UP: फर्जी आधार बनवा कानपुर में रह रहा बांग्लादेशी परिवार, विधायक ने प्रमाणपत्र में लिखा- मैं इस परिवार को...
सपा विधायक इरफान सोलंकी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब सपा विधायक के प्रमाण पत्र पर बांग्लादेशी जासूस ने अपना व अपने परिवार का फर्जी आधार कार्ड बनवा खुद को भारतीय नागरिक दिखाया और छुपकर शहर में रह रहा था। विधायक का प्रमाणपत्र सामने आया है।
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आगजनी और फर्जी दस्तावेज प्रकरण में विधायक इरफान सोलंकी के मददगारों की तलाश में जुटी पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। जिस बांग्लादेशी डॉ. रिजवान मोहम्मद और परिवार के चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उसे खुद विधायक ने प्रमाणपत्र जारी किया है। विधायक के लेटरपैड पर लिखा है कि वे रिजवान व उसके परिवार के लोगों को भलीभांति जानते और पहचानते हैं।
यह परिवार कई साल से यहां रह रहा है। नीचे विधायक के हस्ताक्षर भी हैं। सपा पार्षद मन्नू रहमान ने भी अपने प्रमाणपत्र पर इसी तरह की संस्तुति की है। ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया कि विधायक ने जो दो प्रमाणपत्र जारी किए हैं, उस पर 19 अगस्त और 19 सितंबर 2017 की तारीख अंकित है। मन्नू रहमान ने वर्ष 2019 में दो प्रमाणपत्र दिए थे।
इसमें लिखा था कि डॉ. रिजवान इंपीरियल रेजीडेंस आर्यनगर कानपुर उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं। जेसीपी ने बताया कि प्रमाणपत्रों को फोरेंसिक लैब भेजकर विधायक और पार्षद के हस्ताक्षर का मिलान कराया जाएगा। पुष्टि होने पर विधायक की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। क्योंकि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उधर, पुलिस कमिश्नर ने खुलासा करने वाली टीम इंस्पेक्टर मूलगंज अनूप सिंह, एसआई सतीश सिंह, अंकिता तिवारी, कांस्टेबल सर्वेश, नितिन, अमित व राघव को एक लाख का पुरस्कार देने की घोषणा की है। बता दें टीम ने एडीसीपी मनीष सोनकर के नेतृत्व में कार्रवाई की है।
जाली पासपोर्ट से की विदेश यात्रा
जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. रिजवान ने भारत से बांग्लादेश ही नहीं अमेरिका, बैंकॉक समेत कई देशों की फर्जी पासपोर्ट से यात्रा की है। एनआईए, एटीएस, मिलिट्री इंटेलिजेंस समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई है। इन सभी सुरक्षा एजेंसियों के अफसर डॉ. रिजवान और उसके परिवार से पूछताछ करेंगे।
एजेंसियों ने खंगालना शुरू किया डॉ. रिजवान और इरफान का संबंध
डॉ. रिजवान को भले ही पुलिस ने जेल भेजने की तैयारी कर ली है, लेकिन जांच एजेंसियों ने डॉ. रिजवान और विधायक इरफान के बीच संबंध तलाशने शुरू कर दिए हैं। वहीं स्थानीय खुफिया विभाग के साथ एनआईए और एटीएस की टीम भी सक्रिय हो गई है। पुलिस कमिश्नर में पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है। हालांकि बहुत से सवाल हैं, जिनके जवाब एजेंसी के साथ पुलिस को भी खोजने हैं। मसलन डॉ. रिजवान कब से देश और कानपुर में रह रहा है, कानपुर में शादी के बाद से क्या कर रहा था, फर्जी पासपोर्ट बनवाने में किसने मदद की, इसकी जानकारी किसको-किसको थी।
कई बड़े लोगों से है रिजवान का संपर्क
रिजवान का शहर के कई बड़े लोगों से संपर्क है। इसके अलावा रिजवान ने अब तक पाकिस्तान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया समेत कई देशों की यात्रा भी की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने किन देशों में किस पासपोर्ट से यात्रा की। सूत्रों के अनुसार रिजवान के पास से दो पासपोर्ट भी मिले हैं। आशंका है कि ऐसे कई पासपोर्ट उसके पास हो सकते हैं।
डॉ. रिजवान ने शहर की युवती से शादी कर बनवाए फर्जी दस्तावेज
बांग्लादेशी डॉ. रिजवान ने वर्ष 1998 में कानपुर के रहने वाले खादिल की बेटी हिना से दिल्ली में शादी की थी। उस वक्तमैरिज सर्टिफिकेट में पता बांग्लादेश का लिखा था। कुछ समय दिल्ली में रहने के बाद बांग्लादेश चला गया। करीब छह साल पहले चोरीछिपे कानपुर में आकर रहने लगा। इसके बाद उसने फर्जी आधार कार्ड बनवाकर अन्य दस्तावेज बनवा लिए। इस पूरे काम में उसकी पत्नी हिना और ससुर खालिद ने मदद की। पुलिस के मुताबिक रिजवान पत्नी को फर्जी तरीके से भारत के बार्डर से बांग्लादेश लेकर गया था। नियमानुसार शादी के बाद दूतावास को सूचना दी जाती है कि कौन कहां रह रहा है, लेकिन रिजवान ने ऐसा नहीं किया। आशंका है कि ये लोग किसी मुल्क के लिए मुखबिरी तो नहीं कर रहे हैं।
न नौकरी न कारोबार, किसके खर्चे पर चल रहा था परिवार
रिजवान की पत्नी हिना का घर मैदा बाजार मेस्टन रोड मूलगंज में था। वर्ष 2016 में जब रिजवान यहां रहने आया तो ससुर को भी साथ में रख लिया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि रिजवान का ससुर खालिद भी उसके साथ अवैध तरीके से बांग्लादेश चला गया था। वहां पर उसने बांग्लादेशी नागरिकता ले ली। फिर यहां अवैध रूप से दाखिल हुआ तो यहां पर भी उसने फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया था। पुलिस जांच में पता चला है डॉ. रिजवान इंपीरियल अपार्टमेंट के फ्लैट का सालाना 4.80 रुपये किराया देता था। एक बेटा खलासी लाइन स्थित एक नामी पब्लिक स्कूल में 11वीं का छात्र है। उसकी सालाना फीस लगभग एक लाख रुपये है। वहीं दूसरा बेटा दीब भी महंगी हायर एजुकेशन ले रहा है। पूरा परिवार कोई काम नहीं करता। ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया कि इस कारण हवाला नेटवर्क की भी जांच पड़ताल की जा रही है। दूसरे देशों से फंडिंग की भी आशंका है।