगंज-फतेहपुर होकर जाना होगा
उन्नाव से बांदा और महोबा की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए एनएच-31 का प्रयोग करते हुए लालगंज-फतेहपुर होकर जाने का मार्ग निर्धारित किया गया है। डायवर्जन अवधि में बांदा-महोबा की ओर जाने वाले वाहन इसी वैकल्पिक मार्ग से आगे बढ़ेंगे।
हमीरपुर-झांसी-उरई का भी बदला रास्ता
उन्नाव से हमीरपुर, झांसी और उरई की ओर जाने वाले भारी वाहनों को भी जाजमऊ पुल के बजाय वैकल्पिक मार्ग से जाना होगा। यातायात पुलिस के अनुसार इन वाहनों को एनएच-31 से बिहार होते हुए बक्सर मोड़, फिर एनएच-19 के चौड़गरा, एसएच-46 और घाटमपुर में एनएच-34 होकर हमीरपुर, झांसी-उरई की ओर जाना होगा।
उन्नाव से कानपुर आने वाले भारी वाहनों का रूट भी बदला
उन्नाव से कानपुर की ओर आने वाले भारी वाहनों के लिए भी अलग मार्ग तय किया गया है। ऐसे वाहनों को एनएच-31 से बिहार होते हुए बक्सर मोड़ और फिर एनएच-19 के रास्ते कानपुर की ओर आना होगा। जाजमऊ पुराने गंगा पुल पर मरम्मत कार्य पूरा होने तक भारी वाहनों को निर्धारित डायवर्जन मार्ग से ही आवागमन करना होगा।
इटावा-औरैया वालों के लिए ये रहेगा रास्ता
उन्नाव से औरैया और इटावा की ओर जाने वाले यात्रियों और वाहनों को गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की ओर भेजने की व्यवस्था बताई गई है। उन्नाव से इटावा जाने वाले वाहनों को करीब 30 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। वहीं लखनऊ से इटावा जाने वाले यात्रियों के लिए वैकल्पिक रूट में दूरी लगभग समान रहने की जानकारी दी गई है। यानी इटावा और औरैया के यात्रियों के लिए परेशानी का बड़ा कारण सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि वैकल्पिक मार्ग पर बढ़ने वाला ट्रैफिक भी रहेगा।
रोडवेज बसों का सफर भी होगा लंबा
पुल पर भारी वाहनों के साथ रोडवेज बसों का संचालन भी प्रभावित होगा। कानपुर-लखनऊ रूट पर बड़ी संख्या में बसें चलती हैं और डायवर्जन के कारण इनका रास्ता लंबा हो रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार बसों को करीब 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इसका मतलब यात्रियों को सिर्फ ज्यादा समय ही नहीं देना पड़ेगा, बल्कि बस संचालन की लागत भी बढ़ेगी। लंबा रूट होने से डीजल की खपत और बसों का संचालन समय बढ़ेगा।
किराया बढ़ने की भी संभावना
अतिरिक्त दूरी का असर आने वाले दिनों में रोडवेज बस किराये पर भी पड़ सकता है। परिवहन निगम के सामने लंबी दूरी, अतिरिक्त ईंधन और संचालन लागत की चुनौती होगी। हालांकि किराये में कितना बदलाव होगा, इसका अंतिम फैसला रोडवेज और परिवहन विभाग की ओर से किया जाएगा। अभी इसे संभावित असर के तौर पर देखा जा रहा है।
यानी तीन महीने के इस डायवर्जन में यात्रियों की परेशानी सिर्फ रास्ता बदलने तक सीमित नहीं रहने वाली। किसी को 30 किलोमीटर ज्यादा चलना होगा तो किसी को 75 से 90 किलोमीटर तक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ेगा। बस यात्रियों के लिए सफर लंबा होगा और किराये पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
पुल की मरम्मत क्यों जरूरी है?
जाजमऊ का पुराना गंगा पुल लंबे समय से सुरक्षा जांच के दायरे में रहा है। मरम्मत के दौरान पुल की बेयरिंग समेत जरूरी हिस्सों को दुरुस्त किया जाना है। एनएचएआई की ओर से सुरक्षा के लिहाज से मरम्मत को जरूरी बताया गया है।पुल की मरम्मत से फिलहाल यात्रियों और वाहन चालकों की मुश्किल बढ़ेगी, लेकिन काम पूरा होने के बाद पुराने पुल की संरचनात्मक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। तब तक यात्रियों को अपने गंतव्य के हिसाब से वैकल्पिक रूट देखकर ही सफर की योजना बनानी होगी।